Pig Farming: मिक्स्ड ब्रीड सूअर पालन से रायपुर के अंगीरा ठाकुर ने 5 साल में हासिल किया 20 लाख का टर्नओवर

Pig Farming: कुछ समय पहले तक मुर्गी पालन और बकरी पालन की तुलना में सूअर पालन को अच्छा नहीं माना जाता था और पढ़े-लिखे लोग इसमें जाने से कतराते थे, मगर अब ऐसा नहीं है। अब पढ़े-लिखे युवा भी इसे व्यवसाय के तौर पर चुन रहे हैं

Pig Farming: कुछ समय पहले तक मुर्गी पालन और बकरी पालन की तुलना में सूअर पालन को अच्छा नहीं माना जाता था और पढ़े-लिखे लोग इसमें जाने से कतराते थे, मगर अब ऐसा नहीं है। अब पढ़े-लिखे युवा भी इसे व्यवसाय के तौर पर चुन रहे हैं, क्योंकि कम लागत में आमदनी का ये अच्छा ज़रिया है। ऐसे ही एक युवा है छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के अकोलडीह खपरी गांव के अंगीरा ठाकुर। उन्होंने 2021 में सूअर पालन की शुरुआत की थी और 5 सालों में वो अपने इस बिज़नेस में बहुत सफ़ल रहे हैं। वो सूअर के मिक्स ब्रीड का पालन करते हैं और उनका सबसे ज़्यादा फ़ोकस ब्रिडिंग में है। कैसे उन्होंने सिर्फ 5 साल में 20 लाख रुपए से अधिक का टर्नओवर हासिल किया और सूअर पालन में किन बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है? इन तमाम मुद्दों पर अंगीरा ठाकुर ने बात की किसान ऑफ़ इंडिया के संवाददाता सर्वेश बुंदेली से।

खेती नहीं चली तो शुरू की Pig Farming

छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले का अकोलडीह खपरी गांव माइनिंग वाला इलाका है और यहां कि सबसे बड़ी समस्या है पानी की कमी। साथ ही यहां का तापमान भी बहुत अधिक होता है। यही वजह है कि यहां खेती अच्छी नहीं हो पाती है। अंगीरा ठाकुर ने कोविड के दौरान दिल्ली की नौकरी छोड़कर अपने गांव का रूख किया और यहां खेती शुरुआत की, मगर विपरित परिस्थितियों के कारण खेती सफ़ल नहीं हो पाई। फिर उन्होंने कुछ और करने का सोचा और इस तरह से सूअर पालन की शुरुआत की। हरियाणा से प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने पिग फ़ार्मिंग के लिए 2 शेड बनवाएं। उनका एक शेड 3 हज़ार वर्ग फीट में फैला है, जहां 200 से अधिक जानवर हैं।

Pig Farming: मिक्स्ड ब्रीड सूअर पालन से रायपुर के अंगीरा ठाकुर ने 5 साल में हासिल किया 20 लाख का टर्नओवर

सूअरों की कैटेगरी के हिसाब से बाड़ा

अंगीरा ठाकुर बताते हैं कि शेड में अलग-अलग बाड़े बनाए गए हैं जिसमें सूअरों को उनकी कैटगरी के हिसाब से रखा जाता है। एक बाड़े में सिर्फ गर्भवती सूअरों को रखा जाता है, जबकि मादा और नर सूअरों के लिए अलग बाड़ा है। आगे वो बताते हैं कि ग्रोअर पिग, बोर, मादा सबके बाड़े का आकार भी अलग-अलग होता है। नर सूअर को 10X10 फीट का कमरा दिया गया है जिसमें वो अकेला रहता है। 10 X10 के एक कमरे में ग्रोअर पिग की संख्या 10 से 12 होती है। इतने ही बड़े बाड़े में 6-7 मादा सूअरों को आराम से रखा जा सकता है।

ब्रीड का चुनाव

किस नस्ल के सूअर बिज़नेस के लिए अच्छे होते हैं इस बारे में अंगीरा ठाकुर बताते हैं कि भारत में स्थानीय बाज़ार की मांग के हिसाब से नस्ल (ब्रीड) का चुनाव करना चाहिए। वो बताते हैं कि छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में लोग सफे़द सूअर पसंद नहीं करते हैं, वो काले रंग के सूअर पसंद करते हैं। कई जगहों पर लोग बड़े साइज़ का सूअर पसंद नहीं करते हैं। इसलिए स्थानीय बाज़ार के हिसाब से ब्रीड का चुनाव ज़रूरी है, वरना बेचने में दिक्कत आएगी। आगे वो बताते हैं कि उनके पास मिक्स्ड ब्रीड है। काले धब्बेदार सूअर Russian Charmukha है, large white सफे़द रंग के सूअर है और भूरे रंग वाला Duroc ब्रीड से क्रॉस किया हुआ है। उनका कहना है कि वो प्यार ब्रीड इसलिए नहीं रखते क्योंकि इनमें बीमारी का खतरा अधिक होता है, जबकि क्रॉस ब्रीड में जानवरों की बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है।

