BRICS Agriculture Meeting: ‘Indore Declaration’ के साथ किसानों को मिलेगी प्राकृतिक खेती, डिजिटल तकनीक और बीज अधिकारों की ताकत!

BRICS Agriculture Meeting में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जब दुनिया जलवायु परिवर्तन से जूझ रही है, तब Regenerative agriculture ही एकमात्र रास्ता है। धरती सिर्फ हमारी नहीं, आने वाली पीढ़ियों की भी है।

भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगरी इंदौर ने आज विश्व कृषि के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया। (BRICS Agriculture Meeting) (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) देशों की कृषि मंत्रिस्तरीय और अधिकारी स्तरीय बैठकों का समापन एक एकमत ‘Indore Declaration’ के साथ हुआ। ये घोषणा खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण, जलवायु-सहनीय खेती, कृषि व्यापार और डिजिटल एग्रीकल्चर को नई दिशा देने वाली साबित होगी। 

 केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ब्रिक्स देशों की कृषि बैठक (BRICS Agriculture Meeting) में बड़ा ऐलान किया कि देशभर में कस्टम हायरिंग सेंटर और ग्रुप बेस्ड मॉडल के ज़रिए किसानों को आधुनिक मशीनरी किराए पर उपलब्ध कराई जाएगी। अब छोटे से छोटा किसान भी Drones, Smart Tools, And Advanced Equipment का फायदा उठा सकेगा।

क्या है पूरा मामला?

हर किसान के लिए महंगा ट्रैक्टर, ड्रोन या हार्वेस्टर खरीदना संभव नहीं होता। ये सोचते हुए सरकार ने किराए पर मशीनरी देने की व्यवस्था की है। अब गांव-गांव में ये सेंटर खुलेंगे, जहां से किसान थोड़े से पैसे में मशीनें ले सकते हैं। इससे उत्पादन बढ़ेगा, लागत घटेगी और किसानों की आमदनी दोगुनी होगी।

युवा, महिलाएं और इनोवेशन: भविष्य की तस्वीर

मंत्री ने कहा कि जब तक युवा और महिलाएं कृषि में एक्टिवली नहीं लेंगे, कोई Long-term Change संभव नहीं है। इसलिए इस बैठक में इसे ख़ास तौर से शामिल किया गया। उन्होंने बताया कि-

  • भारत में Agri-startup, Agri-business और Agri-entrepreneurship तेजी से बढ़ रहे हैं।
  • हजारों स्टार्टअप एक्टिव हैं और युवा नई तकनीकों के साथ खेती कर रहे हैं।
  • महिलाएं अब ड्रोन उड़ाने से लेकर ऑर्गेनिक खेती तक में आगे आ रही हैं।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ब्रिक्स देशों को एक-दूसरे के अनुभव और नीतियां शेयर करनी चाहिए, ताकि भविष्य की Agriculture: Smarter, Sustainable, and Profitable बन सके।

इंदौर बना Global Agricultural Diplomacy का  सेंटर 

इस बैठक की मे़जबानी इंदौर ने की, जिसकी जमकर तारीफ हुई। शिवराज सिंह ने कहा कि मालवा की परंपरा के मुताबिक मेहमाननवाज़ी ने सबका दिल जीत लिया। 56 दुकान, राजवाड़ा और मांडू की सैर प्रतिनिधि कभी नहीं भूलेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को आगे बढ़ाते हुए मेघदूत गार्डन में ‘ब्रिक्स वाटिका’ स्थापित की गई। इससे पहले यहां Global Park and Euro-Russian Park भी बन चुके हैं।

टीम इंडिया की शानदार सफलता

चौहान ने कहा कि ये आयोजन ‘Whole of Government Approach’ और ‘Team India’ की सफलता का जीता-जागता उदाहरण है। केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश सरकार, नीति आयोग और दूसरे विभागों ने मिलकर इस बैठक को ऐतिहासिक बना दिया।

ब्रिक्स की चार ऐतिहासिक पहलें: जो बदल देंगी दुनिया की कृषि 

1. एग्रो-इकोलॉजी और रीजेनेरेटिव एग्रीकल्चर का नेटवर्क

पहली और सबसे बड़ी पहल है BRICS Network of Centres of Excellence on Agro-Ecology and Regenerative Agriculture यानी प्राकृतिक और पुनर्योजी कृषि पर उत्कृष्टता केंद्रों का नेटवर्क।

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि यह नेटवर्क प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और ऐसी कृषि पद्धतियों पर काम करेगा जो मिट्टी को फिर से जीवित कर देती हैं। इसमें सभी ब्रिक्स देश मिलकर रिसर्च करेंगे, अनुभव साझा करेंगे और किसानों को प्रशिक्षित करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत पहले से ही प्राकृतिक खेती पर जोर दे रहा था। अब पूरी दुनिया के ब्रिक्स देशों ने इसकी अहमियत स्वीकार कर ली है। भारत की ओर से मोदीपुरम स्थित भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान इस नेटवर्क में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में काम करेगा।

2. डिजिटल कृषि पर नेटवर्क 

दूसरी बड़ी पहल है BRICS Network on Digital Agriculture। यह नेटवर्क कृषि में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), भू-स्थानिक तकनीक, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा आधारित समाधानों पर काम करेगा।

श्री चौहान ने कहा कि यह नेटवर्क आधुनिक तकनीक और किसानों के बीच एक मजबूत पुल का काम करेगा। नई तकनीकें जल्द से जल्द किसानों के खेतों तक पहुंचेंगी। इस नेटवर्क का समन्वय IIT दिल्ली द्वारा किया जाएगा।

