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भारत के किसान आज एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं, जहां पारंपरिक फसलें मुनाफे से ज्यादा चिंता दे रही हैं। हर किसान के मन में एक ही सवाल है कि “ऐसी कौन सी फसल है, जो कम लागत में दोगुना मुनाफा दे?” इस सवाल का जवाब अब आ गया है वो है ड्रैगन फ्रूट यानी कमलम। ड्रैगन फ्रूट (Dragon Fruits) सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि एक सुपरफूड है। ये दिखने में जितना अट्रैकटिव है, सेहत के लिए उतना ही चमत्कारी। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन-सी और फाइबर (Antioxidants, Vitamin C and Fiber) होता है। यही कारण है कि इसकी मांग सालभर बनी रहती है। गर्मी हो या सर्दी, लोग इसे ख़रीदते हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाने से लेकर पाचन सुधारने तक, यह फल वरदान से कम नहीं।
एक बार लगाओ, 25 साल तक कमाओ
सबसे बड़ी ख़ासियत ये है कि ये एक cactus plant है। मतलब, कम पानी, कम खाद, कम देखभाल। एक बार खेती लगा दो, तो अगले 20 से 25 सालों तक हर साल फल मिलते रहेंगे। सोचिए, ऐसा और कौन सा बिज़नेस है जहां एक बार निवेश करने पर दो दशक से अधिक आमदनी होती है।
जानवरों और बीमारियों से मुक्ति
आवारा पशु किसानों की सबसे बड़ी समस्या हैं। लेकिन ड्रैगन फ्रूट के पौधे में कांटे होते हैं, इसलिए जानवर इसे छूते तक नहीं। इससे फेंसिंग (बाड़बंदी) का पूरा खर्च बच जाता है। साथ ही, इस फसल में रोग और कीट लगने का जोखिम भी न के बराबर है। जिसका सीधा मतलब – कीटनाशकों पर खर्च लगभग ज़ीरो।
सरकार दे रही 40 फीसदी तक सब्सिडी
अकेले बाजार पर निर्भर न रहें, सरकार भी किसानों के साथ खड़ी है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन (National Horticulture Mission) के तहत, राज्यों के अनुसार 40 फीसदी से 60 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है। यानी, अगर खेती पर 5 लाख रुपये का खर्च है, तो सरकार 2 से 3 लाख रुपये तक मुफ्त सहायता दे रही है। अलग-अलग राज्यों में यह मदद 1.5 लाख से 3 लाख रुपये तक हो सकती है।
कमाई का गणित
बाजार में ड्रैगन फ्रूट का भाव 50 से 150 रुपये प्रति किलो तक होता है। एक एकड़ में अच्छी खेती करने पर सालाना 5 से 8 लाख रुपये तक की कमाई आसानी से हो सकती है। और सबसे अच्छी बात है कि पौधा जितना पुराना, उतना ज्यादा फल। पहले साल कमाई कम होगी, लेकिन तीसरे-चौथे साल से मुनाफा चरम पर पहुंच जाता है।
अप्लाई कैसे करें?
अगर आप भी इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाना चाहते हैं, तो तुरंत अपने नजदीकी उद्यान विभाग (Horticulture Department) या राज्य के कृषि पोर्टल पर कॉन्टेक्ट करें। वहां आपको सब्सिडी और तकनीकी जानकारी के लिए आवेदन फॉर्म मिल जाएगा।

