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महानदी और शिवनाथ नदी के किनारे स्थित जांजगीर-चाम्पा जिले की बालुई मिट्टी और अनुकूल जलवायु लगभग सभी फसलों के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इसके बावजूद यहां के किसान लंबे समय से मुख्य रूप से धान की पारंपरिक खेती पर निर्भर रहे हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में किसानों ने तरबूज, सूरजमुखी, दलहन, तिलहन और सब्जी उत्पादन की ओर रुचि दिखानी शुरू की है, जिससे अब खेती में विविधता देखने को मिल रही है।
12 एकड़ में तरबूज की खेती
इस वर्ष वृत्ति आजीविका संसाधन के तहत पामगढ़ ब्लॉक के ग्राम खोरसी, धाराशिव, तनौद और कमरीद में चयनित किसानों के साथ करीब 12 एकड़ में तरबूज की खेती का प्रदर्शन किया गया है। उन्नत किस्म के बीज और तकनीकी मार्गदर्शन के कारण फसल की गुणवत्ता बेहतर है, जिससे स्थानीय बाजारों में इसकी अच्छी मांग देखने को मिल रही है। खास बात यह है कि पहली बार आदिवासी किसानों के खेतों में तरबूज की फसल इस तरह लहलहाती नजर आ रही है।
किसानों को नई फसल अपनाने की चुनौती
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. के.डी. महंत के अनुसार, पामगढ़ ब्लॉक के ग्राम खोरसी के किसान महेश्वर गोंड और राजू गोंड जैसे किसान तरबूज की खेती कर नई दिशा दिखा रहे हैं। उन्होंने बताया कि किसानों को नई फसल के लिए तैयार करना और पूरे उत्पादन चक्र में उनके साथ काम करना सबसे बड़ी चुनौती है। अभी यह शुरुआती प्रयास है, लेकिन स्थानीय बाज़ार में तरबूज की अच्छी मांग से किसानों का उत्साह बढ़ा है।
प्रति एकड़ 60 से 80 हज़ार रुपये लाभ की संभावना
विशेषज्ञों के अनुसार, इस वर्ष तरबूज की खेती से प्रति एकड़ लगभग 14 से 15 टन उत्पादन की उम्मीद है। लागत निकालने के बाद किसानों को करीब 60 हज़ार से 80 हज़ार रुपये प्रति एकड़ तक लाभ मिलने की संभावना है। यह पारंपरिक धान की खेती की तुलना में कहीं अधिक लाभकारी साबित हो सकता है।
प्रशिक्षण और विपणन से मिल रही मज़बूती
कृषि विज्ञान केंद्र और उद्यानिकी विभाग जांजगीर-चाम्पा द्वारा किसानों को उन्नत बीज, तकनीकी प्रशिक्षण और समय-समय पर मार्गदर्शन दिया जा रहा है। साथ ही महानदी किनारे बसे गांवों के किसानों को तरबूज की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
विपणन को बढ़ावा देने के लिए साप्ताहिक बाज़ारों में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं तरबूज की बिक्री कर रही हैं, जिससे किसानों को सीधे बाजार से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।
खेती में बदलाव की ओर बढ़ते कदम
जांजगीर-चाम्पा जिले में तरबूज की खेती का यह प्रयास फसल विविधीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ने की संभावना है, बल्कि उन्हें पारंपरिक खेती के दायरे से बाहर निकलकर नई संभावनाओं को अपनाने का अवसर भी मिल रहा है।
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