क्या आपने कभी सोचा है कि गांव की महिलाओं के हाथों बना मसाला, अचार या हस्तशिल्प किसी विदेशी देश की रसोई या घर को सजा सकता है? गुजरात सरकार ने एक ऐसी शानदार योजना शुरू की है जो इस सपने को साकार करेगी। ‘Marketing Support Scheme’ के तहत अब सखी मंडलों (Self-help groups) से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं के उत्पाद सीधे E-commerce platform पर बिकेंगे। सरकार ने इसके लिए 25 करोड़ रुपये का बजट रखा है, ताकि महिलाएं आत्मनिर्भर बनें और उनकी आमदनी बढ़े।
खुलेगा Digital World का दरवाजा
अब तक अधिकतर सखी मंडलों के उत्पाद स्थानीय मेलों और प्रदर्शनियों तक सीमित रहते थे। नई योजना इस पुरानी व्यवस्था को बदलने वाली है। इसके तहत ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन की सारी औपचारिकताओं के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। जैसे:
- जीएसटी पंजीकरण के लिए 15 हजार रुपये तक ।
- एफएसएसएआई लाइसेंस (खाद्य सुरक्षा) बनवाने के लिए 10 हजार रुपये तक।
- पैन कार्ड पंजीकरण के लिए 2 हजार रुपये तक की सहायता।
यानी, अब छोटे समूह भी बिना किसी एक्स्ट्रा आर्थिक बोझ के ऑनलाइन कारोबार शुरू कर सकेंगे। सरकार चाहती है कि डिजिटल इंडिया का यह फायदा गांव की अंतिम पंक्ति में खड़ी महिला तक पहुंचे।
ऑनलाइन बिक्री पर मिलेगा बोनस
स्कीम में सिर्फ रजिस्ट्रेशन ही नहीं, बल्कि बिक्री को बढ़ावा देने का भी बंदोबस्त है। हर ऑनलाइन ऑर्डर पर 20 रुपये का प्रोत्साहन दिया जाएगा। इससे महिलाओं को घर बैठे सामान बेचने और नियमित आमदनी पाने करने का भरोसा मिलेगा। हर सखी मंडल को अधिकतम 5 लाख रुपये तक की आजीवन सहायता मिल सकेगी।
ये योजना ‘लखपति दीदी’ अभियान को बड़ा बूस्ट देगी। गुजरात में पहले ही 5.96 लाख महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं, जिनकी सालाना आमदनी 1 लाख रुपये से अधिक है। अब नई योजना से ये नंबर और बढ़ेगी, क्योंकि महिलाओं को उनके प्रोडक्ट बेचने के लिए नेशनल और इंटरनेशनल मार्केट मिलेंगे।
क्या होगा बड़ा बदलाव?
ये योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी और Women Entrepreneurship को नई दिशा देगी। जब करोड़ों महिलाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ेंगी, तो उन्हें नए कस्टमर मिलेंगे, बिक्री बढ़ेगी और वे आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बनेंगी।
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

