National Edible Oil Mission: देश की कड़ाही में अब होगा ‘देशी’ तेल, 2030 तक आधा होगा आयात, किसानों की बढ़ेगी आमदनी

केंद्र सरकार ने एक ऐसी महत्वाकांक्षी योजना (National Edible Oil Mission) पर काम शुरू किया है, जो हमारी थाली को विदेशी तेल के छौंकों से बचाने और किसानों की किस्मत बदलने का दावा करती है।

National Edible Oil Mission: देश की कड़ाही में अब होगा 'देशी' तेल, 2030 तक आधा होगा आयात, किसानों की बढ़ेगी आमदनी

देश की रसोई का एक बड़ा सच यह है कि हमारी कड़ाही में जो तेल गर्म हो रहा है, उसका 57 फीसदी हिस्सा विदेश से आयात किया जाता है। मतलब, इंडोनेशिया-मलेशिया का पाम तेल (Indonesian-Malaysian palm oil) और दूसरे देशों के सोयाबीन (Soybean) पर हमारी निर्भरता खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है। लेकिन अब केंद्र सरकार ने एक ऐसी महत्वाकांक्षी योजना (National Edible Oil Mission) पर काम शुरू किया है, जो हमारी थाली को विदेशी तेल के छौंकों से बचाने और किसानों की किस्मत बदलने का दावा करती है।

57 से 28 फीसदी पर आएगा आयात

सरकार का टारगेट क्लियर है,अगले सात सालों में खाद्य तेल आयात को 57 फीसदी से घटाकर सिर्फ 28 फीसदी करना। ये कोई छोटा टारगेट नहीं है। इसे पूरा करने के लिए ‘National Edible Oil Mission’ के तहत चार मोर्चों पर जोर दिया जा रहा है:

  1. उन्नत बीजों से बंपर पैदावार
  2. गांव के पास ही तेल निकालने की व्यवस्था
  3. क्लस्टर आधारित वैज्ञानिक खेती
  4. मज़बूत सरकारी खरीद व्यवस्था

गांव बनेगा फैक्ट्री, किसान बनेगा बिज़नेसमैन

सबसे रोमांचक बदलाव है ग्रामीण स्तर पर तेल एक्सट्रैक्शन (Oil extraction) इकाइयों की स्थापना। अब तक 263 इकाइयों को मंज़ूरी दी जा चुकी है, जिन्हें सरकार 7 लाख रुपये तक की सब्सिडी दे रही है। इसका मतलब यह कि अब किसान अपनी उपज को दूर के बाजार में न बेचकर, अपने ही गांव या ब्लॉक में स्थित इकाई में बेच सकेगा। इससे मध्यस्थ कम होंगे और किसान को बेहतर दाम मिलेगा। ये कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ‘प्रोसेसिंग’ का नया  चैप्अटर जोड़ देगा।

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500 ज़िलों में 1076 क्लस्टर: वैज्ञानिक खेती का जाल 

तेलहन उत्पादन (Oilseed production) बढ़ाने के लिए क्लस्टर मॉडल अपनाया गया है। देश के 500 जिलों में 1076 क्लस्टर सिलेक्ट  किए गए हैं, जो लगभग 13 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते हैं। इनमें किसानों को एक हेक्टेयर तक मुफ्त में उन्नत बीज दिए जा रहे हैं और आधुनिक खेती की ट्रेनिंग भी। सरसों, सोयाबीन, मूंगफली और सूरजमुखी की नई किस्मों (New varieties of mustard, soybean, groundnut, and sunflower) के बीजों से 11 लाख हेक्टेयर में बुवाई पहले ही शुरू हो चुकी है।

MSP पर मज़बूत खरीद

किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए सरकारी ख़रीद को मजबूत किया गया है। पीएम-आशा योजना के तहत पिछले साल लगभग 2 मिलियन टन सोयाबीन, 1.77 मिलियन टन मूंगफली और 0.5 मिलियन टन सरसों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की गई। इससे किसानों को आमदनी का भरोसा मिला है।

 तिलहन की ग्रीष्मकालीन फसल!

उत्पादन बढ़ाने के लिए अब गर्मी के मौसम में भी तिलहन फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। पिछले साल 9.5 लाख हेक्टेयर में ग्रीष्मकालीन मूंगफली, सूरजमुखी और तिल की बुवाई हुई, जो पिछले वर्ष से अधिक है। इससे सालभर उत्पादन का चक्र बना रहेगा।

2030 तक का टारगेट: उत्पादन दोगुना, आयात आधा 

सरकार का दावा है कि 2030-31 तक तेलहन उत्पादन को 3.9 करोड़ टन से बढ़ाकर 7 करोड़ टन और खाद्य तेल उत्पादन को 12.5 मिलियन टन से बढ़ाकर 20 मिलियन टन से अधिक किया जा सकता है। यदि ये योजना सफल होती है, तो ये न सिर्फ Edible oil  में आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक कदम होगा, बल्कि किसानों की आय दोगुनी करने और ग्रामीण रोजगार बढ़ाने का भी एक शक्तिशाली मॉडल साबित होगा।  

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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