IIT Mandi की पहल: गौवंश के गोबर से बनेगी बिजली, तैयार हो रहा बायोगैस प्लांट

इस परियोजना के तहत संस्थान 20 किलोवाट क्षमता का बाय गैस आधारित पावर प्लांट स्थापित करने की योजना बना रहा है। इस प्लांट की स्थापना का पूरा खर्च संस्थान स्वयं वहन करेगा।

देशभर में शहरों से लेकर गांवों तक सड़कों पर बेसहारा गौवंश की बढ़ती संख्या एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। इससे न केवल यातायात प्रभावित होता है, बल्कि पशुओं की सुरक्षा और पर्यावरण पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। ऐसे में Indian Institute of Technology Mandi ने इस चुनौती का एक अभिनव और टिकाऊ समाधान दिया है।

गौवंश को संरक्षण देने की पहल

हिमाचल प्रदेश के मंडी ज़िले के कमांद गांव में स्थित इस संस्थान ने बेसहारा गौवंश को अपने परिसर में सुरक्षित आश्रय देना शुरू किया है। संस्थान अब तक करीब 40 गायों को शेल्टर प्रदान कर चुका है और आने वाले समय में इस संख्या को और बढ़ाने की योजना है। यह पहल न केवल पशु कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज के प्रति संस्थान की जिम्मेदारी को भी दर्शाती है। सड़कों पर भटकते पशुओं को सुरक्षित स्थान मिलने से दुर्घटनाओं में भी कमी आ सकती है।

गोबर से बायोगैस और ऊर्जा उत्पादन

इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि संस्थान गोबर को ऊर्जा में बदलने की दिशा में काम कर रहा है। संस्थान के निदेशक Laxmidhar Behera के अनुसार, गोबर से पहले बायोगैस तैयार की जाएगी। इसके बाद इस बायोगैस से मीथेन गैस को अलग किया जाएगा और फिर उससे हाइड्रोजन फ्यूल तैयार किया जाएगा। अंततः इस हाइड्रोजन को ऊर्जा में परिवर्तित किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

20 किलोवाट क्षमता का पावर प्लांट

इस परियोजना के तहत संस्थान 20 किलोवाट क्षमता का बाय गैस आधारित पावर प्लांट स्थापित करने की योजना बना रहा है। इस प्लांट की स्थापना का पूरा खर्च संस्थान स्वयं वहन करेगा। इसके अलावा, संस्थान अपने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से भी गैस उत्पादन की संभावनाओं पर काम कर रहा है, जिससे ऊर्जा उत्पादन के स्रोत और भी मजबूत हो सकें।

स्थानीय पशुपालकों से सहयोग

गोबर की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए संस्थान आसपास के पशुपालकों से भी गोबर खरीदेगा। इससे स्थानीय लोगों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा और यह पहल एक सामुदायिक मॉडल के रूप में भी विकसित हो सकेगी। इस तरह यह परियोजना केवल तकनीकी समाधान नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सहयोग का भी उदाहरण बन रही है।

आत्मनिर्भरता और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में कदम

इस पहल से Indian Institute of Technology Mandi को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। साथ ही, भविष्य में इस ऊर्जा को मंडी शहर तक पहुंचाने की योजना भी बनाई जा रही है, जिससे शहर को स्वच्छ और सतत ऊर्जा का स्रोत मिल सकेगा। यह मॉडल अगर सफल होता है, तो देश के अन्य हिस्सों में भी इसे अपनाया जा सकता है।

पर्यावरण और समाज के लिए दोहरा लाभ

आईआईटी मंडी की यह पहल कई मायनों में सराहनीय है। एक ओर जहां बेसहारा गौवंश को सुरक्षित आश्रय मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण और वैकल्पिक ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है। यह पहल दिखाती है कि सही सोच और तकनीक के मेल से जटिल समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। आने वाले समय में यह मॉडल देशभर के लिए एक प्रेरणा बन सकता है।

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