3. देशी बीजों का होगा संरक्षण

तीसरी ऐतिहासिक घोषणा है Global Forum on Farmers’ Rights in Seed Systems यानी बीज प्रणालियों में किसानों के अधिकारों पर वैश्विक मंच।

शिवराज सिंह ने कहा कि भारत जैसे देशों में हजारों साल पुराने देसी बीज आज लुप्त हो रहे हैं। हाइब्रिड बीज जरूरी हैं, लेकिन देसी बीजों का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। यह मंच किसानों के पारंपरिक बीजों, उनके अधिकारों और पारंपरिक ज्ञान की रक्षा करेगा। इससे जलवायु परिवर्तन के दौर में खाद्य सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।

4. AgriN: बीज, जेनेटिक संसाधन और इनफार्मेशन नेटवर्क

चौथी पहल है BRICS AgriN – Agro Input, Genetic Resources and Information Network। यह नेटवर्क सदस्य देशों के बीच कृषि आदानों, बीजों, अनुवांशिक संसाधनों और जानकारियों के आदान-प्रदान को आसान बनाएगा।

श्री चौहान ने बताया कि अलग-अलग देशों में बेहतरीन किस्में मौजूद हैं, लेकिन उन तक पहुंच सीमित है। यह नेटवर्क सुनिश्चित करेगा कि हर देश के किसान को सबसे अच्छे बीज और संसाधन मिल सकें।

पुरानी पहलों को मिलेगी मज़बूती

कृषि मंत्री चौहान ने बताया कि पहले से स्थापित BRICS Agricultural Research Platform को अब ‘Knowledge to Action Hub’ के रूप में विकसित किया जाएगा। यानी अब रिसर्च लैब में नहीं रुकेगी, बल्कि सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचेगी। यह असली ‘Lab to Land’ मॉडल है।

ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज और व्यापार पर भी फोकस

कृषि व्यापार को आसान बनाने के लिए BRICS Grain Exchange जैसी पहल पर भी विचार-विमर्श हुआ। सभी देशों ने निष्पक्ष, समतामूलक और पारदर्शी व्यापार व्यवस्था के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

जलवायु परिवर्तन, कार्बन क्रेडिट और फूड लॉस पर चर्चा

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जब दुनिया जलवायु परिवर्तन से जूझ रही है, तब Regenerative agriculture ही एकमात्र रास्ता है। धरती सिर्फ हमारी नहीं, आने वाली पीढ़ियों की भी है।

एल-नीनो के प्रभावों पर उन्होंने कहा कि भारत सहित सभी देश पूरी तैयारी कर रहे हैं और ब्रिक्स देश आपस में सूचनाएं साझा करके इस चुनौती का सामना करेंगे।

कार्बन क्रेडिट पर उन्होंने बताया कि एक स्थापित प्रणाली है। जो किसान प्रक्रियाओं का पालन करेंगे, उन्हें कार्बन क्रेडिट का लाभ मिलेगा। जलवायु अनुकूल खेती और रीजेनेरेटिव एग्रीकल्चर ही इस दिशा में असली रास्ते हैं।

फूड लॉस यानी खाद्यान्न की बर्बादी पर भी चर्चा हुई। कटाई से लेकर बाजार तक जो अनाज बर्बाद होता है, उसे कैसे रोका जाए – इस पर तकनीकी विचार-विमर्श हुआ।

 छोटे किसानों के लिए बड़ी राहत

चौहान ने साफ कहा कि हर किसान महंगी मशीनरी नहीं खरीद सकता। इसलिए देशभर में कस्टम हायरिंग सेंटर और समूह आधारित मॉडल के जरिए मशीनरी किराए पर उपलब्ध कराई जा रही है। अब छोटे किसान भी ड्रोन, आधुनिक औजार और अन्य उपकरणों का लाभ ले सकेंगे।

 खाद की कीमतों पर स्पष्ट नीति

उर्वरकों की बढ़ती कीमतों पर शिवराज सिंह ने कहा कि भारत सरकार ने निर्णय लिया है कि किसानों को हमेशा सस्ती दर पर ही खाद मिलेगी। यूरिया 266 रुपये और DAP 1350 रुपये प्रति बोरी की दर से ही मिलता रहेगा। बढ़ी हुई लागत पूरी तरह से केंद्र सरकार वहन करेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि रसायनों के अत्यधिक उपयोग से बचना चाहिए। भारत ‘खेत बचाओ’ जैसे अभियानों के जरिए प्राकृतिक खेती और जैविक खेती को बढ़ावा दे रहा है।

किसानों के लिए क्यों ज़रूरी है ये पहल?

  • छोटे किसानों के पास पैसे की कमी होती है।
  • महंगी मशीनें खरीद पाना मुमकिन नहीं।
  • किराए पर मशीन मिलेगी तो उत्पादन बढ़ेगा।
  • ड्रोन से खेतों की निगरानी और स्प्रे होगा।
  • समूह में काम करने से मजदूरी भी बचेगी।

अब सरकार की कोशिश है कि हर गांव में कस्टम हायरिंग सेंटर खोले जाएं। युवाओं को ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे ड्रोन और आधुनिक औजार चला सकें। महिलाएं भी अब खेती में नई तकनीक का इस्तेमाल करेंगी।  ब्रिक्स बैठक में लिए गए ये फैसले आने वाले सालों में भारतीय कृषि को नई दिशा देंगे। 

इसे भी पढ़िए: Amazon ने भारतीय किसानों से 3 करोड़ डॉलर में ख़रीदा कार्बन क्रेडिट: क्या अब धान के खेत बनेंगे किसानों की आय का नया ज़रिया?

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top