Pig Farming: मिक्स्ड ब्रीड सूअर पालन से रायपुर के अंगीरा ठाकुर ने 5 साल में हासिल किया 20 लाख का टर्नओवर

उम्र के हिसाब से दे आहार

सूअरों के आहार के बारे में अंगीरा बताते हैं कि ये उनकी उम्र पर निर्भर करता है। आमतौर पर बच्चा अगर छोटा है तो उसे तीन टाइम भोजन देना होता है। दिन में दो बार फीडिंग कराते हैं। वो बताते हैं कि कई बड़ी कंपनियां सूअरों के लिए फीड बनाती है, आप वो भी खरीद सकते हैं, लेकिन अपने फ़ार्म के जानवरों के लिए आहार वो खुद ही तैयार करते हैं।

बीमारी से बचाव

जबां तक बीमारी का सवाल है तो अंगीरा के फ़ार्म में अभी तक किसी तरह की बीमारी नहीं फैली है। इसके लिए वो बायोसिक्योरिटी मेंटेन करते हैं और बाड़े में साफ़-सफ़ाई का विशेष ध्यान रखते हैं। वो लोगों को सलाह देते हैं कि अगर कभी कोई जानवर बीमार पड़ जाए तो वो आप वेटरनिटी डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने सर्दियों में सूअरों को ठंड से बचाने के लिए शेड को ढंकने की व्यवस्था कर रखी है और रात में लाइट जला देते हैं।

मुनाफ़े के लिए कितना होना चाहिए वज़न?

अंगीरा बताते हैं कि बिक्री के लिए एक पिगलेट कम से कम 12-15 किलो को होना चाहिए। Grow-out सूअर 80 किलो से अधिक वज़न का होने पर बेचना सही होता है, क्योंकि इससे कम वज़न में बेचने पर मुनाफ़ा नहीं होता है। जहां तक उनके टर्नओवर का सवाल है तो वो सालाना 15-20 लाख रुपए है।

ब्रिडिंग का सिस्ट्म

सूअरों के गर्भकाल के बारे में अंगीरा बताते हैं कि सूअर का गर्भकाल (Gestation period ) 113 से 120 दिनों का होता है। फ्रोफेशनल ब्रीडिंग कराने पर साल में दो बार मादा सूअर बच्चे देती है, एक बार में वो 8-10 बच्चे देती है, यदि अच्छी ब्रीडिंग की गई है 10-12 बच्चे हो सकते हैं।

मार्केटिंग कितनी मुश्किल है?

अंगीरा मानते हैं कि मार्केटिंग की थोड़ी समस्या ज़रूर है, मगर ये इतनी ज़्यादा मुश्किल नहीं है। अपने बिज़नेस के बारे मे वो बताते हैं कि शुरुआत में स्थानीय बाज़ार में उन्होंने पता किया कि कहां पर सूअरों की बिक्री होती है, फिर उन्हीं लोगों से पूछा कि आपको खऱीदना है क्या? 2-3 बार उन्हें बाज़ार जाना पड़ा, फिर लोगों को पता चल गया कि यहां फ़ार्म है तो वो खुद ही यहां आने लगे। अंगीरा का कहना है कि उनके इलाके में रेट भी अच्छा मिल जाता है, वो 190-200 प्रति किलो के हिसाब से बेचते है। छत्तीसगढ़ में सूअर की खपत अच्छी है। यही नहीं उनका कहना है कि अगर कोई अच्छी तरह से इन्हें तैयार करता है तो नॉर्थ ईस्ट के बाज़ारों में भी इसकी अच्छी मांग है।

सूअर पालन में रखें कुछ बातों का ध्यान

अगर आप भी सूअर पालन की सोच रहे हैं तो अंगीरा ठाकुर की सलाह आपके बहुत काम आ सकती है। वो कहते हैं-

  • सूअर पालन के लिए अच्छी जगह का चुनाव करें जहां रोड कनेक्टिविटी हो।
  • पानी का स्रोस भी अच्छा होना चाहिए, क्योंकि सूअर रखने के स्थान की साफ़-सफ़ाई के लिए पानी की ज़्यादा ज़रूरत होती है।
  • वेस्ट मैनेजमेंट भी अच्छा होना चाहिए यानी सूअरों के मल के निपटान की उचित व्यवस्था।
  • इसके अलावा उनके आहार का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
  • रहने की उचित व्यवस्था और उसकी सफ़ाई भी ज़रूरी है।

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सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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