राष्ट्रीय बागवानी मिशन से बदली खेती की तस्वीर, कोरबा में तरबूज की बंपर खेती से किसान बन रहे लखपति

उद्यान विभाग के अनुसार, कोरबा जिले की जलवायु और मिट्टी तरबूज की खेती के लिए बेहद अनुकूल है। वर्तमान में लगभग 650 हेक्टेयर क्षेत्र में तरबूज की खेती की जा रही है।

आकांक्षी जिला कोरबा में केंद्र सरकार की राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM) योजना किसानों के लिए आय बढ़ाने का मजबूत माध्यम बनकर उभरी है। आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र में अब किसान पारंपरिक धान की खेती से हटकर तरबूज, खीरा और अन्य बागवानी फसलों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। सरकारी सहायता और वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग से किसान कम लागत में अधिक उत्पादन कर बेहतर मुनाफ़ा कमा रहे हैं।

जिले में 650 हेक्टेयर में तरबूज की खेती

उद्यान विभाग के अनुसार, कोरबा जिले की जलवायु और मिट्टी तरबूज की खेती के लिए बेहद अनुकूल है। वर्तमान में लगभग 650 हेक्टेयर क्षेत्र में तरबूज की खेती की जा रही है। किसानों को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत उन्नत बीज, उर्वरक, सिंचाई सुविधाएं और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है, जिससे वे आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से खेती कर बेहतर उत्पादन हासिल कर रहे हैं।

कितनी जमीन पर कर सकते हैं खेती?

तरबूज की खेती छोटे और सीमांत किसान भी आसानी से कर सकते हैं। इसकी शुरुआत आधे एकड़ यानी लगभग 0.2 हेक्टेयर से भी की जा सकती है, जबकि एक से दो एकड़ में खेती करने पर अच्छा मुनाफा मिलने की संभावना रहती है। बड़े किसान इसे पांच एकड़ या उससे अधिक क्षेत्र में व्यावसायिक स्तर पर भी कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, एक एकड़ में तरबूज की खेती से औसतन 80 हजार से 1.5 लाख रुपये तक की आय संभव है, जो बाजार भाव और उत्पादन पर निर्भर करती है।

किसानों को क्या-क्या सहायता मिलती है?

राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत किसानों को उन्नत बीज और पौध सामग्री उपलब्ध कराई जाती है, जिससे बेहतर गुणवत्ता की फसल तैयार होती है। इसके साथ ही ड्रिप इरिगेशन जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली पर सरकार सब्सिडी देती है, जिससे पानी की बचत होती है और उत्पादन बढ़ता है। खेत में नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग शीट भी दी जाती है। इसके अलावा संरक्षित खेती, फेंसिंग, प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। फसल कटाई के बाद भंडारण और बाज़ार तक पहुंच के लिए भी किसानों को सहयोग दिया जाता है, जिससे उन्हें बेहतर दाम मिल सके।

कितनी मिलती है Subsidy?

राष्ट्रीय बागवानी मिश योजना के तहत किसानों को विभिन्न गतिविधियों पर अलग-अलग दर से अनुदान दिया जाता है। ड्रिप इरिगेशन पर लागत का लगभग 50 से 70 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलती है, जिससे सिंचाई की लागत कम हो जाती है। मल्चिंग के लिए प्रति हेक्टेयर 25 हजार से 40 हज़ार रुपये तक सहायता दी जाती है। उन्नत बीज और रोपण सामग्री पर भी 40 से 60 प्रतिशत तक अनुदान मिलता है। वहीं पॉलीहाउस या नेट हाउस जैसी संरक्षित खेती पर लगभग 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है। इसके अलावा फल और सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रति हेक्टेयर 30 हजार से 1 लाख रुपये तक की सहायता भी दी जाती है। यह पूरी राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में DBT के माध्यम से भेजी जाती है।

किसान की सफ़लता: एक एकड़ से दोगुना मुनाफ़ा

ग्राम पंचायत देवरमाल के किसान लाल सिंह कंवर इस योजना से लाभान्वित होने वाले किसानों में से एक हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष उन्होंने एक एकड़ में तरबूज की खेती की और बाज़ार में अच्छी कीमत मिलने के कारण उन्हें लागत से लगभग दोगुना मुनाफ़ा हुआ। उनका कहना है कि धान की तुलना में तरबूज की खेती में कम पानी लगता है और फसल जल्दी तैयार हो जाती है, जिससे समय पर आमदनी मिलती है।

कैसे करें योजना के लिए आवेदन?

इस योजना का लाभ लेने के लिए किसान अपने नजदीकी उद्यान विभाग कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा कई राज्यों में ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध है, जहां किसान कृषि या उद्यान विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या DBT पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक, भूमि से संबंधित दस्तावेज और पासपोर्ट साइज फोटो की आवश्यकता होती है।

पात्रता क्या है?

राष्ट्रीय बागवानी मिशन का लाभ लेने के लिए किसान के पास स्वयं की या लीज पर ली गई कृषि भूमि होना आवश्यक है। इसके साथ ही बागवानी फसलों की खेती करने की इच्छा और राज्य सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन करना जरूरी होता है। इस योजना में छोटे, सीमांत और आदिवासी किसानों को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे उनकी आय में तेजी से वृद्धि हो सके।

किसानों को आत्मनिर्भर बना रही योजना

कोरबा जिले में राष्ट्रीय बागवानी मिशन के प्रभाव से खेती की तस्वीर तेजी से बदल रही है। किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर नकदी फसलों को अपनाकर अधिक लाभ कमा रहे हैं। तरबूज की बंपर खेती इस बात का उदाहरण है कि सही योजना, तकनीक और सरकारी सहायता मिलने पर किसान कम जमीन में भी लाखों रुपये की आय अर्जित कर सकते हैं और आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

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सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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