उत्तर प्रदेश के पशुपालकों और किसानों के लिए एक ऐतिहासिक दिन साबित हुआ, जब बरेली (Bareilly) स्थित बी.एल. कामधेनु परिसर (BL Kamdhenu Campus) में देश के पहले एकीकृत ‘स्वदेशी गौवंश आनुवंशिकी एवं जीनोमिक्स सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (Integrated Indigenous Cattle Genetics and Genomics Centre of Excellence, Bareilly) का उद्घाटन हुआ। अगर इसे आसान भाषा में समझें तो ये ‘गायों के लिए आईआईटी’ (IIT for cows) की तरह है, जहां अब देसी नस्लों (Cow Genomics Lab) की पढ़ाई नहीं, बल्कि उनके जीन्स (Genetics) को सुधारने का काम होगा।
करीब 25 एकड़ में फैले इस अत्याधुनिक केंद्र का उद्घाटन प्रदेश के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरुण कुमार सक्सेना ने किया। कार्यक्रम में सिर्फ स्थानीय वैज्ञानिक और अधिकारी ही नहीं, बल्कि ब्राजील से आया एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल (A high-level delegation from Brazil) भी शामिल हुआ, जो इस बात का सबूत है कि ये परियोजना अब अंतरराष्ट्रीय सहयोग का केंद्र (Center for International Cooperation) बन चुकी है।
क्यों ख़ास है ये सेंटर?
अब तक हमारे देश में पशुपालन पारंपरिक तरीकों से होता था। गाय का दूध कम है तो हम विदेशी नस्लों की ओर देखते थे। लेकिन इस केंद्र ने सोच को 360 डिग्री बदल दिया है। यहां तीन बड़े वैज्ञानिक पिलर्स को एक छत के नीचे लाया गया है, जो overall livestock development का आधार हैं-
1.पैथोलॉजी लैब (रोग निदान): ये वह जगह है जहां पशुओं की बीमारियों का समय रहते सटीक पता लगाया जा सकेगा। इससे जैव-सुरक्षा मजबूत होगी और बीमारियों के कारण होने वाले भारी नुकसान से बचा जा सकेगा। स्वस्थ पशु ही अधिक उत्पादन दे सकता है।
2.जीनोमिक्स लैब (नस्ल सुधार): ये प्रयोगशाला सबसे महत्वपूर्ण है। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि किस देसी गाय के जीन्स (आनुवंशिक गुण) सबसे बेहतर हैं। कौन सी गाय सबसे ज़्यादा दूध देने वाली है या किसमें रोगों से लड़ने की क्षमता सबसे ज्यादा है। डेटा के आधार पर अब सिर्फ उन्हीं बेस्ट पशुओं का सिलेक्शन किया जाएगा, जिससे आने वाली पीढ़ी और मजबूत होगी।
3.IVF-ET लैब (Test Tube Technique): IVF यानी In vitro fertilization। अब इंसानों की तरह गायों के भी ‘टेस्ट ट्यूब बेबी’ तैयार किए जाएंगे। इस तकनीक से एक उत्तम नस्ल की गाय से साल में सिर्फ एक बछड़े की जगह कई बछड़े पैदा किए जा सकते हैं। इससे अच्छी नस्लों का तेजी से विस्तार होगा।
ब्राजील से साझेदारी
इस केंद्र को ब्राजील के वैज्ञानिकों ने सराहा, जो खुद जेबू (भारतीय मूल की) नसलों को दुनिया में सबसे ज्यादा बेहतर बनाने के लिए मशहूर हैं। इस सहयोग से भारत अब वैश्विक डेयरी नक्शे पर और मजबूती से उभरेगा।
मंत्री अरुण कुमार सक्सेना (Minister Arun Kumar Saxena) ने साफ किया कि ये केंद्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समग्र विकास (360 डिग्री) के विजन को साकार करता है। उन्होंने कहा, ‘उत्तर प्रदेश पहले से ही देश का सबसे बड़ा दूध उत्पादक राज्य है। ये केंद्र सिर्फ दूध का उत्पादन नहीं बढ़ाएगा, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण में भी मदद करेगा।’
पर्यावरण से जुड़ा विज्ञान
एक गहरा पहलू यह भी है कि बेहतर नस्ल की गायें कम खाकर अधिक दूध देंगी और उनसे निकलने वाली मीथेन गैस (जो ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनती है) भी कंट्रोल होगी। यानी ये केंद्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसान की आय, पशु स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन – चारों मोर्चों पर एक साथ काम करेगा।

