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बिहार के कटिहार जिले में एक बार फिर तिलहनी फ़सलों की ओर किसानों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश तेज़ हो गई है। केंद्र सरकार की नेशनल मिशन ऑन एडिवल ऑयल योजना के तहत सूरजमुखी जैसी फ़सलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य किसानों को नई दिशा देना और देश में तेल उत्पादन को बढ़ाना है।
घटते रकबे के बीच फिर से बढ़ रही उम्मीद
कुछ साल पहले तक सीमांचल और कोशी क्षेत्र में सूरजमुखी की खेती किसानों की पहचान हुआ करती थी। लेकिन समय के साथ किसानों का रुझान मक्का और गेहूं की ओर बढ़ गया, जिससे सूरजमुखी की खेती का क्षेत्र कम हो गया।
अब नेशनल मिशन ऑन एडिवल ऑयल के ज़रिए सरकार फिर से इस खेती को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है, ताकि किसान तिलहनी फ़सलों की ओर लौट सकें।
योजना के तहत बड़ा बजट और लक्ष्य
नेशनल मिशन ऑन एडिवल ऑयल योजना को वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक लागू किया गया है, जिसमें 11,440 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना के तहत देश में तिलहन उत्पादन को 39.6 मिलियन टन से बढ़ाकर 70.3 मिलियन टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सूरजमुखी की खेती इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
कृषि विज्ञान केंद्रों की अहम भूमिका
इस दिशा में कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। नेशनल मिशन ऑन एडिवल ऑयल के तहत बिहार के 44 कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से 7000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में तिलहनी फ़सलों का प्रदर्शन किया गया है।
इन प्रयासों में सूरजमुखी की खेती को भी प्रमुख स्थान दिया गया है, ताकि किसानों को इसके फ़ायदे समझ में आएं और वे इसे अपनाएं।
किसानों को मिल रही सुविधाएं और प्रोत्साहन
सरकार द्वारा नेशनल मिशन ऑन एडिवल ऑयल के तहत किसानों को कई तरह की सुविधाएं दी जा रही हैं। इच्छुक किसानों को सूरजमुखी की खेती के लिए मुफ्त बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके साथ ही जैव उर्वरक और जैव कीटनाशी जैसे इनपुट भी दिए जा रहे हैं, जिससे फ़सल की गुणवत्ता बेहतर हो और उत्पादन में वृद्धि हो सके। इससे किसान कम लागत में बेहतर परिणाम हासिल कर पा रहे हैं।

फ़सल चक्र से मिट्टी की उर्वरा शक्ति में सुधार
विशेषज्ञों का मानना है कि सूरजमुखी की खेती को फ़सल चक्र में शामिल करना बेहद ज़रूरी है। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है और उत्पादन भी बेहतर होता है। नेशनल मिशन ऑन एडिवल ऑयल के तहत किसानों को इस बारे में जागरूक किया जा रहा है कि वे दलहन और तिलहन फ़सलों को अपनी खेती का हिस्सा बनाएं।
अधिकारियों का फ़ोकस और जागरूकता अभियान
कटिहार के जिला कृषि पदाधिकारी मिथिलेश कुमार के अनुसार, नेशनल मिशन ऑन एडिवल ऑयल का मुख्य फ़ोकस तिलहन और दलहन फ़सलों को बढ़ावा देना है। इसके लिए लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
किसानों को समझाया जा रहा है कि सूरजमुखी की खेती न केवल मुनाफ़े का ज़रिया है, बल्कि ये खेती को संतुलित और टिकाऊ बनाने में भी मदद करती है।
खेती में नई दिशा की ओर बढ़ते किसान
कटिहार और आसपास के क्षेत्रों में अब धीरे-धीरे किसान फिर से सूरजमुखी की खेती की ओर लौटने लगे हैं। नेशनल मिशन ऑन एडिवल ऑयल के कारण उन्हें नई उम्मीद और बेहतर अवसर मिल रहे हैं।
ये पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगी, बल्कि देश को तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
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Pic Credit: PB-SHABD

