मारुति सुजुकी का बड़ा कदम: खरखौदा में लगेगा 10 TPD का बायोगैस प्लांट, किसानों को भी होगा मोटा फायदा!

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (Maruti Suzuki India Limited) ने पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ […]

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (Maruti Suzuki India Limited) ने पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा (Environmental Conservation and Clean Energy) के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचने की तैयारी कर ली है। कंपनी हरियाणा के खरखौदा स्थित अपने प्लांट में 10 टन प्रतिदिन (TPD) क्षमता का अत्याधुनिक बायोगैस प्लांट (State-of-the-art biogas plant) लगाने जा रही है।

प्लांट की खास बातें:

1.ये प्लांट वित्तीय वर्ष 2026-27 में शुरू होगा।

2.कंपनी इस परियोजना पर 150 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।

3.यह प्लांट खरखौदा यूनिट की कुल गैस जरूरत का 20 फीसदी पूरा करेगा।

4.हर साल करीब 9,490 टन कार्बन उत्सर्जन घटेगा-इतना ही जैसे 4,000 कारें सड़क से हटा दी जाएं। 

 किसानों को कैसे होगा फायदा? 

मारुति सुजुकी सिर्फ अपने प्लांट के लिए बायोगैस नहीं बनाएगी, बल्कि वो किसानों के लिए वरदान साबित होगी। आइए समझते हैं कैसे:

1.पराली की समस्या का समाधान: खरखौदा और आसपास के गांवों (सोनीपत, पानीपत, रोहतक) में किसान हर साल धान की पराली जलाते हैं, जिससे जहरीला धुआं फैलता है। ये बायोगैस प्लांट धान के भूसे, गेहूं के अवशेष, नेपियर घास और जैविक कचरे का यूज़ करेगा। कंपनी किसानों से ये अवशेष खरीदेगी, जिससे किसानों को आमदनी होगी।

2.जलाने से बचत, खाद बनेगा: पराली जलाने से किसानों की मिट्टी की उर्वरता खत्म होती है, लेकिन यहां बायोगैस बनने के बाद बचे हुए स्लरी (डाइजेस्टेट) का यूज़ जैविक खाद के रूप में होगा। ये खाद किसानों को सस्ती या मुफ्त दी जा सकती है, जिससे केमिकल खाद का खर्च घटेगा।

3.रोजगार के नए अवसर: पराली इकट्ठा करने, ढोने और संसाधित करने के लिए गांवों में छोटे ठेकेदार और मजदूरों को काम मिलेगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 10 TPD प्लांट से कम से कम 50-70 ग्रामीण परिवारों को Direct-Indirect रोजगार मिल सकता है।

मानेसर प्लांट का भी हुआ विस्तार

मारुति ने अपने मानेसर स्थित पुराने बायोगैस प्लांट की क्षमता 0.2 TPD से बढ़ाकर 0.7 TPD कर दी है। अब यहां खाद्य अपशिष्ट, नेपियर घास और धान के भूसे (Food waste, Napier grass and paddy straw) से हर साल 3.6 लाख मानक घन मीटर गैस बनेगी। यहां  Anaerobic Digestion Technology का इस्तेमाल होता है। यानी बिना ऑक्सीजन के बैक्टीरिया कचरे को गैस और खाद में बदलते हैं। ये बिल्कुल वैसा ही प्रोसेस है जैसे गोबर गैस प्लांट में होती है, लेकिन बड़े पैमाने पर।

ई-विटारा से लेकर बायोगैस तक: हरित क्रांति

मारुति सुजुकी अब सिर्फ कार बेचने वाली कंपनी नहीं रही। अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मारुति की पहली भारत-निर्मित इलेक्ट्रिक SUV – e-Vitara का उद्घाटन किया था, जो दुनिया भर के 100 देशों में निर्यात होगी। अब बायोगैस प्लांट उसी हरित सोच का हिस्सा है।

पर्यावरण पर कितना असर?

  • 9,490 टन CO2 कम करना- 2 लाख पेड़ लगाने के बराबर।
  • 20 फीसदी गैस की बचत-हर साल करोड़ों रुपये का आयातित एलपीजी या सीएनजी पर निर्भरता घटेगी।

 मारुति सुजुकी का यह कदम “वेस्ट टू एनर्जी” (कचरा से ऊर्जा) और ‘Circular Economy’  का बेहतरीन उदाहरण है। जहां एक तरफ कंपनी को सस्ती और स्वच्छ गैस मिलेगी, वहीं किसानों की पराली जलाने की समस्या खत्म होगी, उनकी आय बढ़ेगी और दिल्ली-एनसीआर की हवा साफ होगी।

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