High-tech spawn lab बनाने वाली छत्तीसगढ़ की नम्रता के Mushroom Madam बनने की कहानी

नम्रता यदु बताती हैं कि मशरूम के बीज का माइसीलिया तैयार करने के लिए भोजन के रूप में गेहूं के दानों का इस्तेमाल होता है। कोई चाहे तो ज्वार और बाजरा का भी उपयोग कर सकता है।

High-tech spawn lab: मशरूम उत्पादन तो व्यवसाय का एक अच्छा विकल्प है ही, साथ ही इसका स्पॉन बनाकर भी अच्छी कमाई की जा सकती है। छत्तीसगढ़ के तेंदुआ गांव की रहने वाली नम्रता  पिछले 30 सालों से मशरूम उत्पादन से जुड़ी हुई हैं और वो हर तरह के मशरूम की खेती करती हैं, मगर इसके साथ ही वो बेहतरीन किस्म का स्पॉन भी बना रही हैं, जिसकी मार्केट में काफी डिमांड है। दरअसल, मशरूम उत्पादन के शुरुआती दैर में उन्हें स्पॉन की समस्या का सामना करना पड़ा। बस यहीं से उन्हें खुद ही स्पॉन तैयार करने का आइडिया मिला, अब वो अपने हाईटेक मशरूम लैब में बेहतरीन गुणवत्ता वाला स्पॉन तैयार करती हैं। वो ब्लू ऑयस्टर और पिंक ऑयस्टर जैसे मशरूम का स्पॉन तैयार किया जाता है। क्या है स्पॉन तैयार करने की प्रक्रिया और कितनी है मेहनत इस काम में, जानने के लिए किसान ऑफ़ इंडिया के संववाददाता सर्वेश बुंदेली ने बात की नम्रता युद से।

स्पॉन तैयार करने की प्रक्रिया

नम्रता यदु बताती हैं कि मशरूम के बीज का माइसीलिया तैयार करने के लिए भोजन के रूप में गेहूं के दानों का इस्तेमाल होता है। कोई चाहे तो ज्वार और बाजरा का भी उपयोग कर सकता है। स्पॉन तैयार करने की प्रक्रिया में सबसे पहले तो गेहूं को थोड़ी देर भिगोने के बाद उबालते हैं, उबालने के बाद पूरा पानी निकालकर इसे ठंडा किया जाता है। फिर इसमें 2 प्रतिशत कैल्शियम कार्बोनेट, (गीले गेहूं के वज़न के 2 प्रतिशत के बराबर) मिलाकर पैकेट बनाया जाता है, जो आधा/एक किलो का होता है। फिर कॉटन प्लग लगाते हैं और उसके बाद Electric Autoclave में इन पैकेट्स को Sterilize किया जाता है। इसके लिए 121 डिग्री तापमान और 15 पॉइंट के प्रेशर पर इन्हें 2 से 2.5 घंटे तक पकाते हैं। ऑटोक्लेव में एक बार में 40-42 पैकेट रखे जा सकते हैं और इसे 2 से 2.5 घंटे बाद निकाल लिया जाता है। फिर एक दिन ऑटो क्लेव को ठंडा किया जाता है और अगले दिन दोबारा उपयोग में लाया जाता है। नम्रता आगे बताती हैं कि ऑटोक्लेविंग का मतलब है निर्जिविकरण यानी गेंहूं के दानों में कोई दूसरा जीव नहीं होना चाहिए।

क्यों मिलाते हैं कैल्शियम?

कैल्शियम मिलाने की वजह के बारे में नम्रता कहती हैं कि गेहूं के दाने जब पैक किए जाते हैं तो वो  अलग-अलग रहने चाहिए। अगर इन्हें बिना कैल्शियम कार्बोनेट के यूं ही रखा जाएगा, तो ये चावल की तरह पक जाएंगे। यही नहीं कैल्शियम मिलाने की दूसरी वजह भी है और वो है स्पॉन का पीएच मेंटेन करना। पीएच न्यूट्रल रखना ज़रूरी होता है, इसे एसिडिक नहीं होने देना चाहिए।

टिश्यू कल्चर तकनीक से मदर स्पॉन

बेहतरीन गुणवत्ता वाला स्पॉन तैयार करने के लिए नम्रता पहले अपने हाईटेक लैब में टिश्यू कल्चर तकनीक से मदर स्पॉन बनाती हैं। मदर स्पॉन तैयार होने के बाद अनाज के पैकेट में थोड़ा-थोड़ा मदर स्पॉन डालकर मिक्स करती हैं और पैकेट को स्टेपल कर देती हैं। इसके बाद इन पैकेट्स को एक दूसरे रूम में रखा जाता है जिसे इनक्यूबेशन कहते हैं। जो माइसिलिया पैकेट में डाला गया है वो इनक्यूबेशन रूम में स्प्रेड होगा और ये कमर्शियल स्पॉन तैयार हो जाएगा। नम्रता बताती हैं कि लैब में काम पूरे साल चलता है। वो बटन मशरूम, ऑयस्टर की कई किस्मों, मिल्की और और पैडी स्ट्रॉ मशरूम का भी स्पॉन बनाती हैं। इसके अलावा रिसर्च के स्टुडेंट्स के लिए वो भी दूसरी किस्म के मशरूम का कल्चर बनाती हैं।

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