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अब सिर्फ बिहार ही नहीं, आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) भी बनेगा देश का ‘Mushroom Hub’..मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की सरकार देश का पहला ‘Mushroom Mission’ शुरू करने जा रही है, जिसमें 13 हज़ार करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश होगा। इस मिशन का टारगेट है-राज्य को भारत का सबसे बड़ा मशरूम उत्पादक बनाना।
क्या है ख़ास?
इस मिशन के तहत, राज्य में 1.62 लाख मशरूम उत्पादन यूनिट्स लगाई जाएंगी। हर यूनिट करीब 5,000 वर्ग फीट में फैली होगी, ताकि छोटे और सीमांत किसान भी इसे आसानी से अपना सकें। सरकार का सीधा फोकस ग्रामीण रोजगार और महिला सशक्तिकरण पर है। इसके लिए राज्य के मजबूत स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को भी जोड़ा जाएगा।
कितनी मिलेगी सब्सिडी?
किसानों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। कुल निवेश में से करीब 5,184 करोड़ रुपये (लगभग 40 फीसदी) सब्सिडी के तौर पर दिए जाएंगे। ये रकम केंद्र और राज्य सरकार मिलकर देंगी। यानी किसानों को सिर्फ 60 फीसदी लागत उठानी होगी, बाकी का बोझ सरकार उठाएगी।
मांग के हिसाब से फसल
इस मिशन में तीन ख़ास किस्मों पर जोर होगा । मिल्की मशरूम, पैडी स्ट्रॉ मशरूम और बटन मशरूम। इनकी बाजार में भारी डिमांड है। अहम बात है कि मिल्की मशरूम गर्मी में भी आसानी से उग जाता है, जो आंध्र जैसे गर्म राज्य के लिए वरदान है।
कितना होगा उत्पादन?
अभी बिहार देश में टॉप पर है, जहां करीब 45,000 टन मशरूम का सालाना उत्पादन होता है। आंध्र सरकार ने लक्ष्य रखा है 67,500 टन सालाना प्रोडक्शन का। यानी बिहार को पीछे छोड़कर आंध्र बनेगा नंबर-1।
सिर्फ घरेलू बाजार ही नहीं, एक्सपोर्ट का भी टारगेट
सरकारी अधिकारी मानते हैं कि खाड़ी देशों में मशरूम की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसलिए इस मिशन में निर्यात को भी प्रायोरिटी दी जाएगी। सरकार चाहती है कि यह पहल मिलेट्स (श्री अन्न) की तरह सफल हो और राज्य में एक नई कृषि-आधारित वैल्यू चेन तैयार हो।
किसानों को क्या फायदा?
1.कम लागत, ज्यादा मुनाफा : मशरूम की खेती 20-25 दिनों में तैयार हो जाती है।
2.बंजर जमीन भी उपयोगी : मशरूम उगाने के लिए खास ही खेत नहीं चाहिए, छोटी सी जगह और नमी काफी है।
3.सरकारी सब्सिडी : 40 फीसदी तक का अनुदान, जो किसानों की लागत कम करेगा।
4.महिलाओं को रोजगार : SHGs के ज़रिए गांवों में आजीविका के नए अवसर।
कब से होगी शुरुआत?
मुख्यमंत्री के निर्देश पर अधिकारियों ने Action Plan तैयार कर लिया है। जल्द ही इसकी औपचारिक घोषणा होगी। कहा जा रहा है कि अब आंध्र में ‘मशरूम की फसल’ सोना उगलने वाली फसल बनकर उभरेगी।
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