प्राकृतिक खेती से प्रवीण कुमार ने बदली खेती की राह, कम ख़र्च में उगा रहे बेहतर सब्ज़ियां

प्रवीण कुमार ने प्राकृतिक खेती अपनाकर खेती का ख़र्च घटाया और बिना रसायनों के सब्ज़ियां उगाकर दूसरे किसानों के लिए मिसाल पेश की।

खेती में लागत बढ़ने के कारण किसानों के लिए अच्छा मुनाफ़ा कमाना आसान नहीं रह गया है। खाद, कीटनाशक और दूसरी ज़रूरतों पर होने वाला ख़र्च किसानों की कमाई का बड़ा हिस्सा ले लेता है। ऐसे में हिमाचल प्रदेश के किसान प्रवीण कुमार ने प्राकृतिक खेती को अपनाकर एक नई राह चुनी है। वह 12 बीघा ज़मीन पर खेती कर रहे हैं, जिसमें से 3 बीघा में उन्होंने प्राकृतिक खेती का मॉडल तैयार किया है। इस तरीके से उन्हें खेती का ख़र्च कम करने और अच्छी गुणवत्ता वाली सब्ज़ियां उगाने में मदद मिली है।

प्रवीण कुमार की कहानी उन किसानों के लिए प्रेरणा है, जो कम लागत में खेती करना चाहते हैं और रसायनों पर अपनी निर्भरता घटाने की सोच रहे हैं।

नौकरी के बजाय खेती में कुछ नया करने का फैसला

प्रवीण कुमार खेती को केवल परंपरागत तरीके से करने के बजाय इसमें नए प्रयोग करना चाहते थे। समय और बाज़ार की ज़रूरतों को समझते हुए उन्होंने खेती की लागत कम करने पर ध्यान दिया। इसी सोच के साथ उन्होंने प्राकृतिक खेती को अपनाया और धीरे-धीरे अपने खेत में इस तरीके का इस्तेमाल बढ़ाने लगे।

आज वह कुल 12 बीघा ज़मीन पर मिश्रित खेती कर रहे हैं। इसमें 3 बीघा ज़मीन पर प्राकृतिक खेती के जरिए अलग-अलग फ़सलें उगाई जा रही हैं। उनका उद्देश्य ऐसा खेती मॉडल तैयार करना है, जिसे दूसरे किसान भी आसानी से अपना सकें।

2011 से शुरू हुआ खेती में नए प्रयोगों का सफर

प्रवीण कुमार को साल 2011 में कृषि क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के प्रयासों से जुड़ने और नए तरीके सीखने का मौक़ा मिला। इसके बाद उन्होंने अपने खेतों में अलग-अलग फ़सलों और खेती के तरीकों पर प्रयोग करना शुरू किया।

वह मक्का, सोयाबीन, अरहर, घिया और टमाटर जैसी फ़सलें उगाते हैं। इसके अलावा खेत में दूसरी सब्ज़ियों की खेती भी करते हैं। प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद उनका ज़ोर इस बात पर रहा कि खेत में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो और खेती पर होने वाला ख़र्च कम किया जा सके।

उनके मुताबिक, प्राकृतिक खेती में बाज़ार से कई चीजें खरीदने की ज़रूरत कम हो जाती है। इससे खेती की लागत घटाने में मदद मिलती है। साथ ही, खेत में अलग-अलग फ़सलें उगाने से उन्हें अपनी खेती में नए प्रयोग करने का मौक़ा भी मिलता है।

प्राकृतिक खेती से प्रवीण कुमार ने बदली खेती की राह, कम ख़र्च में उगा रहे बेहतर सब्ज़ियां

प्राकृतिक खेती से कम हुआ ख़र्च

प्रवीण कुमार के खेती मॉडल की खास बात इसकी कम लागत है। उनकी 3 बीघा प्राकृतिक खेती वाली ज़मीन पर सालाना ख़र्च करीब 5,000 रुपये है। वहीं, रासायनिक तरीके से की जाने वाली खेती में उनका ख़र्च करीब 50,000 रुपये था। इन आंकड़ों से उनके प्राकृतिक खेती मॉडल में कम ख़र्च के साथ बेहतर आय की संभावना दिखाई देती है।

हालांकि, खेती की लागत और कमाई फ़सल, मौसम, उत्पादन और बाज़ार के भाव के हिसाब से बदल सकती है। इसलिए दूसरे किसानों के लिए इस मॉडल को अपनाते समय अपनी ज़मीन और स्थानीय परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना ज़रूरी है।

सब्ज़ियों की गुणवत्ता पर भी दिया ध्यान

प्रवीण कुमार बताते हैं कि आसपास के कई किसान रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं। इसके बावजूद कई बार फ़सलों में बीमारी और पैदावार से जुड़ी समस्याएं देखने को मिलती हैं। उनके खेतों में प्राकृतिक खेती के जरिए उगाई गई सब्ज़ियों में उन्हें बेहतर परिणाम देखने को मिले हैं।

वह मक्का, टमाटर, सोयाबीन, घिया, गोभी, चना, भिंडी, मटर, करेला और दूसरी फ़सलें उगाते हैं। अलग-अलग फ़सलें उगाने से उनके खेत में मिश्रित खेती का मॉडल तैयार हुआ है। इससे उन्हें केवल एक फ़सल पर निर्भर रहने के बजाय कई तरह की उपज लेने का मौक़ा मिलता है।

प्राकृतिक खेती में उनका ध्यान मिट्टी और फ़सलों की सेहत को बेहतर बनाए रखने पर भी है। उनका मानना है कि खेती में ऐसे तरीकों को अपनाना चाहिए, जिनसे किसानों का ख़र्च कम हो और उन्हें अच्छी उपज मिल सके।

प्राकृतिक खेती से प्रवीण कुमार ने बदली खेती की राह, कम ख़र्च में उगा रहे बेहतर सब्ज़ियां

दूसरे किसानों को भी कर रहे हैं प्रेरित

प्रवीण कुमार केवल अपने खेत तक ही सीमित नहीं हैं। वह चाहते हैं कि दूसरे किसान भी प्राकृतिक खेती के फ़ायदों को समझें और इसे अपनाने के लिए आगे आएं। उनके खेत में तैयार मॉडल को देखकर आसपास के किसान भी इस तरीके के बारे में जानकारी ले सकते हैं।

उनकी कोशिश है कि किसान खेती में बिना ज़रूरत के ज़्यादा ख़र्च करने से बचें और अपने पास उपलब्ध संसाधनों का सही इस्तेमाल करें। प्राकृतिक खेती के जरिए कम लागत में सब्ज़ियां उगाने का उनका अनुभव दूसरे किसानों को भी नए तरीके आजमाने के लिए प्रेरित कर सकता है।

कम लागत वाली खेती की ओर एक कदम

प्रवीण कुमार की कहानी बताती है कि खेती में बदलाव लाने के लिए बड़े निवेश के साथ-साथ सही तरीके चुनना भी ज़रूरी है। उन्होंने अपनी 12 बीघा ज़मीन में से 3 बीघा पर प्राकृतिक खेती का मॉडल तैयार करके कम लागत में खेती करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

उनका अनुभव दिखाता है कि प्राकृतिक खेती किसानों को खेती के ख़र्च पर ध्यान देने, अलग-अलग फ़सलें उगाने और अपनी उपज की गुणवत्ता सुधारने का रास्ता दे सकती है। अगर किसान अपनी ज़मीन, उपलब्ध संसाधनों और बाज़ार की ज़रूरतों को समझकर इस दिशा में काम करें, तो खेती को ज़्यादा टिकाऊ बनाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

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