मिडिल ईस्ट (Middle East) में एक बार फिर भड़के टेंशन ने सिर्फ ग्लोबल पॉलिटिक्स ही नहीं, बल्कि आपकी रसोई और किसान के खेत की (India-Iran Relationship) धड़कनें भी बढ़ा दी हैं। जब Strait of Hormuz में तनाव बढ़ता है, तो उसकी लहरें सीधे भारत के एक्सपोर्ट मार्केट को हिला देती हैं। ये संकट ख़ासकर हमारे कृषि कारोबार के लिए भूचाल से कम नहीं है, क्योंकि खाने का सामान, वक्त और लॉजिस्टिक्स के मामले में सबसे संवेदनशील होते हैं।
भारत और ईरान के रिश्ते (India-Iran Relations) सदियों पुराने हैं, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि ये आर्थिक रिश्ता अब सिकुड़कर लगभग खत्म होने की कगार पर है। साल 2018-19 में दोनों देशों का कुल व्यापार 17 अरब डॉलर के शिखर पर था, जो अब 2024-25 में घटकर 2 अरब डॉलर से भी नीचे आ गिरा है। यानी सिर्फ 6-7 सालों में 85 से 90 फीसदी की गिरावट हुई है। इस पतन की सबसे बड़ी वजह ईरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हैं, लेकिन अब ये युद्ध ने इस बचे-खुचे कारोबार की कमर तोड़ने का काम किया है।
कृषि व्यापार: दोनों देशों के लिए ‘Life Line’
जब तेल का कारोबार ठप्प हुआ, तो कृषि उत्पाद ही एकमात्र ऐसा पुल बचा, जिसने दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को जिंदा रखा हुआ है।
ईरान से भारत में आयात (हम क्या ख़रीदते हैं)
ईरान (Iran) हमारे लिए सिर्फ तेल का देश नहीं है। यहां से हम हाई क्वालिटी वाले कृषि उत्पादों की ख़रीद करते हैं। इनमें सबसे प्रमुख है ईरान का मशहूर पिस्ता, जो भारतीय बाजार में बड़ी मात्रा में खपता है। इसके अलावा, ईरान के टेस्टी खजूर, ताज़े सेब, कीवी और दूसरे फल भारत आते हैं। ये वो उत्पाद हैं जो सीधे हमारे त्योहारों और रसोई का हिस्सा बनते हैं।
भारत से ईरान को निर्यात (हम क्या बेचते हैं)
दूसरी तरफ, भारत ने ईरान में एक मज़बूत बाजार बना रखा है। पिछले वित्त वर्ष में हमने ईरान को हजारों करोड़ रुपये के कृषि उत्पाद बेचे।
1.बासमती चावल: ये हमारे निर्यात का सबसे मजबूत स्तंभ है। ईरान में भारतीय बासमती की खासी मांग है।
2.चाय और मसाले: भारतीय चाय की पत्ती और तीखी मिर्च से लेकर गरम मसाले तक ईरानी बाजारों में पहुंचते हैं।
3.ताजे फल और सब्जियां: ये वो सेक्टर है जो सबसे ज्यादा संकट में है। आम, अंगूर, प्याज जैसी ताजी चीजें एयर कार्गो या तेज समुद्री मालवाहकों से भेजी जाती हैं।
4.दालें और पशु आहार: इनकी भी ईरान में काफी मांग है।
5.युद्ध संकट का तगड़ा झटका: समय ही धन है
अब इस युद्ध ने जो सबसे बड़ा संकट खड़ा किया है, वो है आवाजाही की परेशानी हवाई मार्ग बंद होने या सीमित होने का सबसे बुरा असर उन ताजे उत्पादों पर पड़ेगा, जिनकी उम्र बहुत कम होती है। जैसे ताजी सब्जियां, फल और कुछ डेयरी प्रोडक्ट।
अगर लंबा रास्ता तय करने में कुछ दिनों की देरी होती है, तो पूरा कंटेनर सड़कर ख़राब हो सकता है। जहाज के रास्ते भी अगर असुरक्षित हो जाएं या बीमा के दाम आसमान छू लें, तो व्यापार घाटे का सौदा बन जाएगा। अगर यह हालात लंबे खिंचे, तो सीधा नुकसान भारतीय किसान और निर्यातक की जेब पर पड़ेगा।
(सभी आंकड़े भारतीय वाणिज्य विभाग और भारतीय दूतावास, तेहरान की आधिकारिक वेबसाइट से लिए गए हैं।)
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