गांवों में फैल रही है ‘खामोश महामारी’, ज़हरीले रसायन किसानों की Mental Health कर रहे तबाह, ICMR की स्टडी

Indian Council of Medical Research (ICMR) के एक ताजा और डीप स्टडी कहती है कि कीटनाशकों (insecticides) के लगातार संपर्क में आने से किसानों में डिप्रेशन, याददाश्त की कमजोरी और दिमाग से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों का खतरा (Farmers are at risk of depression, memory loss, and several serious brain-related diseases)  तेज़ी से बढ़ रहा है।

गांवों में फैल रही है 'खामोश महामारी', ज़हरीले रसायन किसानों की Mental Health कर रहे तबाह, ICMR की स्टडी

हमारा किसान, जो देश का पेट भरने का काम करता है, आज खुद गंभीर मुसीबत में है। आर्थिक मुश्किलों और मौसम की मार के बीच अब एक नया और डरावना खतरा उसके सामने खड़ा हो गया है। ये खतरा है उसकी मानसिक सेहत (mental health) का। हैरान कर देने वाली बात ये है कि ये खतरा खेतों में उगाई जा रही फसलों से नहीं, बल्कि उन पर छिड़के जा रहे कीटनाशकों (insecticides) से पैदा हो रहा है।

Indian Council of Medical Research (ICMR) के एक ताजा और डीप स्टडी ने इस समस्या की पुष्टि की है। स्टडी कहती है कि कीटनाशकों (insecticides) के लगातार संपर्क में आने से किसानों में डिप्रेशन, याददाश्त की कमजोरी और दिमाग से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों का खतरा (Farmers are at risk of depression, memory loss, and several serious brain-related diseases)  तेज़ी से बढ़ रहा है। ये स्थिति ग्रामीण भारत के लिए एक नए संकट की घंटी है।

क्या कहती है स्टडी? चौंकाने वाले आंकड़े

ICMR की टीम ने पश्चिम बंगाल के कृषि प्रधान इलाकों में 808 किसान परिवारों का Survey किया। नतीजे चौंकाने वाले थे:

  • सर्वे में शामिल 22.3 फीसदी किसानों में या तो हल्की याददाश्त की समस्या (Mild Cognitive Impairment), या डिप्रेशन, या फिर दोनों ही बीमारियों के लक्षण पाए गए।
  • जो किसान हफ्ते में केवल एक बार कीटनाशक का छिड़काव करते हैं, उनमें मानसिक समस्याओं का खतरा ढाई से तीन गुना तक बढ़ जाता है।
  • 30 साल से ज्यादा समय से खेती कर रहे और कीटनाशकों के कॉन्टेक्ट में रहे किसानों में इसका जोखिम लगभग दोगुना हो जाता है।
  • खून में मिले ज़हर के सबूत

kisan of india instagram

ये स्टडी सिर्फ लक्षणों तक ही सीमित नहीं थी। Researchers  ने किसानों के खून की जांच कर वैज्ञानिक प्रमाण भी जुटाए। उन्होंने खून में तीन महत्वपूर्ण एंजाइम्स (ACHE, BCHE और PON1) का लेवल देखा। पाया गया कि डेली स्प्रे करने वाले किसानों में PON1 biomarker का स्तर काफी बढ़ा हुआ था।

ये PON1 एंजाइम तब बढ़ता है जब शरीर जहरीले ऑर्गेनोफॉस्फेट कीटनाशकों से लड़ने की कोशिश करता है। इसे शरीर का एक ‘Warning Signs’ माना जाता है, जो बताता है कि ये toxic chemicals सीधे तौर पर दिमाग और नर्वस सिस्टम (nervous system) पर हमला कर रहे हैं।

‘खामोश महामारी’ बनता जा रहा है संकट

अध्ययन में शामिल कई किसानों ने बताया कि वे बिना किसी सुरक्षा (बिना मास्क, दस्ताने आदि के) सालों से खेतों में कीटनाशक छिड़क रहे हैं। उनकी शिकायतें थीं, याददाश्त का कमजोर होना, तनाव का बढ़ना और काम करने की क्षमता का धीरे-धीरे घटना।

पश्चिम बंगाल स्थित ICMR सेंटर के प्रोफेसर अमित चक्रवर्ती के अनुसार, ग्रामीण भारत में ये समस्या एक ‘खामोश महामारी’ का रूप ले चुकी है। खेतों में काम करने वाले मजदूरों में भी याददाश्त कम होना, चक्कर आना, ध्यान केंद्रित न कर पाना और रोजमर्रा के काम में दिक्कत जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं। कुछ मामलों में तो neurological diseases के शुरुआती संकेत भी मिले हैं।

kisan of india youtube

ICMR की केंद्र और राज्य सरकारों को सलाह

ICMR ने इस गंभीर समस्या को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को सलाह दी है कि किसानों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं। इसके तहत राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी, जागरूकता अभियान और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की जरूरत है।

किसानों को कीटनाशक छिड़काव के दौरान पूरी बांह की शर्ट, फुल पैंट, मास्क, दस्ताने, चश्मा और जूते पहनने जैसी सुरक्षा उपायों के बारे में जागरूक करना बेहद ज़रूरी है। साथ ही, कम जहरीले और प्राकृतिक कीटनाशकों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की भी ज़रूरत है।

 

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

इसे भी पढ़िए: American Market में भारतीय किसानों के लिए सुनहरा मौका! Tariff छूट से मसालों और चाय के एक्सपोर्ट को बढ़ावा

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top