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नई दिल्ली में आज, 24 सितंबर 2026 को Resilient Dairy Alliance की National Consultation आयोजित हुई। India Habitat Centre के Tamarind Hall में हुए इस कार्यक्रम का विषय “From Solutions to Scale in Climate-Resilient Dairy” था। इसमें डेयरी क्षेत्र को जलवायु बदलाव के असर से बचाने और पहले से मौजूद समाधानों को बड़े स्तर तक पहुंचाने पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम में Resilient Dairy Alliance की ओर से तैयार की गई White Paper और Playbook जारी की गई। कार्यक्रम में डेयरी उद्योग, सरकार, सहकारी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों को साथ लेकर जलवायु अनुकूल डेयरी व्यवस्था को मज़बूत करने पर विचार रखे गए।
तीन राज्यों की चर्चाओं से तैयार हुआ आधार
Resilient Dairy Alliance के पहले चरण में उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में अलग-अलग स्तर पर चर्चाएं हुई थीं। इसमें डेयरी क्षेत्र से जुड़े लोगों को साथ लाकर जलवायु बदलाव के असर और उससे निपटने के तरीकों को समझने की कोशिश की गई।
इन चर्चाओं के आधार पर राज्य स्तर की रिपोर्ट तैयार की गईं, जिनमें डेयरी क्षेत्र की ज़मीनी स्थिति और प्रमुख ज़रूरतों को सामने रखा गया। आज हुई National Consultation को इसी काम के अगले चरण की शुरुआत के तौर पर रखा गया।
White Paper और Playbook जारी
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में “Scaling Climate-Resilient and Productive Dairy Systems in India” नाम की White Paper जारी की गई। इसके साथ “Securing the Future: Embedding Resilience in the Indian Dairy Sector” नाम की Playbook भी जारी की गई।
इन दोनों दस्तावेजों के जरिए भारतीय डेयरी क्षेत्र में जलवायु से जुड़ी चुनौतियों के बीच उत्पादन और किसानों की आजीविका को मज़बूत करने की दिशा में आगे की चर्चा के लिए आधार तैयार किया गया।
कई विशेषज्ञों ने रखे अपने विचार
कार्यक्रम की शुरुआत Resilient Dairy Alliance के Co-Lead और Milky Mist के Chief Executive Officer डॉ. के. रत्नम के Welcome Address से हुई। इसके बाद Environmental Defense Fund के Chief Advisor-India हिशाम मुंडोल ने Context Setting रखा।
National Dairy Development Board यानी NDDB के Executive Director डॉ. वी. श्रीधर ने Special Address दिया। वहीं, ICRIER के Distinguished Professor डॉ. अशोक गुलाटी ने Keynote Address दिया। कार्यक्रम के अंत में RDA Co-Lead और ITC Limited के Executive Vice President, Agri and Dairy Operations सचिन शर्मा ने Vote of Thanks दिया।
डेयरी क्षेत्र में जलवायु अनुकूलता पर ज़ोर
कार्यक्रम में डेयरी क्षेत्र को बदलते मौसम और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों के लिए तैयार करने पर ज़ोर दिया गया। उद्योग, किसान, सरकार, वित्त और शोध से जुड़े लोगों को साथ लाकर ऐसे समाधानों को आगे बढ़ाने की ज़रूरत बताई गई, जिन्हें बड़े स्तर पर लागू किया जा सके।
वक्ताओं ने डेयरी क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों की आजीविका और लंबे समय की स्थिरता को मज़बूत करने की ज़रूरत पर भी बात रखी। कार्यक्रम में इस बात पर ज़ोर रहा कि Resilient Dairy Alliance की पहल केवल नए समाधान खोजने तक सीमित न रहे, बल्कि पहले से मौजूद उपयोगी तरीकों को ज़्यादा किसानों और डेयरी क्षेत्र तक पहुंचाया जाए।
स्थानीय ज़रूरतों के हिसाब से समाधान बढ़ाने पर ज़ोर
आज हुई Resilient Dairy Alliance National Consultation में अलग-अलग क्षेत्रों में डेयरी किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके लिए उपयोगी समाधानों पर चर्चा हुई। जारी की गई White Paper और Playbook के जरिए Alliance के अगले चरण के काम के लिए दिशा तय की गई। इसका मक़सद डेयरी क्षेत्र में जलवायु से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए उद्योग, सरकार, सहकारी संस्थाओं और दूसरे भागीदारों के बीच सहयोग को मज़बूत करना है।
आज की बैठक में समाधान तैयार करने से लेकर उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने तक की प्रक्रिया पर ध्यान दिया गया। कार्यक्रम का मुख्य फ़ोकस जलवायु अनुकूल डेयरी से जुड़े काम को ज़मीन पर ज़्यादा प्रभावी तरीके से पहुंचाने और भारतीय डेयरी क्षेत्र को आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार करने पर रहा।
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