India Seychelles Partnership: सस्टेनेबल यूज़, टेक्निकल पार्टनरशिप और ब्लू इकोनॉमी की मज़बूती की दिशा में बड़ा कदम

भारत आज Fisheries sector में 19.7 मिलियन टन उत्पादन के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ी मछली उत्पादक देश बन चुका है। 8.46 अरब डॉलर का समुद्री खाद्य निर्यात (Seafood exports) इस क्षेत्र की ताकत को दिखाता है।

भारत और सेशेल्स के बीच हुई हाई लेवल मीटिंग ने हिंद महासागर में सहयोग की नई इबारत लिखी है। यह सिर्फ एक राजनयिक बैठक नहीं थी, बल्कि समुद्री संसाधनों के संस्टेबल यूज़, टेक्निकल पार्टनरशिप  और  ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम था।

क्यों है ये सहयोग ख़ास?

भारत आज Fisheries sector में 19.7 मिलियन टन उत्पादन के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ी मछली उत्पादक देश बन चुका है। 8.46 अरब डॉलर का समुद्री खाद्य निर्यात (Seafood exports) इस क्षेत्र की ताकत को दिखाता है। वहीं, सेशेल्स हिंद महासागर का एक छोटा लेकन समुद्री संसाधनों से भरपूर देश है, जिसकी अर्थव्यवस्था काफी हद तक मत्स्य क्षेत्र पर डिपेंड है। दोनों देशों के बीच यह साझेदारी आपसी फायदे की सौगात है।

मछली पालन: सिर्फ़ बिज़नेस नहीं, लाइफलाइन

बैठक में दोनों देशों ने साफ किया कि मछली पालन केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि फूड सिक्योरिटी और रोजगार का एक मज़बूत आधार है। भारत की तटीय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में लाखों लोग इस क्षेत्र से जुड़े हैं। सेशेल्स भी इसी रास्ते पर आगे बढ़ना चाहता है। भारत का अनुभव सेशेल्स के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकता है।

टूना, एक्वाकल्चर और मॉडर्न टेक्नोलॉजी

बैठक में मरीन एक्वाकल्चर, मॉडर्न हैचरी टेक्निक और टूना फिशरीज पर ख़ास दिया गया। टूना वो मछली है, जो सेशेल्स की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। भारत अपनी उन्नत प्रोसेसिंग तकनीक, कोल्ड चेन मैनेजमेंट और मछली भंडार आकलन (stock assessment) के अनुभव को शेयर करेगा। इससे मछली पकड़ने के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा और प्रोडक्ट्स की क्वालिटी बढ़ाई जा सकेगी।

AI और फीशरीज़ का फ्यूचर

सबसे रोमांचक पहलू यह है कि अब मछली पालन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा। दोनों देश मिलकर समुद्री निगरानी, डेटा मैनेजमेंट और सर्विलांस सिस्टम को मज़बूत करेंगे। इससे मछली पकड़ने की गतिविधियों की पारदर्शिता बढ़ेगी, अवैध मछली पकड़ने पर लगाम लगेगी और Marine ecosystem का बैलेंस बना रहेगा।

ट्रेनिंग और रिसर्च

ये सहयोग केवल तकनीकी साझेदारी तक सीमित नहीं है। दोनों देश हर साल एक Joint Action Plan बनाएंगे, जिसके तहत वैज्ञानिक, रिसर्चर्स और तकनीशियन एक-दूसरे के देशों में जाकर ट्रैनिंग लेंगे, नई तकनीकें सीखेंगे और अनुभवों का आदान-प्रदान करेंगे। इससे दोनों देशों के मानव संसाधन को मज़बूती मिलेगी और  इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा।

हिंद महासागर में नई संभावनाएं

ये पहल केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि पूरे हिंद महासागर क्षेत्र के लिए एक मिसाल है। सतत मत्स्य पालन, समुद्री संसाधन प्रबंधन और ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देकर भारत और सेशेल्स इस क्षेत्र में विकास का नया मॉडल पेश कर रहे हैं। इससे न केवल मछुआरों के जीवन स्तर में सुधार होगा, बल्कि पूरे क्षेत्र में Economic Prosperity and Maritime Security को भी बल मिलेगा।

 

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