मध्यप्रदेश कृषि को मिला बड़ा तोहफा: सिवनी का सीताफल और बुरहानपुर का केला को मिला GI Tag

मध्यप्रदेश के दो प्रमुख फल सिवनी जम्बो सीताफल और बुरहानपुर केला को भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication) यानी GI Tag से सम्मानित किया गया है।

मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) की कृषि विरासत को एक नई पहचान मिली है। राज्य के दो प्रमुख फल सिवनी जम्बो सीताफल और बुरहानपुर केला को भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication) यानी GI Tag से सम्मानित किया गया है। ये उपलब्धि न केवल इन जिलों की ख़ास कृषि पहचान (Unique Agricultural Identification)  को राष्ट्रीय मान्यता देती है, बल्कि हजारों किसानों के लिए बेहतर बाजार, अधिक मूल्य और निर्यात के नए द्वार भी खोलती है।

GI टैग का क्या मतलब?

जीआई टैग एक कानूनी पहचान है, जो किसी उत्पाद को उसके ख़ास भौगोलिक क्षेत्र से जोड़ती है। अब केवल सिवनी और बुरहानपुर के निर्धारित क्षेत्रों में उत्पादित फल ही इन नामों से बेचे जा सकेंगे। इससे नकली और भ्रामक उत्पादों पर रोक लगेगी और लोकल किसानों को  फायदा मिलेगा।

सिवनी जम्बो सीताफल: स्वाद का राजा

सिवनी जिले का सीताफल अपने विशाल आकार, शानदार क्वालिटी और प्राकृतिक मिठास के लिए पूरे देश में फेमस है। नॉर्मल सीताफल से कई गुना बड़ा यह फल 200 से 650 ग्राम तक का होता है, जबकि भूतबंधानी क्षेत्र में तो 800 ग्राम से 1 किलोग्राम तक वजनी सीताफल मिलते हैं।

खेती का आंकड़ा

  • 695 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती
  • 6090 मीट्रिक टन Annual production
  • दिल्ली, मुंबई, नागपुर, रायपुर, वाराणसी जैसे बड़े बाजारों में स्पेशल मांग

कैसे मिली ये अचीवमेंट?

Department of Horticulture and Food Processing ने 2023 में भूतबंधानी सीताफल क्रॉप प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के ज़रीये से आवेदन किया। डॉ. आशा उपवंशी-वासेवार (Assistant Director of Horticulture) के मार्गदर्शन में ये सफलता मिली।

सीताफल के 100 इस्तेमाल 

सीताफल केवल फल नहीं, बल्कि एक उद्योग है:

  • पल्प से आइसक्रीम, रबड़ी, बासुंदी, लस्सी, शेक
  • पत्तियों और छिलकों से जैविक खाद और औषधीय उत्पाद
  • 2 किसान उत्पादक संगठन (FPO) और 3 प्रोसेसिंग यूनिट्स

 बुरहानपुर केला: सदियों पुरानी विरासत

बुरहानपुर का केला अपने ख़ास स्वाद, आकर्षक रंग और हाई क्वालिटी के लिए मशहूर है। यहां केला अनुकूल जलवायु, उपजाऊ भूमि और विशेष भौगोलिक परिस्थितियों का परिणाम है।

ऐतिहासिक और आर्थिक महत्व

  • 1960 के दशक से व्यावसायिक खेती शुरू
  • 26,120 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती
  • 18,640 किसान जुड़े
  • 18.28 लाख टन वार्षिक उत्पादन

प्रोसेसिंग बिज़नेस को बढ़ावा

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत:

  • 55 से अधिक केला प्रोसेसिंग यूनिट्स
  • मूल्य संवर्धित उत्पादों से किसानों को अतिरिक्त आय

 मध्यप्रदेश के GI टैग उत्पादों की शानदार लिस्ट

मध्यप्रदेश पहले भी कई उत्पादों को GI टैग दिला चुका है:

  • रतलामी सेव
  • कड़कनाथ चिकन
  • रियावन लहसुन
  • चिन्नौर चावल
  • सुंदरजा आम
  • मालवी गराड़ू
  • सैलाना की बालम ककड़ी
  • मालवी आलू

आने वाला वक्त सुनहरा

ये उपलब्धि मध्यप्रदेश के किसानों के लिए एक नई सुबह है। सिवनी का सीताफल और बुरहानपुर का केला अब पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाएंगे। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।

 

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