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देश में टिकाऊ विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद ने एक नई तकनीक को उद्योगों के लिए पेश किया है। इस तकनीक के ज़रिए अब खेतों में बचने वाले अवशेषों से सड़क निर्माण के लिए Bio-Bitumen तैयार किया जाएगा। इस मौके पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद रहे और उन्होंने इसे किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए फ़ायदेमंद बताया।
कार्यक्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, उद्योग प्रतिनिधि और नीति निर्माता भी शामिल हुए। इस पहल को कृषि, विज्ञान और इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच एक मज़बूत कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
खेती और इंफ्रास्ट्रक्चर को जोड़ने की पहल
इस नई तकनीक को लेकर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ये एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम है, जो खेती को सीधे इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ता है। उन्होंने बताया कि Bio-Bitumen Technology का उपयोग देश के जलवायु लक्ष्यों और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों को मज़बूती देगा।
शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, इस तकनीक के ज़रिए खेतों में बचने वाले अवशेषों का सही उपयोग होगा और किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा।
पराली जलाने की समस्या का समाधान
भारत में हर साल पराली जलाने से पर्यावरण को बड़ा नुक़सान होता है। इस मुद्दे पर बात करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ये तकनीक पराली जलाने की समस्या को कम करने में मदद कर सकती है। उन्होंने कहा कि जब किसानों को फ़सल अवशेष से कमाई का मौका मिलेगा, तो वे उसे जलाने के बजाय उपयोग करना पसंद करेंगे। शिवराज सिंह चौहान ने इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम बताया।
Bio-Bitumen Technology कैसे करती है काम?
ये तकनीक कृषि अवशेष और बायोमास का उपयोग करके एक ख़ास प्रक्रिया के ज़रिए Bio-Bitumen तैयार करती है। वैज्ञानिकों ने बताया कि ये प्रक्रिया पारंपरिक पेट्रोलियम आधारित Bitumen का एक अच्छा विकल्प है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ये तकनीक न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि इसकी गुणवत्ता भी पारंपरिक Bitumen के बराबर है।
सड़कों के निर्माण में होगा उपयोग
इस तकनीक को सड़क निर्माण में इस्तेमाल करने की योजना बनाई जा रही है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इससे सड़क निर्माण में पर्यावरण के अनुकूल सामग्री का उपयोग बढ़ेगा और देश को आयातित Bitumen पर निर्भरता भी कम होगी। ये तकनीक बड़े स्तर पर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में लागू की जा सकती है।
किसानों के लिए नई आय का स्रोत
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस पहल से किसानों को उनकी फ़सल के अवशेष से भी आय प्राप्त होगी। उन्होंने बताया कि अब तक जो कृषि अवशेष बेकार समझे जाते थे, वे अब एक मूल्यवान संसाधन बन सकते हैं।
शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, ये तकनीक किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगी।
Waste to Wealth की दिशा में कदम
इस कार्यक्रम में ये भी बताया गया कि ये तकनीक ‘Waste to Wealth’ यानी कचरे को संसाधन में बदलने के सिद्धांत पर आधारित है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस तरह की पहल से देश में स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ विकास को बढ़ावा मिलेगा। ये तकनीक कृषि, विज्ञान और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय का उदाहरण भी है।
पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों को फ़ायदा
Bio-Bitumen Technology से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और पर्यावरण को कम नुक़सान होगा। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा क्योंकि आयातित Bitumen पर खर्च कम होगा। इस तकनीक के ज़रिए देश में हरित विकास को बढ़ावा मिलेगा।
आगे की दिशा
ये तकनीक भारत के लिए एक नई दिशा दिखाती है, जहां खेती और तकनीक मिलकर विकास को आगे बढ़ा सकते हैं। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस तरह के नवाचार किसानों के जीवन में बदलाव ला सकते हैं और देश को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेंगे।
आने वाले समय में इस तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाने की योजना है, जिससे किसानों, उद्योग और पर्यावरण सभी को फ़ायदा मिलेगा।
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