Uttar Pradesh Fish Festival and Aqua Expo 2026: यूपी बना मछली उत्पादन का पावरहाउस

लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में दो दिवसीय 'उत्तर प्रदेश मीन महोत्सव और एक्वा एक्सपो 2026' (Uttar Pradesh Fish Festival and Aqua Expo 2026) का शानदार आयोजन किया गया।

Uttar Pradesh Fish Festival and Aqua Expo 2026: यूपी बना मछली उत्पादन का पावरहाउस

अगर आप सोचते हैं कि उत्तर प्रदेश सिर्फ गेहूं और गन्ने का कटोरा है, तो आप गलत हैं। प्रदेश अब मछली उत्पादन (fish production) में देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य बनकर उभरा है, और इसे और ऊंचाई पर ले जाने के लिए लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में दो दिवसीय ‘उत्तर प्रदेश मीन महोत्सव और एक्वा एक्सपो 2026’ (Uttar Pradesh Fish Festival and Aqua Expo 2026) का शानदार आयोजन किया गया। ये सिर्फ एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि प्रदेश के fisheries sector  को आधुनिक तकनीक, निवेश और उद्यमिता (Entrepreneurship) से जोड़ने वाला एक ऐतिहासिक कदम है।

तालाब से कारोबार तक का सफ़र

महोत्सव का उद्घाटन केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल और यूपी के मत्स्य मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने किया। लेकिन इसकी असली ताकत थी प्रदेश के 75 जनपदों से आए हजारों मछुआरे और मत्स्य पालक। एक्वा एक्सपो में देशभर की 50 नामचीन कंपनियों ने अपने स्टॉल लगाए, जहां मछली पालकों ने आधुनिक हैचरी, फीड, केज कल्चर, कोल्ड चेन और लॉजिस्टिक्स की बारीकियां सीखीं। यहां सिर्फ मछली पकड़ना नहीं, बल्कि ‘प्रोसेसिंग’ और ‘वैल्यू एडिशन’ यानी मछली से ज्यादा मुनाफा कमाने के गुर सिखाए गए।

 यूपी की 115 फीसदी की विकास दर

आंकड़े बताते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) के मार्गदर्शन में यूपी ने पिछले 6 सालों  में अपना annual fish production  दोगुना कर 13.3 लाख मीट्रिक टन कर लिया है। मत्स्य मंत्री डॉ. निषाद ने बताया कि विकास दर 115.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है। ये बदलाव सिर्फ संयोग नहीं, बल्कि सरकार की ठोस रणनीति का नतीजा है। अब अमृत सरोवरों को मत्स्य पालन से जोड़ा जा रहा है और तालाबों के पट्टे समय पर दिए जा रहे हैं।

बजट से लेकर बाज़ार तक की तैयारी

कार्यक्रम में सबसे बड़ी घोषणा यह रही कि वर्ष 2026-27 के बजट में मत्स्य विभाग के लिए 114.20 करोड़ रुपये की New State Aided Scheme मंजूर की गई है। केंद्रीय मंत्री प्रो. बघेल ने मत्स्य पालकों को कृषि दर पर बिजली देने और एनएफडीबी (National Bank for Agriculture and Rural Development) केंद्र खोलने का भरोसा दिलाया। यानी अब मछली पालन सिर्फ ग्रामीण व्यवसाय नहीं, बल्कि औद्योगिक नजरिए से देखा जाएगा।

टेक्नोलॉजी का संगम और एक्वा पर्यटन

महोत्सव में इंटीग्रेटेड एक्वापार्क, मोती की खेती और वर्ल्डफिश प्रोजेक्ट जैसी योजनाओं पर चर्चा हुई। ये सिर्फ रोजगार का ज़रिया नहीं, बल्कि ‘एक्वा पर्यटन’ को बढ़ावा देने की भी तैयारी है, जहां लोग मछली पालन के आधुनिक तरीके देख सकेंगे और प्रोटीन से भरपूर मछली के खानों का लुत्फ उठा सकेंगे।

 

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