Ministry of Tribal Affairs और IGNCA मिलकर बनाएंगे आदिवासी संस्कृति का डिजिटल रिकॉर्ड

Ministry of Tribal Affairs और IGNCA के MoU से आदिवासी कला, भाषाओं, लोककथाओं और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

भारत की समृद्ध आदिवासी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और आगे बढ़ाने के लिए Ministry of Tribal Affairs और इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर द आर्ट्स (IGNCA) ने एक नई साझेदारी की है। दोनों संस्थानों ने 28 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इसका मकसद आदिवासी कला, संगीत, भाषाओं, लोक परंपराओं और पारंपरिक ज्ञान को सुरक्षित करना, उनका दस्तावेजीकरण करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

आदिवासी विरासत को सहेजने के लिए साथ आए दोनों संस्थान

इस समझौते के जरिए Ministry of Tribal Affairs और IGNCA के बीच सहयोग के लिए एक संस्थागत ढांचा तैयार किया जाएगा। इसमें आदिवासी समुदायों की मूर्त और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की पहचान, संरक्षण, डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने, शोध और प्रचार पर काम होगा।

इस साझेदारी में Ministry of Tribal Affairs के आदिवासी शोध तंत्र और ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट्स (TRIs) के नेटवर्क को IGNCA की अकादमिक, शोध, संग्रह और क्यूरेटोरियल विशेषज्ञता के साथ जोड़ा जाएगा। इससे आदिवासी कला, संगीत, हस्तशिल्प, भाषाओं, खान-पान, लोककथाओं और पारंपरिक प्रथाओं को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने में मदद मिलेगी।

खत्म होती परंपराओं और भाषाओं पर रहेगा ख़ास ध्यान

भारत की आदिवासी सांस्कृतिक विरासत में कई ऐसी परंपराएं शामिल हैं जो समुदायों के बीच आज भी जीवित हैं। इनमें संगीत, वाद्य यंत्र, शिल्प, भाषाएं, मौखिक परंपराएं, लोककथाएं और पारंपरिक पर्यावरणीय ज्ञान शामिल हैं।

इस सहयोग के तहत ऐसी आदिवासी कलाओं, संगीत, वाद्य यंत्रों और व्यंजनों का दस्तावेजीकरण किया जाएगा, जिनके खत्म होने का खतरा है। साथ ही संकटग्रस्त आदिवासी भाषाओं, लोक परंपराओं, स्वदेशी कला रूपों और लोककथाओं की पहचान, संरक्षण और प्रचार पर भी काम किया जाएगा।

Ministry of Tribal Affairs और IGNCA मिलकर बनाएंगे आदिवासी संस्कृति का डिजिटल रिकॉर्ड

डिजिटल संग्रह और आदिवासी संग्रहालयों पर भी काम

IGNCA के साथ मिलकर डिजिटल संग्रह तैयार करने और आदिवासी कला व कलाकृतियों को दिखाने वाली विशेष गैलरी और डिजिटल संग्रहालय विकसित करने की योजना भी इस साझेदारी का हिस्सा है।

इन संग्रहालयों में आदिवासी समुदायों के इतिहास और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को भी जगह दी जाएगी। शिक्षण संस्थानों और अन्य सीखने के केंद्रों में युवा शिविर आयोजित करने का भी प्रावधान है। इनके जरिए आदिवासी सांस्कृतिक मूल्यों, संरक्षण के टिकाऊ तरीकों और अलग-अलग समुदायों की परंपराओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

Ministry of Tribal Affairs और IGNCA मिलकर बनाएंगे आदिवासी संस्कृति का डिजिटल रिकॉर्ड

कलाकारों और पारंपरिक ज्ञान रखने वालों को मिलेगा मंच

Ministry of Tribal Affairs और IGNCA की यह साझेदारी केवल संरक्षण तक सीमित नहीं रहेगी। प्रदर्शनियों, संग्रहालयों, प्रकाशनों, डिजिटल प्लेटफॉर्म, सांस्कृतिक उत्सवों और ज्ञान साझा करने वाली पहलों के जरिए आदिवासी सांस्कृतिक विरासत को ज़्यादा लोगों तक पहुंचाने की योजना है।

इसके साथ आदिवासी विद्वानों, कलाकारों, कारीगरों, कलाकारों और पारंपरिक ज्ञान रखने वाले लोगों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी कला और ज्ञान को सामने रखने के लिए ज़्यादा मंच मिलने की बात भी कही गई है।

Ministry of Tribal Affairs की सचिव रंजना चोपड़ा ने इस पहल को आदिवासी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रचार की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। वहीं, IGNCA के एचओडी डॉ. के. अनिल कुमार ने कहा कि यह सहयोग डिजिटल अभिलेख और आधुनिक, इंटरैक्टिव आदिवासी संग्रहालय गैलरी विकसित करने में मदद करेगा।

इस साझेदारी के जरिए Ministry of Tribal Affairs और IGNCA भारत की विविध आदिवासी परंपराओं को दस्तावेज के रूप में सुरक्षित करने के साथ उन्हें व्यापक स्तर पर पहचान और मंच देने की दिशा में काम करेंगे।

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