भारत के कृषि क्षेत्र के लिए ये सिर्फ एक ख़बर नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक मोड़ है। देश का सबसे प्रतिष्ठित कृषि संस्थान, Indian Agricultural Research Institute (IARI), जिसे ‘पूसा’ कहते हैं, ने पहली बार दुनिया की सबसे मानी जाने वाली QS World University Rankings 2026 में जगह बनाई है। ये अचीवमेंट सिर्फ एक संस्थान की सफलता नहीं है, ये बताता है कि भारत का कृषि विज्ञान अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी धाक जमाने लगा है।
दुनिया के साथ कंधे से कंधा
IARI ने ‘Agriculture and Forestry’ सबजेक्ट में 151-200 की रैंक हासिल की है। ये रैंकिंग इसलिए भी ख़ास है क्योंकि इस कैटेगरी में भारत के केवल चार संस्थानों को ही जगह मिली है। IARI अब उन चुनिंदा संस्थानों में शामिल हो गया है, जहां बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), आईआईटी खड़गपुर और दिल्ली विश्वविद्यालय (Banaras Hindu University (BHU), IIT Kharagpur, and Delhi University) जैसे दिग्गज मौजूद हैं।
QS Rankings क्यों है बेहद ख़ास?
QS Rankings दुनिया की सबसे भरोसेमंद कसौटी है। ये सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि Research Quality, International Collaboration, and Employability को परखती है। IARI का यहां पहुंचना साबित करता है कि यहां की रीसर्च अब सिर्फ प्रयोगशालाओं (Laboratories) तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्लोबल लेवल पर असर दिखा रहा है।
जब लैब से सीधा खेत तक जाए शोध
IARI की सबसे बड़ी ख़ासियत है इसकी ज़मीनी सोच। ये वही संस्थान है जिसने हरित क्रांति की नींव रखी थी। आज भी यहां Eco-friendly seeds, climate-resilient crops और कम लागत वाली तकनीकें विकसित की जाती हैं। जब दुनिया जलवायु परिवर्तन (Climate change) से जूझ रही है, IARI ने ऐसी फसलें विकसित की हैं जो कम पानी में अधिक उपज देती हैं, और यही असली ताकत है।
युवाओं को मिल रहा ग्लोबल स्टेज
IARI सिर्फ शोध संस्थान नहीं, ये देश के भविष्य के कृषि वैज्ञानिकों की नर्सरी है। यहां से निकले युवा आज अमेरिका, यूरोप और एशिया के टॉप यूनिवर्सिटीज में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। जब देश ‘विकसित भारत’ का सपना देख रहा है, तो ऐसे संस्थान युवाओं को वह ज्ञान दे रहे हैं जो उन्हें दुनिया का नेता बनाता है।
सरकार का फोकस
ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल जाट ने कहा कि यह सरकार की उस नीति का परिणाम है जहां कृषि शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा रहा है। सरकार अब सिर्फ अन्न का उत्पादन नहीं, बल्कि पोषण, टिकाऊ खेती और निर्यात पर ध्यान दे रही है।
किसानों के लिए क्या मतलब?
इस उपलब्धि का सबसे बड़ा फायदा देश के किसानों को मिलेगा। जब कोई संस्थान दुनिया की टॉप रैंकिंग में होता है, तो उसकी रीसर्च को ज़्यादा फंडिंग और Global Partnership मिलती है। इसका सीधा मतलब है, किसानों के लिए बेहतर बीज, सस्ती तकनीक और बढ़ती मंडी। 121 साल पुराने इस संस्थान ने साबित कर दिया है कि भारत अब सिर्फ खेती करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि कृषि विज्ञान में दुनिया को दिशा देने वाला देश बन गया है।

