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उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के ग्रामीण इलाकों की तस्वीर तेजी से बदल रही है। जो किसान कभी रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर थे, वे आज अपने ही गांव में मजबूत कमाई का ज़रिया खड़ा कर रहे हैं। खेती के साथ पशुपालन ने ग्रामीणों की आमदनी में ज़बरदस्त इजाफ़ा किया है।
दूध में ताकत: UP बना Milk Production में Number-1
दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के. के अनुसार, साल 2024-25 में भारत 248 मिलियन मीट्रिक टन दुग्ध उत्पादन (Milk Production) के साथ दुनिया का का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है।
इसमें उत्तर प्रदेश का योगदान लगभग 38.8 मिलियन मीट्रिक टन है, जो देश के कुल उत्पादन का 16 फीसदी है। यूपी देश में दूध उत्पादन में नंबर वन बना है। ये उपलब्धि प्रदेश के किसानों की मेहनत और सरकारी योजनाओं का नतीजा है। डेयरी क्षेत्र आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण और रोज़गार का मज़बूत ज़रिया बन गया है।
सरकारी योजनाओं का कमाल
नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत
- 17,994 Beneficiaries को अलग-अलग स्कीम से जोड़ा गया
- 4,951 शुरूआती Dairy cooperative societies का गठन हुआ
- लगभग 2.25 लाख Direct and indirect employment डेवलप हुए
नई योजनाओं का शुभारंभ
1.2100 मुख्यमंत्री स्वदेशी गो-संवर्धन योजना
2.1500+ मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना
3.450+ नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना के लाभार्थी चयनित
28,000 करोड़ के निवेश से नए अवसर
प्रदेश में डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 829 MoU किए गए हैं, जिनका मूल्य 28,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा है।
उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति-2022 के प्रभाव से-
:-39 लाख लीटर डेली Milk processing capacity बढ़ी
:-लगभग 10,000 नए रोजगार डेवलप हुए
:-निवेशकों को 42 करोड़ रुपये का अनुदान DBT के ज़रिये से दिया गया
आत्मनिर्भरता की ओर कदम
प्रदेश में बड़े पैमाने पर पशुपालन, बेहतर डेयरी ढांचा और किसानों की एक्टिव भागदारी मिल्क प्रोडक्शन को नई ऊंचाइयां दे रही है। ये बदलाव न सिर्फ आर्थिक समृद्धि ला रहा है, बल्कि ग्रामीणों को आत्मनिर्भर भी बना रहा है।
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