इंडिया-इजरायल की Special Strategic Partnership : Agriculture और fisheries में नई तकनीक से लैस होगा भारत

प्रधानमंत्री मोदी (Prime Minister Modi) और उनके इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने साफ किया कि दोनों देशों की क्षमताएं एक-दूसरे की पूरक हैं । इजरायल के पास जहां टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की ताकत है, वहीं भारत प्रतिभा, इन्फ्रास्ट्रक्चर और उद्यमिता (Entrepreneurship) का हब है।

इंडिया-इजरायल की Special Strategic Partnership : Agriculture और fisheries में नई तकनीक से लैस होगा भारत

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) का इजरायल (Israel) का दो दिवसीय (25-26 फरवरी, 2026) ऐतिहासिक दौरा दोनों देशों के संबंधों में एक नए युग के रूप में दर्ज हुआ है। नौ साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री की ये पहली इजरायल यात्रा थी, जिसमें दोनों देशों ने अपने रिश्तों को औपचारिक रूप से ‘Special Strategic Partnership’ के स्तर तक पहुंचाने का ऐतिहासिक फैसला किया। इस दौरे के दौरान कुल 17 समझौते और 10 अहम घोषणाएं की गईं, जो इस बात का सबूत हैं कि अब ये पार्टनरशिप सिर्फ रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि तकनीक, कृषि, शिक्षा, वित्त और लोगों के आपसी जुड़ाव के नए आयाम छुएगी।

क्यों ख़ास है ये ‘Special Strategic Partnership’?

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी संयुक्त बयान के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी (Prime Minister Modi) और उनके इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने साफ किया कि दोनों देशों की क्षमताएं एक-दूसरे की पूरक हैं। इजरायल के पास जहां टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की ताकत है, वहीं भारत प्रतिभा, इन्फ्रास्ट्रक्चर और उद्यमिता (Entrepreneurship) का हब है। इसी तालमेल को देखते हुए दोनों देश एआई, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक्नोलॉजी और स्पेस जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे। ये साझेदारी भारत के ‘आत्मनिर्भर और विकसित भारत 2047’ के विजन को सीधे तौर पर मजबूत करेगी।

Agriculture and fisheries: नई तकनीक से लैस होगा भारत

इस दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक कृषि और मत्स्य क्षेत्र में हुए ठोस समझौते रहे।

कृषि में इनोवेशन सेंटर

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और इजरायल की माशाव एजेंसी के बीच ‘भारत-इजरायल इनोवेशन सेंटर फॉर एग्रीकल्चर (IINCA)’ की स्थापना पर सहमति बनी। ये केंद्र प्रिसिजन फार्मिंग (सटीक खेती), सैटेलाइट आधारित सिंचाई, उन्नत कृषि मशीनरी और एकीकृत कीट प्रबंधन जैसी अगली पीढ़ी की तकनीकों को विकसित करेगा। साथ ही, कृषि अनुसंधान में 20 संयुक्त फेलोशिप देने की घोषणा भी की गई, जिससे भारतीय वैज्ञानिक इजरायल के वोल्कानी सेंटर में शोध कर सकेंगे। गौरतलब है कि भारत में पहले से स्थापित 35 कृषि उत्कृष्टता केंद्रों से 10 लाख से अधिक किसान लाभान्वित हो चुके हैं और 8 और केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।

फिशरीज़ में क्रांति

मत्स्य पालन के क्षेत्र में हुए समझौते के तहत टिकाऊ और तकनीक आधारित मछली पालन प्रणालियों पर फोकस रहेगा। रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS), बायोफ्लॉक, मैरीकल्चर और सीवीड जैसे क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान और उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे। ये कदम भारत की नीली क्रांति को नई दिशा दे सकता है।

डिजिटल भुगतान और वित्तीय सेवाएं

इजरायल में अब जल्द ही यूपीआई के जरिए भुगतान हो सकेगा। एनपीसीआई इंटरनेशनल (NIPL) और इजरायली संस्था MASAV के बीच हुए समझौते से दोनों देशों के बीच क्रॉस-बॉर्डर रेमिटेंस आसान हो जाएगा। इसके अलावा, इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (IFSCA) और इजरायल सिक्योरिटीज अथॉरिटी (ISA) के बीच हुए समझौते से फिनटेक और रेगुलेटरी तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा।

रोज़गार के नए अवसर

इजरायल में Indian workers के लिए रोजगार के व्यापक अवसर खुले हैं। वाणिज्य,सेवा,विनिर्माण और रेस्तरां क्षेत्रों में भारतीयों की भर्ती के लिए तीन अलग-अलग प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए गए। ख़ास बात ये है कि अगले पांच सालों में 50,000 भारतीय कामगारों को इजरायल में नौकरी देने की घोषणा की गई है। ये कदम दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी जुड़ाव को मजबूत करेगा।

 

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