Table of Contents
पंजाब, जिसे भारत का अन्न भंडार माना जाता है, आजकल रासायनिक खेती और उसके दुष्प्रभावों से जूझ रहा है। ऐसे समय में कुछ लोग ऐसे भी सामने आ रहे हैं जो न सिर्फ़ समाज की सुरक्षा कर रहे हैं, बल्कि लोगों की सेहत बचाने के लिए प्राकृतिक खेती का रास्ता भी दिखा रहे हैं। लुधियाना के गांव बद्दोवाल के रहने वाले पुलिस अधिकारी जरनैल सिंह ऐसी ही एक शख्सियत हैं, जिन्होंने खाकी वर्दी के साथ हाथ में हल थामा और प्राकृतिक खेती का ऐसा मॉडल पेश किया, जो आज हजारों किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने वर्ष 2023 में अपनी पत्नी हरप्रीत कौर के नाम पर “हरप्रीत जरनैल सिंह ऑर्गेनिक फार्मिंग” का कॉन्सेप्ट शुरू किया।
स्वास्थ्य की समस्या से प्राकृतिक की ओर रुख
जरनैल सिंह का ऑर्गेनिक फार्मिंग में आने का सफर किसी शौक से नहीं, बल्कि एक मजबूरी और ज़रूरत से शुरू हुआ। उन्हें नाक की एलर्जी (Sinusitis) की समस्या थी, जिसके लिए उन्होंने चार ऑपरेशन करवाए थे। इतने ऑपरेशनों के बावजूद भी एलर्जी ठीक नहीं हुई और सांस लेने में दिक्कत होने लगी। जब उन्होंने डॉक्टरों से सलाह ली, तो जवाब मिला कि दवाइयां केवल बीमारी को दबा सकती हैं, उसका स्थायी समाधान नहीं कर सकतीं।
उनके पास केवल एक ही समाधान था, अपनी ‘इम्यूनिटी’ (रोगों से लड़ने की क्षमता) को बढ़ाना। डॉक्टरों ने सलाह दी कि यदि वे ऑर्गेनिक और शुद्ध भोजन खाना शुरू करेंगे, तभी उनका शरीर अंदर से मज़बूत होगा। यही वह मोड़ था, जब जरनैल सिंह के जीवन में प्राकृतिक खेती का विचार प्रवेश कर गया।
शहरी जीवन से खेतों की मिट्टी तक
जरनैल सिंह बताते हैं कि उनका जन्म और पालन-पोषण शहर में हुआ था और उनका खेती से कभी कोई संबंध नहीं रहा। शुरुआत में उन्होंने घर पर किचन गार्डन बनाया, लेकिन जानकारी की कमी के कारण वे सफल नहीं हो सके। आखिरकार उन्होंने लुधियाना के पास गांव बद्दोवाल में लीज (ठेके) पर ज़मीन ली। अपने परिवार के लिए शुद्ध सब्ज़ियां उगाने से शुरू हुआ यह सफर जल्द ही एक बड़े व्यावसायिक मॉडल में बदल गया। उन्होंने पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PAU) से विशेष कोर्स किए और खेती की बारीकियों को समझा। इसी सीख के आधार पर उन्होंने प्राकृतिक खेती को अपनाया और आगे बढ़ाया।
प्राकृतिक खेती की अनोखी तकनीकें: मल्चिंग और बफर जोन
जरनैल सिंह की खेती का सबसे बड़ा सिद्धांत प्राकृतिक खेती है। वे ज़मीन को बार-बार जोतने के पक्ष में नहीं हैं। उनका मानना है कि मिट्टी में जितने अधिक जीवाणु और माइक्रोब्स होंगे, फ़सल उतनी ही मज़बूत होगी। उनके फार्म में ट्रैक्टर का उपयोग बहुत कम किया जाता है।
मल्चिंग: वे मल्चिंग तकनीक का उपयोग करके आलू, प्याज और लहसुन जैसी फ़सलें उगाते हैं। वे ज़मीन पर पराली या सूखी घास बिछा देते हैं, जो प्राकृतिक रूप से खाद बन जाती है और मिट्टी की नमी बनाए रखती है। यह तरीका प्राकृतिक खेती को मज़बूत बनाता है।
बफर जोन: अपने खेत के चारों ओर उन्होंने पेड़ लगाकर एक बफर जोन तैयार किया है, ताकि पड़ोसी खेतों में होने वाले जहरीले स्प्रे का असर उनकी फ़सल पर न पड़े।
प्राकृतिक कीटनाशक: वे किसी भी प्रकार के रसायन का उपयोग नहीं करते। कीटों को नियंत्रित करने के लिए वे नीम की पत्तियों को उबालकर उसका घोल तैयार करते हैं और उसका छिड़काव करते हैं। यह प्राकृतिक खेती का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
‘ऑर्गेनिक गोल्ड’ ऐप: किसान और ग्राहकों के लिए साझा प्लेटफॉर्म
