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उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की अर्थव्यवस्था अब एक नई दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Deputy Chief Minister Keshav Prasad Maurya) ने साफ किया है कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र (Food processing sector) ही वो इंजन है, जो प्रदेश को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने की राह पर ले जाएगा। उन्होंने कहा, ‘ये क्षेत्र न केवल किसानों की आमदनी दोगुनी करने में मदद करेगा, बल्कि कृषि उत्पादों का मूल्य बढ़ाकर युवाओं के लिए हजारों रोजगार के द्वार भी खोलेगा।’
प्रधानमंत्री के सपने को साकार करने का ज़रिया
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने में Food Processing Industry एक कारगर हथियार साबित होगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार औद्योगिक विकास और हरित ऊर्जा (Industrial Development and Green Energy) दोनों को बराबर तवज्जो दे रही है। ख़ास तौर पर Solar energy-based industrial model को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे उद्योगों को बिजली की लागत में राहत मिलेगी और वे ग्लोबल मार्केट बाजार में प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान
डिप्टी सीएम ने उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि Uttar Pradesh Food Processing Industry Policy-2023 के तहत मिलने वाले प्रोत्साहनों और अनुदानों का व्यापक प्रचार किया जाए। इसका उद्देश्य है कि ज़्यादा से ज़्यादा उद्यमी प्रदेश में निवेश करने आएं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिले।
10 नए निवेश प्रस्तावों को मिली हरी झंडी
अपर मुख्य सचिव बी.एल. मीणा की अध्यक्षता में गठित एप्रेजल समिति ने हाल ही में एक अहम बैठक की। इसमें ऑनलाइन पोर्टल पर मिले 10 निवेश प्रस्तावों की गहन समीक्षा के बाद उन्हें मंज़ूरी के लिए सिफारिश की गई। इन प्रस्तावों में शामिल हैं-
:- सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना
:- आधुनिक राइस मिल और मसाला प्रोसेसिंग यूनिट्स
:- मैकरोनी, पास्ता, नूडल्स और दूसरे पैकेज्ड फूड बनाने वाली यूनिट्स
इन परियोजनाओं से प्रदेश में उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, ऊर्जा दक्षता आएगी और लोकल किसानों के उत्पादों का मूल्य बढ़ेगा।
540 यूनिट्स पहले ही ले चुकी हैं लाभ
बी.एल. मीणा ने बताया कि अब तक इस योजना के तहत करीब 540 यूनिट्स फायदा उठा चुकी हैं। इनमें से लगभग 130 इकाइयों में solar power plant या तो लग चुके हैं या लगने के प्रोसेस में हैं। राइस मिल, ऑयल मिल, फ्लोर मिल, कैटल फीड यूनिट, आरटीसी प्लांट, मशरूम उत्पादन और बेकरी प्लांट जैसे कई उद्योगों में On-grid solar system को बढ़ावा दिया जा रहा है।
पर्यावरण और अर्थव्यवस्था का मेल
सौर ऊर्जा अपनाने से न सिर्फ बिजली बिल में कमी आएगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन पर भी लगाम लगेगी। यानी पर्यावरण भी बचेगा और उद्योगों की लागत भी घटेगी। समिति ने सभी निवेशकों को समय-सीमा और शर्तों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।
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