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अगर आप फ्रांस (France) को ताजे फल और सब्जियां एक्सपोर्ट करते हैं, तो ये ख़बर आपके लिए बेहद अहम है। भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry) के तहत काम करने वाली Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority (APEDA) ने फ्रांस को होने वाले एक्सपोर्ट को लेकर अहम एडवाइजरी जारी की है। फ्रांस ने कुछ ख़ास कीटनाशकों के अवशेषों वाले खाद्य पदार्थों (Food products containing residues of specific pesticides) के आयात पर Complete Ban लगा दिया है। और हैरान करने वाली बात यह है कि ये प्रतिबंध तय सीमा (MRL) से कम मात्रा पर भी लागू होगा ।
किन केमिकल्स पर लगी रोक?
फ्रांस ने पांच प्रमुख एग्रोकेमिकल्स को बैनलिस्ट में डाला है:
- कार्बेन्डाजिम और बेनोमाइल-खट्टे फल, सेब-नाशपाती जैसे पोम फल, गुठलीदार फल, अंगूर, आम, पपीता, टमाटर, बैंगन, भिंडी, ब्रसेल्स स्प्राउट्स, बीन्स और मटर में इनके अवशेष पूरी तरह प्रतिबंधित हैं।
- ग्लूफोसिनेट-आलू में इसके अवशेष बैन।
- थियोफेनेट-मिथाइल-खट्टे फल और पोम फलों में प्रतिबंधित।
- मैन्कोजेब-एवोकाडो, टेबल अंगूर, आम, पपीता, ब्लैककरंट, स्ट्रॉबेरी, आलू, मिर्च, खरबूजे और लेट्यूस में बैन।
क्यों उठाया फ्रांस ने ये कदम?
दरअसल, ये सभी पांचों केमिकल यूरोपीय संघ (EU) में पहले से ही बैन है। फ्रांस का कहना है कि अब वो उन देशों से आने वाले खाद्य पदार्थों में भी इनके अवशेष (residue) बर्दाश्त नहीं करेगा, भले ही वे मौजूदा अंतरराष्ट्रीय सीमा से कम ही क्यों न हों । फ्रांसीसी अधिकारियों का तर्क है कि EU में बैन केमिकल से उगाए गए उत्पादों को आयात की इजाजत देना उचित नहीं है। ये कदम उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा और EU के किसानों के साथ fair competition करने के लिए उठाया गया है ।
किन उत्पादों पर असर?
फ्रांस का यह प्रतिबंध सिर्फ फलों-सब्जियों तक सीमित नहीं है। अंगूर, संतरा, नींबू, सेब, नाशपाती, आम, पपीता, टमाटर, बैंगन, भिंडी, बीन्स, मटर के अलावा सोयाबीन, जौ, जई, राई, गेहूं और यहां तक कि मशरूम भी इसकी चपेट में हैं। यानी भारत से जाने वाले कृषि उत्पादों की एक बड़ी कैटेगरी अब अतिरिक्त जांच के दायरे में आ गई है।
एक्सपोर्टर्स के लिए APEDA की चेतावनी
APEDA ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि निर्यातक या तो जोखिम कम करने के उपाय अपनाएं या फिर इन रसायनों के अवशेष वाले कंसाइनमेंट फ्रांस भेजने से बचें। अगर ऐसा नहीं किया गया तो कंसाइनमेंट के रिजेक्ट होने, निर्यातक की साख को नुकसान और व्यापार प्रवाह में बाधा आने की आशंका है ।
बड़ी तस्वीर: EU में सख्ती बढ़ी
यह एडवाइजरी सिर्फ फ्रांस तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे यूरोपीय संघ में एग्रोकेमिकल अवशेषों को लेकर बढ़ती सख्ती का संकेत है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय निर्यातकों को अब उच्च-मूल्य वाले बाजारों में पहुंच बनाए रखने के लिए मजबूत अनुपालन ढांचा, अवशेषों की नियमित निगरानी और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाना होगा ।
प्रतिबंध 8 फरवरी 2026 से प्रभावी
यह प्रतिबंध 8 फरवरी 2026 से प्रभावी हो चुका है । फ्रांस ने WTO के SPS ePing पोर्टल पर इसकी सूचना भी दे दी है। अब जरूरत इस बात की है कि भारतीय निर्यातक अपने उत्पादन में इन रसायनों के उपयोग को पूरी तरह समाप्त करें और वैकल्पिक, सुरक्षित कृषि इनपुट अपनाएं। फ्रांस ने साफ कर दिया है कि अब ‘थोड़ा सा केमिकल’ भी माफ नहीं होगा। यह समय है कि भारतीय किसान और निर्यातक जैविक और स्थायी खेती की ओर तेजी से बढ़ें, क्योंकि आने वाला समय ‘जीरो रेजिड्यू’ का है।

