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एग्रीकल्चर से जुड़ा करियर विकल्प तलाशने वालों के लिए फूड प्रोसेसिंग एक अच्छा एग्री बिज़नेस साबित हो सकता है। प्रोसेसिंग से फल, सब्ज़ियों और अनाज की न सिर्फ़ सेल्फ़ लाइफ बढ़ती है, बल्कि कीमत भी कई गुणा बढ़ जाती है जिससे अच्छा मुनाफ़ा होता है। इस सेक्टर में मुनाफे़ को देखते हुए है HyFun कंपनी के MD, CEO हरेश करमचंदानी ने 2015 में एक प्रोसेसिंग कंपनी की नींव रखी, सिर्फ़ 10 साल में ही कंपनी का टर्नओवर करीब 1500 करोड़ का हो चुका है। आलू की प्रोसेसिंग के लिए वो किसानों के साथ कॉन्ट्रैक्ट फ़ार्मिंग कर रहे हैं, जिससे किसानों को भी फ़ायदा हुआ है। उन्हें बीज के लिए भटकना नहीं पड़ता और नही अपनी फसल के लिए बाज़ार तलाशने की ज़रूरत पड़ती है। हरेश कैसे कर रहे हैं आलू की प्रोसेसिंग और कैसे वो इसके ज़रिए हज़ारों किसानों से जुड़कर उन्हें भी फ़ायदा पहुंचा रहे हैं, ये जानने लिए उनसे विस्तार से चर्चा की किसान ऑफ़ इंडिया के संवाददाता सर्वेश बुंदेली ने।
HyFun 10 साल से कर रहे हैं आलू की प्रोसेसिंग
HyFun कंपनी के MD, CEO हरेश करमचंदानी ने 2015 में कंपनी की शुरुआत की। ये कंपनी आलू की प्रोसेसिंग करके इससे तरह-तरह के उत्पाद बनाती है जिसमें फ्रोजन फ्रेंच फ्राइस, आलू टिक्की, बर्गर टिक्की आदि शामिल है। वो कहते हैं कि उनके उत्पाद सिर्फ़ देश ही नहीं, बल्कि विदेश में भी खूब बिक रहे हैं। पिछले एक दशक में कंपनी ने खूब तरक्की की है और इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पहले साल में जहां कंपनी ने 10 हज़ार टन आलू प्रोसेस किया था, वहीं 10वें साल में 3.5 लाख टन आलू की प्रोसेसिंग हुई है। शुरुआत के पहले साल में कंपनी के साथ सिर्फ़ 200 किसान जुड़े थे जिनकी संख्या 10 साल में 7000 से अधिक हो गई है।
किसानों के साथ कॉन्ट्रैक्ट फ़ार्मिग
हरेश करमचंदानी कहते हैं कि किसी भी प्रोसेसिंग यूनिट के लिए कच्चे की माल यानी संबंधित फसल की निरंतर सप्लाई बहु आलू के किसानों के साथ एग्रीमेंट बेस्ड खेती करते हैं। वो बताते हैं कि इस अनुबंध खेती के तहत किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराये जाते है, फिर उन्हें किसानों को एग्रोनॉमी सपोर्ट दिया जाता है। यही नहीं कंपनी के अधिकारी खेत में जाकर किसानों का मार्गदर्शन करते हैं कि कैसे वो बेहतरीन गुणवत्ता वाला अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। आगे वो बताते हैं कि किसानों को बीज देते समय ही उनके साथ एक एग्रीमेंट किया जाता है जिसमें बाय बैक रेट यानी किस दर पर कंपनी उनसे फसल खरीदेगी, वह तय हो जाता है। ये कीमत तय करते समय ध्यान रखा जाता है कि उनकी लागत निकलने के बाद उन्हें 40-50 प्रतिशत का मुनाफ़ा हो। अच्छी बात ये है कि बाज़ार के उतार–चढ़ाव से ये प्रभावित नहीं होती है।
किसानों के लिए बनाया ऐप
HyFun कंपनी किसानों के साथ सीधे तौर पर काम करती है। कंपनी की एग्री टीम है जो किसानो से सीधे तौर पर मिलती है और उन्हें कंपनी की पॉलिसी और काम के बारे मे बताती है। इसके अलावा किसानों को सही तरीके से खेती करना है, खाद व कीटनाशकों का इस्तेमाल करना भी सिखाया जाता है। हरेश करमचंदानी कहते हैं कि कंपनी के साथ हज़ारों किसान जुड़े हैं तो उनके डेटा का रिकॉर्ड रखने के लिए कंपनी 4 साल पहले ही डिजीटल सेवा का इस्तेमाल कर रही है और अब तो Farmoji नाम से एक ऐप भी बन गया है। इसके ज़रिए बहुत सारे किसान कंपनी के जुड़े है। कंपनी बीज बुक करने से लेकर बीज की डिलीवरी, किसानों के सवालों के जवाब देने जैसे सभी काम इस ऐप के ज़रिए ही करती है।
