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प्रकृति जब रूठती है, तो किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। सूखा, ओलावृष्टि या पाले जैसी प्राकृतिक आपदाएं फसलों को चुटकियों में तबाह कर देती हैं। लेकिन अब उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों के इसी दर्द को समझते हुए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत ‘Weather Information and Network Data System’ (WINDS) स्कीम को तेजी से लागू किया जा रहा है। ये परियोजना 2024-25 से अगले 5 सालों तक चलेगी और इसका बजट 60 करोड़ रुपये से ज़्यादा का है।
क्यों है ‘WINDS’ ख़ास?
अब तक फसल बीमा में सबसे बड़ी समस्या थी, मौसम के सही आंकड़ों का अभाव। जब नुकसान का आकलन करने में देरी होती थी, तो किसानों को मुआवजे के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था। ‘विंड्स’ योजना इसी जड़ समस्या का समाधान है। इसका मुख्य उद्देश्य है-
- मौसम के आंकड़ों को सीधे फसल बीमा पोर्टल से जोड़ना।
- प्राकृतिक आपदा के तुरंत बाद नुकसान का वैज्ञानिक आकलन करना।
- किसानों को रियल टाइम क्षतिपूर्ति भुगतान सुनिश्चित करना।
86 ऑटोमेटिक स्टेशन, 57 हजार रेन गेज
प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही (Agriculture Minister Surya Pratap Shahi)ने Skymet Weather Services Company के साथ बैठक कर साफ निर्देश दिए कि पहले फेज़ का काम 30 मई 2026 तक पूरा किया जाए। इस चरण में-
- 86 ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन (AWS) ब्लॉक स्तर पर लगाए जाएंगे।
- 11,846 ऑटोमेटिक रेन गेज (ARG) गांवों में स्थापित होंगे।
प्रदेश में कुल मिलाकर 826 AWS और 57,702 ARG लगाने का लक्ष्य है। यानी हर ब्लॉक और हर ग्राम पंचायत में अब मौसम का ‘CCTV’ होगा।
गौतमबुद्ध नगर, लखनऊ, मेरठ और मिर्जापुर में हुई शुरुआत
क्लस्टर-1 के 39 जिलों में survey चल रहा है। गौतमबुद्ध नगर, लखनऊ, मेरठ और मिर्जापुर में 13 ऑटोमैटिक रेन गेज का काम पूरा भी हो चुका है। ये योजना जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उतनी ही सख्त निगरानी भी हो रही है। मंत्री शाही ने साफ कहा, ‘किसानों के हित में किसी भी तरह का procrastination बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
सरकार ने योजना के लिए पूरी तैयारी की
- वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 60 करोड़ रुपये स्वीकृत।
- कंपनी को राज्यांश के रूप में 9.77 करोड़ रुपये अग्रिम भुगतान किया जा चुका है।
- भारत सरकार द्वारा 88.02 करोड़ रुपये (24 मार्च 2026 को) कंपनी को दे दिए गए हैं।
किसानों को मुफ्त मिलेगा डेटा, और बढ़ेगी सहूलियत
सबसे अच्छी बात यह है कि यह डेटा सिर्फ बीमा के लिए नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन, कृषि सलाह (एडवाइजरी) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए भी नि:शुल्क उपयोग किया जाएगा। किसान अब जान सकेंगे कि आने वाले दिनों में मौसम कैसा रहेगा, कौन सी फसल बोनी चाहिए और कब सिंचाई करनी है।

