जनपद अलीगढ़ में किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एक मजबूत सहारा बनकर उभरी है। विकास भवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में खरीफ 2025 और रबी 2025-26 के दौरान फसल क्षति से प्रभावित किसानों को राहत राशि वितरित की गई। इस अवसर पर 464 किसानों को कुल ₹2 करोड़ 45 लाख की क्षतिपूर्ति सीधे हस्तांतरित की गई, जिससे किसानों के चेहरे पर राहत की मुस्कान देखने को मिली।
किसानों को मिली बड़ी आर्थिक सहायता
कार्यक्रम के दौरान जनपद के 464 कृषकों को फसल क्षति के बदले कुल ₹2.45 करोड़ की सहायता राशि प्रदान की गई। यह राशि सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर की गई, जिससे उन्हें तत्काल आर्थिक राहत मिल सके और वे अगली फसल की तैयारी कर सकें।
शीर्ष किसानों को मिला विशेष सम्मान
कार्यक्रम में सर्वाधिक क्षतिपूर्ति प्राप्त करने वाले पांच किसानों को कोल विधायक अनिल पाराशर द्वारा प्रतीकात्मक रूप से चेक प्रदान किए गए। इसके साथ ही अन्य पात्र किसानों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए, जिससे उनका मनोबल बढ़ा।
विधायक ने किया योजना का लाभ लेने का आह्वान
इस अवसर पर कोल विधायक अनिल पाराशर ने किसानों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि कृषि से जुड़ी सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार उर्वरकों और रसायनों का संतुलित उपयोग करने, सहफसली खेती अपनाने और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए भी प्रेरित किया।
प्राकृतिक आपदा में सुरक्षा कवच बन रही योजना
कार्यक्रम में संयुक्त कृषि निदेशक अलीगढ़ मंडल, श्रवण कुमार ने बताया कि फसल बीमा योजना किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ओलावृष्टि, जलभराव जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल को होने वाले नुकसान की भरपाई इस योजना के माध्यम से की जाती है। उन्होंने बताया कि इस योजना में प्रीमियम की राशि बहुत कम होती है, जिससे अधिक से अधिक किसान इसमें शामिल हो सकते हैं। किसान क्रेडिट कार्ड धारकों का बीमा स्वतः हो जाता है, जबकि अन्य किसान भी जन सेवा केंद्रों के माध्यम से आसानी से अपना फसल बीमा करा सकते हैं।
किसानों के लिए भरोसे की योजना
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना आज किसानों के लिए एक भरोसेमंद सुरक्षा कवच बन चुकी है। इससे न केवल उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिलती है, बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी खेती जारी रखने का आत्मविश्वास मिलता है।
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