किसानों को नई तकनीक की जानकारी
हरेश करमचंदानी कहते हैं कि हर दिन खेती में नई-नई तकनीक आ रही है जिन्हें वो अपने ऐप में सम्माहित करके किसानों तक ये सुविधा पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। जैसे PRECISION FARMING आजकल बहुत चलन में है। पहले अनुमान के आधार पर किसान खेती होती थी, जैसे कितनी सिंचाई करनी है ये अनुमान के आधार पर होता था, लेकिन अब कई IOD डिवाइस आ गई है जिससे पता चलता है कि कितनी मात्रा में सिंचाई करनी है। जैसे मिट्टी में एक सेंसर लगाया जाता है जिससे पता चलता है कि कितने पानी की ज़ररूत इस तरह से पानी की तो बचत होती ही है, साथ ही खाद की भी बचत होती है, क्योंकि अधिक पानी देने से खाद बह जाता है। इतना ही नहीं कंपनी उन किसानो को ऐप चलाने की ट्रेनिंग भी देती हैं, जिन्हें ऐप का इस्तेमाल करना नहीं आता है।
किसानों को जागरुक बनाना
HyFun कंपनी किसानों को जागरुक करने का भी काम करती है। कंपनी के MD हरेश करमचंदानी कहते हैं कि वो ट्रेनिंग वर्कशॉप आयोजित करते है किसानों के लिए। यही नहीं पिछले 3 सालों से अपने जागरुकता अभियान को उन्होंने HyFarm पाठशाला नाम दिया है। जिसमें किसानों को जोड़ा गया है। इस पाठशाला से जुड़े किसान अपने खेत को डेमो फार्म के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति देते है, तो इसका फ़ायदा ये होता है कि वहां जो भी एक्सपेरिमेंट होते हैं उसे उस क्षेत्र के 300-400 किसान देख पाते हैं।
फूड प्रोसेसिंग बिज़नेस की चुनौतियां
हरेश करमचंदानी का मानना है कि फूड प्रोसेसिंग में प्रोडक्ट की क्वालिटी बहुत महत्वपूर्ण होती है। उनके लिए कच्चा माल आलू है, तो वो हमेशा इसकी क्वालिटी को सुनिश्चित करते हैं। इसके अलावा जब आलू प्रोसेसिंग प्लांट में जाता है, तो यह देखन होता है कि वहां किस तरह की कंडिशन है, कैसे हाइजीन मेंटेन होता है, कैसे फूड सेफ्टी नियमों का पालन किया जाता है ये सब सुनिश्चित करना बेहद ज़रूरी है। क्योंकि जब ग्राहकों को अच्छी गुणवत्ता का उत्पाद मिलेगा तभी वो दोबारा इसे खरीदेंगे।
कितना है टर्नओवर?
हरेश बताते हैं कि 2015 में पहले साल कंपनी ने 50 करोड़ की बिक्री की थी। जबकि 7वें साल में 100 करोड़ का टर्नओवर था और ये 10वां साल चल रहा है, तो करीब 1500 करोड़ की बिक्री का अनुमान है। हरेश का मानना है कि इस इंडस्ट्री में काफी ग्रोथ है और खफत भी अच्छी है। जहां तक उत्पादन का सवाल है तो भारत आलू के उत्पादन में विश्व में दूसरे नंबर पर है। ऐसे में उनकी योजना अपने काम को और बढ़ाने की है और 2028 में वो अपना IPO लाने की भी योजना बना रहे हैं।
हरेश करमचंदानी का मानना है कि हमारे देश में कई चीज़ों का उत्पादन बहुत अधिक होती है जिससे फूड प्रोसेसिंग युवाओं के लिए अच्छा विकल्प बन सकता है, जैसे उन्होंने आलू की प्रोसेसिंग से सफ़ल बिज़नेस खड़ा किया, वैसे ही युवा किसी दूसरी फसल के मूल्य संवर्धन या प्रोसेसिंग का बिज़नेस शुरू कर सकते हैं।

