BRICS Agriculture Summit 2026: ब्रिक्स कृषि मंत्रियों का इंदौर में ऐतिहासिक जमावड़ा: जलवायु संकट के बीच दुनिया की नज़रें भारत पर

एक तरफ जहां रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान-इजराइल तनाव ने Food Supply को झटका दिया है,वहीं ब्रिक्स विस्तार के बाद यह पहली बड़ी कृषि बैठक (BRICS Agriculture Summit?) है। इंडोनेशिया और सऊदी अरब जैसे नए सदस्यों के शामिल होने से इस ग्रुप की ताकत और बढ़ गई है।

दुनिया का पेट भरने वाले ब्रिक्स देश एक बार फिर एकजुट हो रहे हैं, और इस बार BRICS Agriculture Summit 2026 की मेजबानी की कमान भारत के हाथों में है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Union Agriculture Minister Shivraj Singh Chauhan) के नेतृत्व में इंदौर शहर (Indore city) आने वाले पांच दिनों (9 से 13 जून 2026) तक वैश्विक कृषि (Global Agriculture) की नई दिशा तय करेगा।

क्यों ख़ास है ये BRICS Agriculture Summit?

आंकड़े बताते हैं कि दुनिया की 42 फीसदी कृषि भूमि पर ब्रिक्स देश (BRICS Countries) खेती करते हैं। यहां 68 फीसदी किसान हैं और ये देश दुनिया का 42 फीसदी से अधिक खाद्यान्न पैदा करते हैं। यानी जब यहां संकट आएगा, तो पूरी दुनिया के थाली में सिकुड़न आ जाएगी।

अब जब दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन (Rising temperatures, Irregular Rainfall, Desertification) खेती के लिए सबसे बड़ा ख़तरा बन चुका है, तब यह बैठक और भी बड़ी हो जाती है। ब्रिक्स देशों में शामिल देश ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, ईरान, मिस्र, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, इथियोपिया, बेलारूस, कजाकिस्तान और उजबेकिस्तान (Brazil, Russia, China, South Africa, Iran, Egypt, Indonesia, Saudi Arabia, Ethiopia, Belarus, Kazakhstan and Uzbekistan) के कृषि मंत्री और वैज्ञानिक इंदौर पहुंचेंगे।

समिट में मुख्य बिंदु क्या होंगे?

1.Climate-Friendly Seed Development: गरमी और सूखा सहन करने वाले बीजों पर फोकस। बदलते मौसम में फसलें ख़राब न हों, इसके लिए रिसर्च शेयर की जाएगी।

2.Use of modern technology to farmers: अब सिर्ध हल-बैल नहीं, बल्कि AI (Artificial Intelligence Artificial Intelligence), मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स से खेती को जोड़ने पर विचार होगा। ड्रोन से कीटनाशक छिड़काव, मिट्टी की सेहत का रियल-टाइम डेटा, और स्मार्ट सिंचाई तकनीकों पर चर्चा होगी।

3.Food Security Resolution: दुनिया में बढ़ रहे भूख और पोषण अभाव के बीच, ब्रिक्स देश मिलकर खाद्यान्न भंडारण, सप्लाई चेन और महंगाई नियंत्रण की रणनीति बनाएंगे।

4.Ease of agricultural trade: देशों के बीच कृषि उत्पादों के आयात-निर्यात में जो ब्लॉकर हैं (जैसे भारी कस्टम ड्यूटी, सर्टिफिकेशन की जटिलताएं), उन्हें कम करने पर बातचीत होगी।

5.Welfare of farmers: छोटे किसानों को जानकारी और संसाधन कैसे मिलें,  इसके साथ ही मृदा स्वास्थ्य कार्ड, क्रेडिट कार्ड और बीमा सुविधाओं के मॉडल शेयर किए जाएंगे।

क्यों हो रहा इंदौर में?

मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली मप्र सरकार ने इस ऐतिहासिक मेजबानी का जिम्मा संभाला है। ये कोई संयोग नहीं कि इंदौर को चुना गया। ये शहर अपनी साफ-सफाई, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और कृषि हब के तौर पर जाना जाता है। यहां से देश भर की सब्जी और अनाज की सप्लाई होती है।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मीडिया को बताया कि ‘जिस तरह तापमान बढ़ रहा है, उससे सभी देश परेशान है। ब्रिक्स सिर्फ बातचीत नहीं करेगा, बल्कि तकनीक, बीज और नीतियां भी शेयर करेगा।’

चुनौतियां और उम्मीदें

एक तरफ जहां रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान-इजराइल तनाव ने Food Supply को झटका दिया है,वहीं ब्रिक्स विस्तार के बाद यह पहली बड़ी कृषि बैठक है। इंडोनेशिया और सऊदी अरब जैसे नए सदस्यों के शामिल होने से इस ग्रुप की ताकत और बढ़ गई है।

अगर ये देश मिलकर सूखा-रोधी गेहूं, बाढ़-सही धान और कम पानी वाली मक्का जैसी किस्में विकसित कर लें, तो यह मानवता के लिए संजीवनी बन सकता है।

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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