Rabi Season 2025-26: अब किसानों को मिलेगा सही दाम, 11 हज़ार करोड़ से अधिक की MSP ख़रीद को मंज़ूरी

केंद्र सरकार ने रबी सीजन 2025-26 (Rabi Season 2025-26) के लिए रिकॉर्ड मात्रा में दलहन और तिलहन की एमएसपी (Minimum Support Price) खरीद को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से लगभग 18.77 लाख मीट्रिक टन फसल की खरीद होगी, जिस पर करीब 11,700 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होंगे।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Union Minister of Agriculture, Shri Shivraj Singh Chouhan) ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए तीन राज्यों जिसमें हरियाणा, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक शामिल है, में रबी सीजन 2025-26 (Rabi Season 2025-26) के लिए रिकॉर्ड मात्रा में दलहन और तिलहन की एमएसपी (Minimum Support Price) खरीद को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से लगभग 18.77 लाख मीट्रिक टन फसल की खरीद होगी, जिस पर करीब 11,700 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होंगे।

अब उचित मूल्य की गारंटी

अक्सर देखा जाता है कि कटाई के बाद किसान मंडियों में अपनी फसल के सही दाम न मिलने पर मजबूरन सस्ते दामों पर बेचने को विवश हो जाते हैं। लेकिन इस बार केंद्र सरकार ने कमर कस ली है। श्री चौहान ने मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत इन प्रस्तावों को हरी झंडी दिखा दी है। अब किसान बिना किसी चिंता के अपनी फसल बेच सकेंगे क्योंकि सरकार एमएसपी पर हर दाना खरीदेगी।

किसको, कितना फायदा?

उत्तर प्रदेश: सबसे बड़ी ख़रीद

यूपी के किसानों के लिए ये सुनहरा अवसर है। यहां कुल 14.31 लाख मीट्रिक टन चना, मसूर और सरसों की खरीद होगी- 

1.चना: 2.24 लाख मीट्रिक टन (1,316 करोड़ रु.)

2.मसूर: 6.77 लाख मीट्रिक टन (4,739 करोड़ रु.)

3.सरसों: 5.30 लाख मीट्रिक टन (3,286 करोड़ रु.)

4.कुल एमएसपी मूल्य: लगभग 9,341 करोड़ रुपये।

हरियाणा: सरसों और चने पर ज़ोर

हरियाणा में 3.73 लाख मीट्रिक टन चना-सरसों की ख़रीद को मंज़ूरी दी गई है। इस पर 2,312 करोड़ रुपये से ज़्यादा खर्च होंगे।

कर्नाटक: कुसुम (केसर) की ख़रीद

दक्षिण भारत में कुसुम (Safflower) उगाने वाले किसानों के लिए राहत भरी ख़बर है। यहां 6,923 मीट्रिक टन कुसुम की एमएसपी ख़रीद होगी, जिसके लिए 45.27 करोड़ रुपये एक्सेप्ट किए गए हैं।

डीप रीसर्च: क्यों ज़रूरी है ये फैसला?

भारत में दलहन और तिलहन की खेती (Cultivation of Pulses and Oilseeds) करने वाले किसान अक्सर कीमतों में उतार-चढ़ाव के शिकार हो जाते हैं। आयातित तेलों और दालों के कारण घरेलू बाजार में दाम गिर जाते हैं। इससे किसान अगली बार फसल बदलने को मजबूर हो जाते हैं, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा प्रभावित होती है।

इस एमएसपी खरीद से तीन बड़े फायदे होंगे-

1.किसानों की आय स्थिर होगी और वे आत्मनिर्भर बनेंगे।

2.देश में दलहन-तिलहन का उत्पादन बढ़ेगा, जिससे आयात कम होगा।

3.पोषण सुरक्षा मजबूत होगी क्योंकि दालें और तेल हर घर तक सस्ती दरों पर पहुंचेंगे।

PoS से होगा भुगतान

इस बार खरीद प्रोसेस को और पारदर्शी बनाया गया है। राज्यों में PoS (point of sale) आधारित खरीद व्यवस्था पहले से मज़बूत है। किसानों को सीधे उनके बैंक खातों में भुगतान होगा, बिचौलियों की कोई जगह नहीं। कृषि मंत्री चौहान ने साफ किया है कि  ‘हर दाना खरीदा जाएगा, कोई किसान परेशान नहीं होगा।’

एमएसपी खरीद देश के किसानों को आर्थिक मज़बूती देगी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और शिवराज सिंह चौहान के कृषि प्रेम ने आज एक नया इतिहास रचा है। 11 हज़ार करोड़ रुपये से अधिक की ये एमएसपी खरीद देश के किसानों को आर्थिक मजबूती देगी। अब किसान को यह नहीं सोचना पड़ेगा कि उसकी फसल कहां बिकेगी।  सरकार खुद उनके दरवाजे पर ख़रीदार बनकर आ रही है।

 

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