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ब्लूबेरी की खेती सबसे ज़्यादा उत्तरी अमेरिका में होती है, लेकिन भारत के कई राज्यों में भी अब ब्लूबेरी की खेती हो रही है। आमतौर पर ठंडी जलवायु में उगने वाले इस फल की ब्लूबेरी की खेती पंजाब में भी सफलतापूर्वक की जा रही है। पंजाब के जसप्रीत सिंह ने ब्लूबेरी फार्मिंग में अपनी अलग पहचान बनाई है। 2016 से Exotic fruit farming करने वाले जसप्रीत Grow bag और ज़मीन दोनों में ब्लूबेरी की खेती कर रहे हैं। आधुनिक तकनीक की मदद और खेती को एक बिज़नेस मॉडल की तरह पेश करके जसप्रीत ने युवाओं को इस ओर आकर्षित किया है।
ब्लूबेरी की खेती को सफल बनाने के लिए किन बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है और कैसे युवा आज के ज़माने में इंटरनेट से आधुनिक खेती के गुर सीख सकते हैं, इन मुद्दों पर जसप्रीत ने चर्चा की किसान ऑफ इंडिया के संवाददाता सर्वेश बुंदेली से।
वकालत छोड़ शुरू की विदेशी फलों की खेती
लुधियाना के जसप्रीत सिंह, जो कभी पेशे से वकील थे और उन्होंने हाईकोर्ट में भी प्रैक्टिस की हुई है, मगर बचपन से ही उनका मन पौधों में लगता था। इसलिए उन्होंने 2016 में विदेशी फलों की खेती शुरू कर दी। इससे पहले 2013 में उन्होंने टेरेस गार्डन भी बनाया था और उसके कुछ पौधों को अपने कमर्शियली शुरू किए गए फार्म में लगाया। जसप्रीत बताते हैं कि वो ड्रैगन फ्रूट, ब्लूबेरी, एवोकाडो, पैशन फ्रूट, ब्लैकबेरी और Mandarin की कई वैरायटी उगा रहे हैं। इनमें ब्लूबेरी की खेती को उन्होंने विशेष रूप से अपनाया है।
ब्लूबेरी की खेती को अम्लीय मिट्टी है ज़रूरी
जसप्रीत कहते हैं कि ब्लूबेरी की खेती सिर्फ़ एसिडिक यानी अम्लीय मिट्टी में ही की जा सकती है यानी मिट्टी का pH 4.5 से 5.5 होना चाहिए, लेकिन पंजाब और पूरे भारत में इतनी एसिडिक मिट्टी कहीं नहीं है। बहुत कम क्षेत्र, जैसे पहाड़ी इलाके जहां पाइन और चीड़ के जंगल होते हैं, वहां की मिट्टी इतनी एसिडिक होती है।
वो बताते हैं कि पूरी दुनिया में जहां भी ब्लूबेरी की खेती हो रही है, वहां अधिकांश पौधे Grow bag में ही उगाए जा रहे हैं, क्योंकि ग्रो बैग में मिट्टी का pH आसानी से मेंटेन किया जा सकता है, लेकिन ज़मीन में इसे मेंटेन करना मुश्किल होता है। वो सलाह देते हैं कि अगर कोई कमर्शियली ब्लूबेरी की खेती करना चाहता है, तो ग्रो बैग में ही उगाना बेहतर है।
कब न लगाए पौधे?
ब्लूबेरी का पौधा एक बार लगाने के बाद बहुत लंबा चलता है। जसप्रीत कहते हैं कि अगर ब्लूबेरी का पौधा ज़मीन में लगा है तो ये 30-40 साल तक चलता है, लेकिन ग्रो बैग में 10-12 साल तक चलता है, फिर आपको मिट्टी या पौधा बदलना पड़ता है। जहां तक इसकी रोपाई का सवाल है तो ब्लूबेरी के पौधे पूरे साल लगाए जा सकते हैं, मगर कोशिश करनी चाहिए कि गर्मी में जब कम Humidity होती है तो इसे न लगाएं। बारिश के समय इसे लगाया जा सकता है। सही समय का चयन ब्लूबेरी की खेती में बेहतर परिणाम देता है।
पोषक तत्वों की आपूर्ति
जहां तक पोषक तत्वों की बात है तो पौधों को Water fertigation के ज़रिए पोषक तत्वों की आपूर्ति की जाती है। इसके लिए पानी का pH मेंटेन करके रखना ज़रूरी है। फर्टिलाइज़र की ज़रूरत विकास की अवस्था पर निर्भर करती है। जैसे पौधे विकास अवस्था में हैं, तो अलग फर्टिलाइज़र की ज़रूरत होगी। फूल आने और फल देने वाली स्टेज में अलग पोषक तत्वों की ज़रूरत होती है।
बेरी डेवलपमेंट यानी जब बेरी का साइज़ बढ़ता है तो इस दौरान अलग तरह का फर्टिलाइज़र डालना होता है। वो बताते हैं कि एक ग्रो बैग से 2.5 से 3 किलो तक उत्पादन मिल जाता है। जसप्रीत ने ग्रो बैग के साथ ही ज़मीन का pH मेंटेन करके खुले में भी 400 पौधे लगाए हैं। वो बताते हैं कि जब मिट्टी में pH कम होगा तो पत्ते पीले पड़ने लगते हैं या बीच में धारी जैसी बनने लगती है। इसलिए ब्लूबेरी की खेती में pH का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
क्या ज़रूरी है गर्मी और ठंडी से बचाव?
जसप्रीत कहते हैं कि ब्लूबेरी को ठंडी जलवायु पसंद है, इसलिए ठंड के मौसम में किसी तरह के बचाव की ज़रूरत नहीं होती है, बल्कि ठंड तो ब्लूबेरी के लिए अच्छी होती है। लेकिन गर्मी के दो महीने पौधों को तेज़ धूप से बचाना ज़रूरी है। उन्होंने इसके लिए नेट लगाया है। इसके दो फायदे हैं, एक तो धूप से बचाव होता है और दूसरा पक्षी बेरी को नुकसान नहीं पहुंचा पाते हैं। इस तरह का प्रबंधन ब्लूबेरी की खेती को अधिक सुरक्षित और लाभदायक बनाता है।
खेती से पहले मार्केटिंग बहुत ज़रूरी है
अगर कोई खेती से मुनाफा कमाना चाहता है तो सिर्फ़ फ़सल उगाना सीखना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उगाने से पहले मार्केटिंग सीखना ज़रूरी है, ताकि वो अपनी उगाई फ़सल को उचित दाम पर बेच सके। जसप्रीत कहते हैं कि युवाओं के लिए एग्रीकल्चर एक अच्छा करियर ऑप्शन हो सकता है, मगर उगाने से पहले उन्हें मार्केटिंग देख लेनी चाहिए। इसके अलावा वो बताते हैं कि आधुनिक खेती के गुर उन्होंने खुद इंटरनेट से सीखे हैं, तो युवा भी आज की तकनीक का लाभ उठा सकते हैं। सही योजना और बाज़ार की समझ के साथ ब्लूबेरी की खेती किसानों और युवाओं के लिए एक बेहतर व्यवसायिक विकल्प बन सकती है।
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