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गर्मियों में जिसका सबसे ज़्यादा इंतजार होता है वो है आम। मौसम आते ही बाजार आमों से पट जाते हैं। दशहरी, लंगड़ा, हापुस और मालदा हर घर में मौजूद होता है। लेकिन क्या आपने कभी “आमों की रानी” के बारे में सुना है? ये कोई साधारण आम नहीं, बल्कि मुगलकाल की बेगम नूरजहां के नाम पर रखा गया एक शाही फल है। जिस तरह रानी नूरजहां अपनी खूबसूरती और ख़ासियत के लिए जानी जाती थीं, उसी तरह यह आम अपने विशाल आकार, अलौकिक स्वाद और चौंकाने वाली कीमत के लिए जाना जाता है। इसी वजह से इसे ‘Queen of Mangoes’ यानी आमों की रानी कहा जाता है।
कहां मिलेगा ये ख़ास आम?
इस आम का असली राज़ भारत के मध्य प्रदेश राज्य के अलीराजपुर जिले के छोटे से कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में छिपा है। ये इलाका दुनिया में इकलौती जगह है, जहां ये दुर्लभ किस्म उगाई जाती है। आसपास के गुजरात में भी इसकी थोड़ी बहुत खेती होती है, लेकिन असली पहचान और असली स्वाद तो मध्य प्रदेश से ही जुड़ा है। दिलचस्प बात ये है कि ये आम बहुत सीमित मात्रा में ही उगाया जाता है, इसलिए यह हर जगह आसानी से नहीं मिलता। यह लक्ज़री आम है, जो खास ग्राहकों तक ही पहुंचता है।
दुनिया के सबसे बड़े आमों में शामिल: वजन और साइज हैरान कर देंगे
सबसे हैरान करने वाली बात है इसका आकार। एक सामान्य आम जहां 200 से 300 ग्राम का होता है, वहीं एक नूरजहां आम का वजन आमतौर पर 2.5 से 3.5 किलोग्राम तक होता है और कई बार यह 4 किलोग्राम तक भी पहुंच जाता है। इसकी लंबाई लगभग एक फुट यानी 30 सेंटीमीटर तक होती है। आप सोच सकते हैं कि एक ही आम पूरे परिवार के लिए खाने का सौभाग्य लेकर आता है। इतना बड़ा आकार इसे बाकी आमों से बिल्कुल अलग बनाता है।
एक आम की कीमत 1000 रुपये क्यों? चौंकाने वाले कारण
अब बात करते हैं इसकी कीमत की, जो सुनकर आपका माथा ज़रूर चकरा जाएगा। बाजार में एक नूरजहां आम आसानी से 500 से 1000 रुपये तक बिकता है। आखिर इतनी ऊंची कीमत क्यों? इसके पीछे कई ठोस कारण हैं:
:-बहुत सीमित उत्पादन : पूरे देश में कुछ ही हज़ार पेड़ हैं
:-बड़े आकार और बेहतरीन गुणवत्ता : हर आम हाथ से तोड़ा जाता है
:-अनोखा स्वाद और खुशबू : जैसा कोई और आम नहीं दे सकता
:-मांग ज्यादा, सप्लाई कम : पैदावार से पहले ही बुकिंग हो जाती है
:-यही वजह है कि ये आम आम लोगों की बजाय खास ग्राहकों तक ही सीमित रह जाता है।
स्वाद और गुणवत्ता: केसर और शहद का अनोखा मेल
अगर आपने दशहरी या हापुस खाया है, तो उससे बिल्कुल अलग अनुभव है नूरजहां। इसकी सबसे ख़ासियत है इसका स्वाद, जिसमें हल्की केसर और शहद जैसी सुगंध होती है। गूदा बेहद मुलायम, रसदार और बिना रेशों वाला होता है, जो मुंह में जाते ही घुल जाता है। इसकी छिलका बहुत पतली होती है, जिससे इसे खाना और भी आसान हो जाता है। जो लोग एक बार इसका स्वाद चख लेते हैं, वह अपनी जिंदगी में किसी और आम को उतना अच्छा नहीं मानते।
अफगानिस्तान से जुड़ी है इसकी रोचक कहानी
क्या आप जानते हैं कि इस आम की जड़ें अफगानिस्तान से जुड़ी हैं? खाद्य इतिहासकारों के अनुसार, ये किस्म पहले अफगानिस्तान से भारत आई, फिर गुजरात के रास्ते मध्य प्रदेश पहुंची। हालांकि आज न तो अफगानिस्तान में और न ही गुजरात में इसका कोई ठोस रिकॉर्ड बचा है। स्थानीय किसानों का मानना है कि अब ये खास किस्म सिर्फ उनके क्षेत्र में ही बची है, जिससे इसकी खासियत और भी बढ़ जाती है।
भारत में कैसे शुरू हुई इसकी खेती?
भारत में इस आम की खेती की शुरुआत 1965 के आसपास हुई। कट्ठीवाड़ा के एक फार्म में शिवराज सिंह जादव के पिता ने इस किस्म को एक कलम (ग्राफ्ट) के जरिए लगाया था। ये आम धीरे-धीरे फेमस हुआ और 1978 से 1981 के बीच राष्ट्रीय टेलीविजन पर इसकी खासियतें दिखाए जाने के बाद पूरे देश ने इसे पहचाना।
सरकारी संरक्षण: बचाई जा रही है ये अनमोल विरासत
मध्य प्रदेश सरकार ने अब इस अनमोल विरासत को बचाने के लिए अलीराजपुर के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र को विशेष संरक्षण प्रदान किया है। यहां इस आम की Genetic diversity बचाई जा रही है और किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है कि बिना क्रॉस-ब्रीडिंग के शुद्ध नूरजहां कैसे उगाया जाए। इस क्षेत्र के लोगों के अनुसार, नूरजहां आम के पेड़ जनवरी-फरवरी में खिलने शुरू होते हैं और फल जून के पहले पखवाड़े तक बिक्री के लिए तैयार हो जाते हैं। वजन ज़्यादा होने के कारण इन पेड़ों पर कम फल लगते हैं, जिससे इसकी दुर्लभता और बढ़ जाती है।
आखिर क्यों है ये ‘आमों की रानी’ ?
- सबसे बड़ा आम: 4 किलो तक वजन
- सबसे दुर्लभ: सिर्फ एक जिले में
- सबसे महंगा: 1000 रुपये तक कीमत
- सबसे अनोखा स्वाद: केसर और शहद जैसा
- सरकारी संरक्षण प्राप्त
- मुगलकालीन विरासत से जुड़ा
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