हरियाणा में अब पंचायती ज़मीन पर होगी प्राकृतिक खेती, सरकार लेकर आई ‘स्मार्ट एग्रीकल्चर’ योजना

एपीडा से प्रमाणित प्राकृतिक और जैविक खेती करने वाले किसानों को अब 5 साल तक हर साल प्रति एकड़ 10 हज़ार रुपये की वित्तीय मदद दी जाएगी।

अब हरियाणा (Haryana) के किसान केमिकल फर्टिलाइज़र और जहरीले कीटनाशकों से छुट्टी पाकर प्राकृतिक खेती (Natural farming) करेंगे, और सरकार उनकी हरसंभव मदद करेगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कुरुक्षेत्र में आयोजित कृषि कार्यशाला में बड़ी घोषणाएं (‘Smart Agriculture’ scheme) की हैं, जो हर किसान के चेहरे पर मुस्कान ला देंगी।

अब पंचायतों की ज़मीन पर भी होगी जैविक खेती

सरकार ने अगले साल से एक विशेष नीति बनाने का ऐलान किया है, जिसके तहत पंचायतों की ज़मीन (Panchayat land in Haryana) पर भी किसान प्राकृतिक खेती कर सकेंगे। साथ ही कृषि विभाग के पास मौजूद करीब 800 एकड़ भूमि केवल उन्हीं किसानों को पट्टे पर दी जाएगी, जो कम से कम 10 साल तक प्राकृतिक खेती करने का संकल्प लेंगे।

5 साल तक हर साल मिलेंगे 10 हज़ार रुपये प्रति एकड़

सबसे बड़ी राहत की बात ये है कि एपीडा से प्रमाणित प्राकृतिक और जैविक खेती करने वाले किसानों को अब 5 साल तक हर साल प्रति एकड़ 10 हज़ार रुपये की वित्तीय मदद दी जाएगी। यानी अगर कोई किसान 5 एकड़ में जैविक खेती करता है, तो उसे सालाना 50 हज़ार रुपये सीधे मदद मिलेंगी।

अब 10 शहरों की मंडियों में मिलेगा विशेष स्थान

सरकार ने प्राकृतिक उपज बेचने के लिए पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, सोनीपत, रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, चरखी दादरी और नारनौल की मंडियों में विशेष स्थान आरक्षित करने का फैसला किया है। अब किसानों को अपनी उपज के लिए बाजार की तलाश में भटकना नहीं पड़ेगा।

कुरुक्षेत्र में शुरू होगी स्मार्ट एग्रीकल्चर योजना

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से कुरुक्षेत्र जिले के 2,000 एकड़ क्षेत्र में “स्मार्ट एग्रीकल्चर” योजना शुरू होगी। यहां आधुनिक तकनीकों से प्राकृतिक खेती सिखाई जाएगी। खास बात है कि अगर किसानों को इस योजना में नुकसान हुआ, तो सरकार पूरी भरपाई करेगी।

देसी गाय खरीदने पर अब 30 हज़ार रुपये सब्सिडी

प्राकृतिक खेती के लिए देसी गाय बेहद जरूरी है। इसलिए सरकार ने देसी गाय खरीदने पर सब्सिडी बढ़ाकर 30 हज़ार रुपये कर दी है। ये सुविधा उन किसानों को मिलेगी जिनके पास कम से कम एक एकड़ ज़मीन है।

अब तक 2 लाख किसानों ने किया  रजिस्ट्रेशन

मुख्यमंत्री ने बताया कि 2022 में शुरू की गई प्राकृतिक खेती योजना के तहत अब तक 2 लाख किसानों ने 3 लाख एकड़ भूमि का रजिस्ट्रेशन कराया है। इनमें से 23,930 किसान 44 हज़ार एकड़ से अधिक क्षेत्र में पहले से ही प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।

राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने क्यों कहा -ये वक्त की सबसे बड़ी ज़रूरत?

कार्यशाला में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने चेताया कि रासायनिक खादों और कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल से मिट्टी बंजर हो रही है, पानी जहरीला हो रहा है, और कैंसर, हृदय रोग जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती (देशी गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़ और बेसन से) से न केवल खेती की लागत घटती है, बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहता है।

मोरनी ब्लॉक बनेगा मॉडल, मिलेगा मुफ्त प्रशिक्षण

सरकार ने मोरनी ब्लॉक को प्राकृतिक खेती का मॉडल क्षेत्र बनाने का लक्ष्य रखा है। कुरुक्षेत्र, जींद, सिरसा और करनाल में प्रशिक्षण केंद्र खोले गए हैं, जहां अब तक 12 हज़ार से अधिक किसानों, महिलाओं और युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

क्या आप भी किसान हैं? यह सुनहरा अवसर न चूकें। प्राकृतिक खेती अपनाएं, कम लागत में अच्छी पैदावार पाएं और सरकार से आर्थिक मदद लें। हरियाणा अब प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहा है – क्योंकि आने वाली पीढ़ियों को उपजाऊ जमीन, स्वच्छ पानी और साफ पर्यावरण देना हम सबकी जिम्मेदारी है।

 

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

 

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