अनीता नेगी ने प्राकृतिक खेती से बंजर ज़मीन को बनाया उपजाऊ और खड़ा किया सफल मॉडल

प्राकृतिक खेती अपनाकर अनीता नेगी ने बंजर ज़मीन को उपजाऊ बनाया और किसानों के लिए प्रेरणा बनीं।

हिमाचल प्रदेश के बंजर क्षेत्र में रहने वाली किसान अनीता नेगी ने ये साबित कर दिया है कि अगर सोच मज़बूत हो तो किसी भी चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। उन्होंने प्राकृतिक खेती को अपनाकर न सिर्फ़ अपनी ज़मीन को उपजाऊ बनाया, बल्कि अपने क्षेत्र में एक अलग पहचान भी बनाई।

आज अनीता नेगी केवल एक किसान नहीं हैं, बल्कि एक प्रेरणा बन चुकी हैं, जो दूसरे किसानों को भी नई दिशा दिखा रही हैं।

जब चुनौती को बनाया अवसर

क़रीब 5 साल पहले जब प्रदेश में प्राकृतिक खेती की शुरुआत हुई, तब अनीता नेगी ने इसे एक चुनौती के रूप में लिया। शुरुआत में उनके लिए ये सब नया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और धीरे-धीरे इस पद्धति को समझना शुरू किया। उन्होंने महसूस किया कि अगर खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाना है, तो प्राकृतिक खेती एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

प्रशिक्षण से मिली नई दिशा

अनीता नेगी ने साल 2018 में बंजार में आयोजित एक जागरूकता शिविर में भाग लिया। इस शिविर ने उनके अंदर प्राकृतिक खेती के प्रति रुचि बढ़ाई। इसके बाद उन्होंने गाजियाबाद जाकर इस पद्धति का प्रशिक्षण लिया।

प्रशिक्षण से लौटने के बाद उन्होंने अपने खेतों में प्रयोग शुरू किए और घर पर ही प्राकृतिक इनपुट्स तैयार करने लगीं। उनका कहना है कि प्रशिक्षण के बाद उन्हें सही दिशा मिली और परिणाम भी अच्छे आने लगे।

अनीता नेगी ने प्राकृतिक खेती से बंजर ज़मीन को बनाया उपजाऊ और खड़ा किया सफल मॉडल

मिट्टी की सेहत में आया बड़ा बदलाव

जब अनीता नेगी ने अपने खेतों में प्राकृतिक खेती को अपनाया, तो सबसे पहले उन्होंने मिट्टी में बदलाव महसूस किया। पहले जहां मिट्टी कमज़ोर और बंजर जैसी लगती थी, वहीं अब वह उपजाऊ और नरम हो गई।

प्राकृतिक इनपुट्स के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार हुआ और फ़सलों को बेहतर पोषण मिलने लगा।

फल और सब्ज़ियों में बढ़िया परिणाम

अनीता नेगी ने केवल सब्ज़ियों तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि फलों के पौधों में भी प्राकृतिक खेती अपनाई। उन्होंने सेब, अनार, नाशपाती आदि फलों के पौधों को भी प्राकृतिक तरीके से तैयार करना शुरू किया।

आज उनके पास लगभग 400 सेब के पौधों का बागान है, जिसमें वे लगातार प्राकृतिक खेती के तरीकों का उपयोग कर रही हैं। इससे फलों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और उत्पादन भी बेहतर हुआ है।

घर पर तैयार किए जाने वाले इनपुट्स

अनीता नेगी का मानना है कि प्राकृतिक खेती की सबसे बड़ी ख़ासियत ये है कि इसमें किसान को बाहर से कुछ खरीदने की ज़रूरत नहीं होती। वे अपने खेत में इस्तेमाल होने वाले सभी इनपुट्स घर पर ही तैयार करती हैं। इससे लागत कम होती है और खेती पूरी तरह आत्मनिर्भर बनती है।

परिवार और गांव का मिला साथ

शुरुआत में जहां कई लोगों को इस पद्धति पर संदेह था, वहीं अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। अनीता नेगी के साथ उनका बेटा भी प्राकृतिक खेती को अपना चुका है। इसके अलावा उनके गांव के क़रीब 11 किसान भी इस पद्धति को अपनाने लगे हैं। ये बदलाव दिखाता है कि जब एक किसान सफल होता है, तो दूसरे भी प्रेरित होते हैं।

राजनीति और खेती दोनों में सक्रिय

अनीता नेगी केवल खेती तक सीमित नहीं हैं। वे एक जनप्रतिनिधि के रूप में भी सक्रिय हैं और बीडीसी सदस्य रह चुकी हैं। इस कारण उनके घर पर अक्सर लोगों का आना-जाना लगा रहता है। वे इस मौके का उपयोग करके लोगों को प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी देती हैं और अपने खेतों का मॉडल भी दिखाती हैं।

अनीता नेगी ने प्राकृतिक खेती से बंजर ज़मीन को बनाया उपजाऊ और खड़ा किया सफल मॉडल

लोगों के लिए बना सीखने का केंद्र

आज अनीता नेगी का खेत एक मॉडल फ़ार्म बन चुका है, जहां लोग आकर इस पद्धति को समझते हैं। जो लोग पहले इस तरीके को लेकर संदेह में थे, वही अब इसे अपनाने के लिए उत्साहित हैं। लोग उनके खेतों को देखकर प्राकृतिक खेती को चमत्कारी तक कहने लगे हैं।

महिलाओं के लिए भी एक मज़बूत संदेश

अनीता नेगी की कहानी ये भी बताती है कि महिलाएं भी खेती में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। अगर उन्हें सही जानकारी और अवसर मिले, तो वे खेती को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती हैं।

उन्होंने ये साबित किया है कि प्राकृतिक खेती के जरिए महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं और समाज में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।

बदलती सोच की एक नई शुरुआत

अनीता नेगी का सफर ये दिखाता है कि खेती में बदलाव केवल तकनीक से नहीं, बल्कि सोच से आता है। उन्होंने बंजर ज़मीन को उपजाऊ बनाया और अपने अनुभव से ये साबित किया कि प्राकृतिक खेती एक टिकाऊ और प्रभावी तरीका है।

आज वे अपने क्षेत्र में बदलाव की एक मज़बूत आवाज बन चुकी हैं। उनकी ये पहल आने वाले समय में और भी किसानों को प्रेरित करती रहेगी, ताकि खेती को सुरक्षित, स्वस्थ और लाभकारी बनाया जा सके।

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