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झारखंड के रामगढ़ जिले में खेती अब सिर्फ़ आजीविका का साधन नहीं, बल्कि समृद्धि की नई पहचान बनती जा रही है। नाबार्ड की ‘जीवा परियोजना’ के तहत जनजातीय क्षेत्रों में ‘इंटरक्रॉपिंग’ और ‘पॉलीक्रॉपिंग’ जैसी आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर किसानों ने अपनी तकदीर बदल दी है। एक ही खेत में कई फसलों का उत्पादन, प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ते कदम और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी—ये सब मिलकर ग्रामीण विकास की एक नई कहानी गढ़ रहे हैं।
नाबार्ड की पहल बनी बदलाव की कहानी
रामगढ़ जिले के पतरातू प्रखंड में नाबार्ड (NABARD) की ‘जीवा परियोजना’ ने ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में विकास की नई इबारत लिखी है। ग्रामीण सेवा संघ के सहयोग से यहां खेती के पारंपरिक तरीकों को आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़ा गया है, जिससे किसानों को बेहतर उत्पादन और आय दोनों मिल रही है।

पॉलीक्रॉपिंग मॉडल से बढ़ी पैदावार
पतरातू के कोड़ी गांव में पॉलीक्रॉपिंग तकनीक के जरिए एक ही खेत में कई तरह की फल और सब्जियां उगाई जा रही हैं।
क्षेत्र समन्वयक राजेश कुमार के अनुसार, इस विधि से न केवल उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है, बल्कि किसानों को सालभर आय का स्रोत भी मिला है।
प्राकृतिक खेती से मिट्टी और स्वास्थ्य दोनों सुरक्षित
स्थानीय किसान रामकुमार उरांव बताते हैं कि प्राकृतिक खेती अपनाने से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और रासायनिक खादों से होने वाले नुकसान से भी बचाव होता है। इससे खेती लागत कम हुई है और मुनाफ़ा बढ़ा है।

महिलाओं की भागीदारी बनी ताकत
साकी पंचायत की मुखिया कुमिला देवी के अनुसार, ग्रामीण सेवा संघ द्वारा वर्ष 2005 से शुरू की गई पहल ने महिलाओं को भी कृषि कार्य से जोड़ा है। आज महिलाएं खेती में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं, जिससे उनके आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिला है।
प्रशिक्षण और पशुपालन से मिला अतिरिक्त लाभ
नाबार्ड रांची के सहायक प्रबंधक नागराज थोगाटा ने बताया कि वर्ष 2005-06 से जनजातीय विकास कार्यक्रम के तहत किसानों को इंटरक्रॉपिंग सहित कई आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही पशुपालन को भी बढ़ावा दिया गया है, जिससे किसानों की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित हुए हैं।

खेती का नया मॉडल बना मिसाल
नाबार्ड की जीवा परियोजना ने यह साबित कर दिया है कि जब पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का समन्वय होता है, तो खेती न केवल लाभकारी बनती है बल्कि टिकाऊ भी होती है। रामगढ़ के किसानों की यह सफ़लता कहानी अब दूसरे क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
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