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राजस्थान सरकार (Government of Rajasthan) ने गौवंश को घातक लंपी स्किन रोग (Lumpy Skin Disease) से बचाने के लिए एक बड़ा Statewide vaccination drive शुरू की है। पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने ब्यावर ज़िले की तिजारती सर्राफान गौशाला से इस अभियान का शुभारंभ किया। इस साल राज्य सरकार ने साल 2026-27 के दौरान 111.51 लाख गौवंशीय पशुओं के मुफ्त टीकाकरण (Free vaccination of cattle) का टारगेट रखा है, जो पिछले साल 108.95 लाख के आंकड़े से ज़्यादा है।
गोट पॉक्स नहीं, अब लगेगी स्पेशल वैक्सीन
इस बार का अभियान पिछले अभियानों से काफी अलग है। दो साल पहले जब लंपी का भयानक प्रकोप आया था, तब इस बीमारी के लिए कोई स्पेशल वैक्सीन मौजूद नहीं थी। उस समय गोट पॉक्स वैक्सीन (Goat Pox Vaccine) का इस्तेमाल कर पशुओं की इम्युनिटी बढ़ाई गई थी। लेकिन साइंटिफिक स्टडीज में ये साबित हुआ है कि गोट पॉक्स वैक्सीन लम्पी रोग से केवल सीमित सुरक्षा (मात्र 21.7 फीसदी प्रभावशीलता) प्रदान करती है। यही कारण है कि राजस्थान में अब पहली बार लम्पी स्किन डिजीज के लिए ख़ास तौर से विकसित Homologous Ranchi strain live attenuated vaccine का इस्तेमाल किया जाएगा।
ये नई वैक्सीन भारत सरकार के ICAR-NRCE (National Research Centre on Equines) द्वारा विकसित की गई है और पिछली वैक्सीन की तुलना में अधिक प्रभावी है। विशेषज्ञों के अनुसार, ये वैक्सीन पशुओं में मज़बूत एंटीबॉडी और सेल्युलर इम्यून रिएक्शन पैदा करती है, जो लंपी रोग से बचाव के लिए ज़रूरी है।
2022 का काला इतिहास: जब 74 हजार से ज़्यादा गोवंश ने गंवाई जान
राजस्थान लंपी रोग का दंश झेल चुका है। साल 2022 में इस बीमारी ने पूरे देश में तबाही मचाई थी, जिसमें करीब 74 हजार गौवंश की मौत हुई थी। पूरे भारत में इस महामारी से 200,000 से अधिक गोवंश की जान गई थी और दूध उत्पादन पर गंभीर असर पड़ा था। राजस्थान अकेले ऐसा राज्य था जहां उस साल 11.2 फीसदी गोवंश प्रभावित हुए थे। हालांकि, वक्त पर टीकाकरण की बदौलत 2023 में ये आंकड़ा घटकर 0 फीसदी हो गया, जिससे राज्य को करीब 23,016 करोड़ रुपये के नुकसान से बचाया जा सका।
क्यों ज़रूरी है ये अभियान?
Lumpy Skin Disease एक संक्रामक वायरल बीमारी (Infectious viral disease) है, जो मुख्य रूप से गाय और अन्य गोवंशीय पशुओं को प्रभावित करती है। इसके प्रमुख लक्षणों में शरीर पर गांठें बनना, तेज बुखार, दूध उत्पादन में कमी और गंभीर मामलों में पशु की मृत्यु शामिल हैं। यह बीमारी मच्छरों और टिक्स जैसे खून चूसने वाले कीड़ों से फैलती है। गर्म और नम जलवायु में ये कीड़े तेजी से पनपते हैं, इसलिए मानसून से पहले टीकाकरण करना बहुत ही ज़रूरी है।
दो महीने चलेगा अभियान, गांव-गांव जाएंगी टीमें
पशुपालन विभाग ने पूरे अभियान को फ्री रखा है। विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर पशुओं को वैक्सीन लगाएंगी। इस बार अभियान को बेहद प्रभावी बनाने के लिए माइक्रो लेवल प्लानिंग की गई है और जिला व ब्लॉक स्तर पर टीकाकरण के लक्ष्य अलॉट किए गए हैं। ब्यावर जिले में पहले ही दिन गौशाला के सभी 773 गोवंशीय पशुओं का शत-प्रतिशत टीकाकरण किया जा चुका है।
पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने सभी पशुओं का समय पर टीकाकरण कराएं और विभाग की टीमों का पूरा सहयोग करें। ये अभियान न केवल गौवंश की रक्षा करेगा बल्कि राजस्थान के लाखों पशुपालकों की आजीविका को भी सुरक्षित रखेगा।
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