केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए नया मंच दे रही है। इसी योजना का लाभ उठाकर जिले के किसान पुत्र अभिषेक जायसवाल ने न सिर्फ़ खुद की किस्मत बदली, बल्कि गांव के कई लोगों के लिए रोज़गार के रास्ते भी खोल दिए।
अभिषेक ने योजना के तहत करीब 20 लाख रुपये का ऋण लेकर अपने गांव में केला और प्याज से पाउडर बनाने की यूनिट स्थापित की। अपने अनुभव साझा करते हुए अभिषेक बताते हैं कि “योजना से मिले लोन ने मुझे अपना काम शुरू करने का मौका दिया। आज मैं खुद आत्मनिर्भर हूं और गांव के अन्य लोगों को भी रोज़गार दे पा रहा हूं।”
विविध उत्पादों से तैयार हो रहा ब्रांड
इस यूनिट में आंवला, लौकी, केला, प्याज, मेथी और बैंगन जैसी फसलों को सुखाकर उनका पाउडर तैयार किया जाता है। इनसे रेडी-टू-ईट, रेडी-टू-कुक और हेल्थ केयर उत्पाद बनाए जाते हैं, जिन्हें ‘लाला हार्वेस्ट’ ब्रांड के नाम से मुंबई, पुणे और भोपाल जैसे शहरों में सप्लाई किया जा रहा है।
लाखों की आय, बढ़ता कारोबार
अभिषेक की इस पहल से उन्हें सालाना करीब 10 से 12 लाख रुपये की आय हो रही है। उनका कहना है कि शुरुआत में चुनौतियां जरूर थीं, लेकिन लगातार मेहनत और सही योजना के कारण अब उनका व्यवसाय तेजी से आगे बढ़ रहा है।

ग्रामीणों को मिला रोज़गार
इस यूनिट से गांव के लोगों को भी रोज़गार मिला है। वर्तमान में 6 लोग यहां काम कर रहे हैं, जिनमें 4 महिलाएं और 2 पुरुष शामिल हैं, जबकि मार्केटिंग और सप्लाई के जरिए दर्जनों लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार भी मिला है। गांव के ही निवासी अजय महाजन इस पहल की सराहना करते हुए कहते हैं कि “अभिषेक का यह प्रयास गांव के लिए बहुत फ़ायदेमंद है। इससे लोगों को रोज़गार मिल रहा है और किसानों की आमदनी भी बढ़ रही है।”
किसानों से सीधी खरीद, बढ़ी आमदनी
अभिषेक स्थानीय किसानों से सीधे केला और प्याज खरीदते हैं, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिल रही है। इसके बाद इन उत्पादों को प्रोसेस कर बाज़ार में आकर्षक पैकेजिंग के साथ उपलब्ध कराया जाता है।

प्रेरणा बन रहा है यह मॉडल
अब धीरे-धीरे अभिषेक की मेहनत रंग ला रही है और उनका यह मॉडल न केवल आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि यह भी साबित करता है कि सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं के सहारे ग्रामीण स्तर पर भी बड़े बदलाव संभव हैं।
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