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‘संडे हो या मंडे, रोज खाओ अंडे’ ये लाइन आप बचपन से सुनते आ रहे होंगे लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया के सबसे सस्ते और सबसे ताकतवर प्रोटीन सोर्स के सम्मान में हर साल अक्टूबर के दूसरे फ्राइडे को World Egg Day मनाया जाता है। साल 2026 में ये दिन 9 अक्टूबर को मनाया जा रहा है, और ये इस आयोजन की 30वीं वर्षगांठ भी है।
इस बार की थीम रखी गई है ‘Protein that Powers and Protects’ यानी ‘वो प्रोटीन जो शक्ति देता है और सुरक्षा करता है’। ये थीम सिर्फ एक नारा नहीं है, ये भारत जैसे देश के लिए बहुत गहरा मतलब रखती है, जहां करोड़ों लोगों के लिए अंडा ही किफायती प्रोटीन का सबसे बड़ा सहारा है।
भारत: दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा अंडा उत्पादक
भारत आज दुनिया में अंडा प्रोडक्शन के मामले में दूसरे नंबर पर है। साल 2024-25 में देश में 149.11 बिलियन (यानी 14,911 करोड़) अंडे पैदा हुए, जो पिछले साल से 4.44 फीसदी ज्यादा हैं। इससे भी बड़ी बात ये है कि प्रति व्यक्ति अंडे की उपलब्धता 2014-15 में 62 से बढ़कर 2024-25 में 106 अंडे प्रति वर्ष हो गई है । यानी एक दशक में 71 फीसदी की जबरदस्त बढ़त। ये दिखाता है कि अंडा भारतीय थाली में कितनी तेजी से अपनी जगह बना रहा है।
भारत में अंडा उत्पादन का भूगोल
भारत का अंडा उत्पादन कुछ राज्यों के सेंटर में है। आंध्र प्रदेश देश का सबसे बड़ा अंडा उत्पादक राज्य है, जिसकी हिस्सेदारी 18.37 प्रतिशत है। इसके बाद तमिलनाडु (15.63 फीसदी) और तेलंगाना (12.98 फीसदी) का नंबर आता है। यानी सिर्फ ये तीन दक्षिणी राज्य मिलकर भारत के लगभग आधे अंडे पैदा करते हैं। पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, हरियाणा और महाराष्ट्र भी बड़े योगदानकर्ता हैं।
महाराष्ट्र के नवापुर जैसे इलाके दशकों से पश्चिम भारत की अंडा सप्लाई की रीढ़ रहे हैं। यहां आज भी करीब 12 लाख मुर्गियां रोजाना 10 लाख अंडे देती हैं, जिनमें से 80 प्रतिशत से ज्यादा सूरत भेजे जाते हैं।
अंडा उद्योग: सिर्फ प्रोटीन नहीं,लाखों परिवारों की रोज़ी-रोटी भी
अंडा सिर्फ प्रोटीन नहीं, ये लाखों परिवारों की रोजी-रोटी भी है। मुर्गी पालन, चारा उत्पादन, अंडों की ढुलाई, बिक्री और पोल्ट्री उपकरण। ये पूरी वैल्यू चेन ग्रामीण भारत में रोजगार देती है। लेयर (अंडा देने वाली) मुर्गियां 18-20 हफ्ते की उम्र में अंडे देना शुरू करती हैं और करीब 72-78 हफ्तों तक उत्पादन देती हैं। ये एक लंबा इनवेस्टमेंट सर्किल है, जिसमें किसान को 18 महीने तक इंतजार करना पड़ता है ताकि लागत निकल सके।
चुनौतियां जो किसानों की कमर तोड़ रही हैं
हालांकि, भारत का पोल्ट्री उद्योग बड़ी मुश्किलों से गुजर रहा है। सोयाबीन मील के दाम एक महीने में 40 फीसदी तक बढ़ गए, जिससे चारे की लागत आसमान छूने लगी। इसके चलते उद्योग ने उत्पादन 25 फीसदी कम करने का फैसला किया और ब्रीडर स्टॉक की कटाई शुरू कर दी। सोयाबीन ही पोल्ट्री फीड का मेन प्रोटीन सोर्स है।
Avian Influenza (बर्ड फ्लू) का ख़तरा भी लगातार बना हुआ है। नवापुर जैसे इलाकों में 2006, 2021 और 2026 में आए outbreaks ने किसानों को बुरी तरह हिला दिया। एक outbreak के बाद फार्म को 90 दिन का इंतजार करना पड़ता है, फिर 5 महीने अंडे देने शुरू होने में लगते हैं यानी 9 महीने का पूरा बिजनेस ठप। सरकारी मुआवज़ा भी बहुत कम है। कटे पक्षी पर 140 रुपये, नष्ट अंडे पर 4 रुपये।
अंडे की ताकत: क्यों है ये ‘Superfood’
एक नॉर्मल अंडे में करीब 6 ग्राम हाई सोर्स वाला प्रोटीन होता है। इसमें विटामिन B12, विटामिन D, सेलेनियम, कोलीन और जरूरी अमीनो एसिड भी पाए जाते हैं। ये सब मिलकर मांसपेशियों, हड्डियों, दिमाग और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं।
भारत जैसे देश में अंडे की सबसे बड़ी खूबी इसकी किफायती कीमत है। जब दाल 150-200 रुपये किलो और दूध 70 रुपये लीटर तक पहुंच गया है, तब भी अंडा आम आदमी की पहुंच में बना हुआ है। हालांकि पोल्ट्री किसानों का कहना है कि ये कीमत उनके लागत तक नहीं पहुंच पाती।
विश्व अंडा दिवस सिर्फ अंडे खाने का दिन नहीं है। ये उस किसान को याद करने का दिन है जो सुबह 4 बजे उठकर मुर्गियों की देखभाल करता है। ये उस पोल्ट्री उद्योग की चुनौतियों को समझने का दिन है, जो देश को प्रोटीन देता है पर खुद मुनाफे और बीमारियों से जूझता है।
‘संडे हो या मंडे, रोज खाओ अंडे’- ये सिर्फ सेहत का नारा नहीं, बल्कि भारत के किसान और उसकी मेहनत का सम्मान भी है।
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