जब जरनैल सिंह ने प्राकृतिक खेती शुरू की, तब उन्हें महसूस हुआ कि ऑर्गेनिक किसानों को अपनी फ़सल बेचने के लिए कोई उचित प्लेटफॉर्म नहीं मिलता। इस समस्या का समाधान करने के लिए उन्होंने अपनी तकनीकी विशेषज्ञता (B.Sc, MCA, LLB) का उपयोग करते हुए “ऑर्गेनिक गोल्ड” (Society of Organic Natural Agriculturists – SONA) नाम से एक एप्लिकेशन बनाई।
इस ऐप का उद्देश्य केवल अपना सामान बेचना नहीं, बल्कि दूसरे ऑर्गेनिक किसानों को भी एक मंच पर जोड़ना है। इससे ग्राहकों को शुद्ध उत्पाद उचित कीमत पर मिलते हैं और किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य मिलता है। आज कई पेशेवर लोग, कारोबारी और जागरूक ग्राहक इस प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं।
खेती का कमर्शियल मॉडल और उत्पाद
इसके साथ ही उनके फार्म में सिर्फ़ सब्ज़ियां ही नहीं, बल्कि गेहूं, दालें, गुड़, शक्कर और ख़ास क़िस्म के ऑर्गेनिक अचार भी तैयार किए जाते हैं। गेहूं के लिए वे पीएयू की उत्कृष्ट क़िस्मों जैसे ‘चपाती नंबर 1’ और ‘1482’ का उपयोग करते हैं। उनका पूरा सामान व्यवस्थित तरीके से पैक किया जाता है और ऑनलाइन ऑर्डर के माध्यम से उसकी डिलीवरी की जाती है। हर शनिवार उनका सामान लुधियाना के वेरका प्लांट में लगने वाली ‘किसान मंडी’ में हाथों-हाथ बिक जाता है। यह प्राकृतिक खेती पर आधारित उनके सफल व्यावसायिक मॉडल का हिस्सा है।
ड्यूटी और खेती का संतुलन
जरनैल सिंह बताते हैं कि उन्होंने एक मज़बूत सिस्टम तैयार किया हुआ है। खेत में काम करने के लिए उन्होंने स्थायी कर्मचारी रखे हुए हैं, जो फ़सल की कटाई और उसे मंडी तक पहुंचाने का काम करते हैं। वे स्वयं विश्वविद्यालय के कोर्स, किसान मेलों और कॉन्फ्रेंसों में भाग लेते हैं, ताकि नई तकनीकें सीख सकें। इसके अलावा उनका खेत आजकल पीएयू के विद्यार्थियों और अन्य किसानों के लिए प्रशिक्षण केंद्र की तरह काम कर रहा है। यहां प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं की जानकारी भी दी जाती है।
समाज के लिए संदेश: “खाना साफ़ तो उम्र लंबी”
जरनैल सिंह ने समाज के लिए एक बहुत ही गंभीर संदेश दिया है। उनका कहना है कि आजकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के बढ़ने का मुख्य कारण हमारी खाद्य सामग्री में मौजूद रासायनिक जहर है। आज फ़सलों पर चूहे मारने वाली दवाइयों तक का छिड़काव किया जा रहा है। इन जहरीले तत्वों के खतरनाक अंश हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे शरीर की कोशिकाएं बुरी तरह प्रभावित होती हैं और जानलेवा बीमारियों को जन्म मिलता है।
उनकी लोगों को सलाह है कि जितना संभव हो ऑर्गेनिक और प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों का सेवन करें। यदि आप बाज़ार से सब्ज़ियां या फल खरीदते हैं, तो उन्हें 10 मिनट तक नमक वाले पानी या पोटैशियम परमैंगनेट के घोल में भिगोकर रखें। प्राकृतिक खेती के इस वैकल्पिक मॉडल को केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि अपनी सेहत और आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनाएं। जरनैल सिंह का समर्पण साबित करता है कि नौकरी के साथ-साथ प्रकृति की सेवा भी संभव है। उनका ‘ऑर्गेनिक गोल्ड’ मॉडल आज पंजाब के हर किसान और नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए एक प्रेरणास्रोत है।
ये भी पढ़ें : ब्लूबेरी की खेती का सीक्रेट, जानिए वकालत छोड़ फलों की खेती करने वाले जसप्रीत सिंह से
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुंचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

