India-Russia Urea Plant : किसानों को मिलेगी सस्ती खाद, 20,000 करोड़ का बड़ा प्रोजेक्ट

India-Russia Urea Plant- करीब 20,000 करोड़ रुपये लगाकर ये प्लांट बनाया जा रहा है। हर साल ये प्लांट 20 लाख टन यूरिया बनाएगा। यानी लाखों किसानों को सस्ता और समय पर खाद मिलेगा।

किसानों के लिए एक बहुत बड़ी राहत वाली ख़बर आई है। भारत और रूस (India-Russia Urea Plant) मिलकर इतना बड़ा यूरिया प्लांट बना रहे हैं कि देश को महंगा खाद बाहर से मंगवाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। चलिए, समझते हैं ये ख़बर आपके लिए क्यों ज़रूरी है।

20,000 करोड़ का दिग्गज प्रोजेक्ट

हां, आपने सही पढ़ा। करीब 20,000 करोड़ रुपये लगाकर ये प्लांट बनाया जा रहा है। हर साल ये प्लांट 20 लाख टन यूरिया बनाएगा। यानी लाखों किसानों को सस्ता और समय पर खाद मिलेगा।

प्लांट रूस में, फायदा भारत को

ये प्लांट रूस के टोग्लियाट्टी शहर में बनेगा। वहां बनने वाला पूरा यूरिया भारत लाया जाएगा। क्यों? क्योंकि भारत को हर साल करीब 40 मिलियन टन यूरिया चाहिए, लेकिन देश में सिर्फ 30 मिलियन टन बन पाता है। बाकी का महंगा दाम चुकाकर आयात करना पड़ता है।

किन कंपनियों की है साझेदारी?

भारत की तीन सरकारी कंपनियां —

  • इंडियन पोटाश लिमिटेड (Indian Potash Limited)
  • राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स (Rashtriya Chemicals and Fertilizers)
  • नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (National Fertilizers Limited)

और रूस की कंपनी यूरालकेम (Uralchem) मिलकर यह प्रोजेक्ट कर रही हैं। ये 50-50 की पार्टनरशिप है।

कितना बड़ा समझौता था?

ये समझौता 4 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में हुआ था। उस वक्त नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन खुद मौजूद थे। इतनी बड़ी साझेदारी का मतलब है कि अब किसानों को फसल के समय खाद के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़ेगा।

सिर्फ दो साल में होगा तैयार

बताया जा रहा है कि ये प्लांट अगले दो साल में तैयार हो सकता है। अगले 1-2 महीने में इसका भूमिपूजन होने वाला है। यानी बहुत जल्द काम शुरू हो जाएगा।

किसानों को कैसे होगा फायदा?

1.सस्ता यूरिया- बाहर से आयात की तुलना में कम दाम

2.समय पर खाद-फसल के समय रुकावट नहीं

3.ज्यादा पैदावार- सही खाद मिलेगी तो फसल बेहतर होगी

4.कमाई बढ़ेगी-अच्छी फसल यानि अच्छी आमदनी

क्यों जरूरी है ये प्रोजेक्ट?

आज वेस्ट एशिया में तनाव के कारण खाद की कीमतें आसमान छू रही हैं। रूस, अल्जीरिया, नाइजीरिया से 935 से 959 डॉलर प्रति टन के हिसाब से यूरिया आयात करना पड़ रहा है। ये प्लांट बनने के बाद आयात पर निर्भरता कम होगी और महंगे दामों से राहत मिलेगी।

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