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क्या आप जानते हैं कि भारत आज मछली पालन (Fish Farming) के मामले में चीन के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर है और ये मुकाम हासिल करना हमारे मछुआरों और केंद्र सरकार की एक बड़ी योजना (Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana) की मेहनत का नतीजा है। साल 1950 से लेकर 2025-26 तक भारत का मछली उत्पादन 25 गुना से भी ज्यादा बढ़ गया है। सिर्फ 11 साल पहले 2013-14 में जहाँ हम 95.79 लाख टन मछली पैदा करते थे, वहीं अब ये आंकड़ा 195 लाख टन पर जा पहुंचा है। यानी 100 लाख टन का जबरदस्त उछाल और अगले साल 2026-27 तक 220 लाख टन तक पहुंचने का टारगेट है।
सीफूड एक्सपोर्ट ने मारी छलांग
2013-14 में भारत का सीफूड एक्सपोर्ट (India’s Seafood Exports) 30,213 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 65 हज़ार करोड़ रुपये हो गया। यानी 112 फीसदी की बढ़ोतरी। वो भी कोरोना और दूसरी महामारियों के बावजूद। आज भारतीय समुद्री खाना (Indian Seafood ) दुनिया के 129 देशों में जाता है। चीन, अमेरिका और यूरोप हमारे झींगा के सबसे बड़े ख़रीदार हैं।
सूखी मछली का बूम
एक दिलचस्प बात – सूखी मछली का एक्सपोर्ट (Dried Fish Exports) कोरोना के बाद दोगुना से भी ज्यादा बढ़ गया है। 2021-22 में 5,503 करोड़ रुपये की सूखी मछली निर्यात हुई थी, अब इसमें 60 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हो चुकी है। महंगी कोल्ड स्टोरेज की बजाय अब मछुआरे कम लागत में सुखाकर मछली बेचना पसंद कर रहे हैं।
कैसे हुआ ये कमाल?
फिशरीज एक्सपर्ट्स की मानें तो इसका श्रेय प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana) को जाता है। जो 20,050 हजार करोड़ रुपये की देश की सबसे बड़ी मछली योजना है। इस योजना के तहत-
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गहरे समुद्र में सुरक्षा: अब मछुआरे फंसते नहीं हैं। किसी भी खतरे पर टू-वे कम्यूनिकेशन सिस्टम से मदद मिलती है।
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हाईटेक बोट: मछलियां अब किनारे तक आते-आते खराब नहीं होतीं।
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ड्रोन का ट्रायल: समुद्र से किनारे तक मछली लाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
इनलैंड मछली पालन में तरक्की
तालाबों, नदियों और जमीन पर होने वाले मछली उत्पादन (इनलैंड) में 142 फीसदी का उछाल आया है। 2013-14 में यह 61.36 लाख टन था, अब बढ़कर 147 लाख टन हो गया है।
झींगा एक्सपोर्ट का गजब कमाल
भारत के झींगा को दुनिया भर में पसंद किया जाता है। 2013-14 में 19,368 करोड़ रुपये का झींगा एक्सपोर्ट हुआ था, जो 2024-25 में बढ़कर 45 हज़ार करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी खर्च
सरकार ने मछली बंदरगाहों पर 4,906 करोड़, फिश लैंडिंग सेंटरों पर 182 करोड़ और कुल मिलाकर 7,522 करोड़ रुपये फिशरीज इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किए हैं।
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