DeHaat- Agritech startup , जो किसानों को एक ही जगह पर दे रहा है बीज से बाज़ार तक की सुविधा

हमारे देश में दूर-दराज के इलाकों के किसानों को आज भी मिट्टी की जांच, अच्छी क्वालिटी के खाद और बीज के लिए अलग-अलग जगहों पर भटकना पड़ता है। किसानों की इन्हीं समस्यों का हल है DeHaat के पास है।

DeHaat- Agritech startup: वो दिन गए जब कृषि क्षेत्र में करियर बनाने की बात सुनकर ही लोगों की भौंहे चढ़ जाती थी, क्योंकि उनके लिए कृषि का मतलब था, खेत में सिर्फ़ फसल उगाना। मगर बदलते वक़्त ने कृषि को इतना व्यापक बना दिया है कि इसमें करियर की अपार संभावनाएं युवाओं के लिए नज़र आ रही है। बिहार के ऐसे ही कुछ युवाओं ने कृषि को नई दिशा देने के लिए DeHaat शरू किया। ये एक एग्रीटेक स्टार्टअप है, जो किसानों को बीज से बाज़ार तक की सारी सुविधाएं एक ही छत के नीचे मुहैया कराता है। 2012 में शुरू हुआ ये स्टार्टअप भारत के एग्रीटेक सेक्टर में अपनी अलग पहचान बना चुका है। DeHaat के को-फाउंडर अमरेंद्र सिंह ने किसान ऑफ़ इंडिया की संवाददाता प्रियंका शर्मा से ख़ास बातचीत में अपनी इस अनोखी पल के बारे में कई जानकारी साझा की और बताया कि कैसे किसानों को खेती की सलाह से लेकर फसल बेचने तक सब कुछ एक ही प्लेटफॉर्म पर कैसे मिलता है। वो Remote sensing, Physical और Digital Demonstration और Model DeHaat सेंटर के ज़रिए किसानों तक नई तकनीक पहुंचा रहे हैं।

एक ही स्थान पर किसानों की हर समस्या का हल

हमारे देश में दूर-दराज के इलाकों के किसानों को आज भी मिट्टी की जांच, अच्छी क्वालिटी के खाद और बीज के लिए अलग-अलग जगहों पर भटकना पड़ता है। किसानों की इन्हीं समस्यों का हल है DeHaat के पास है। कंपनी के को-फाउंडर अमरेंद्र सिंह बताते हैं कि DeHaat अब तो पूरा एक सिस्टम बन चुका है जो आधुनिक तकनीक और डेटा के ज़रिए किसानों की ज़िंदगी बदल रहा है। वो कहते हैं कि इसकी शुरुआत 2011-12 में हुई। इसे शुरू करने से पहले अमरेंद्र और उनकी टीम बिहार के करीब 25-30 हज़ार किसानों से मिले, तो उन्होंने देखा कि हर किसान खेती से जुड़ी किसी न किसी समस्या से जूझ रहा था, किसी को मिट्टी की जांच कराने के लिए सही जगह की तलाश थी, तो किसी को अच्छे बीज कहां से ले ये पता नहीं होता था, तो कोई श्रम की कमी की समस्या से जूझ रहा था। इन सब समस्यों को देखने के बाद ही उनकी टीम को इस बिज़नेस मॉडल का आइडिया आया कि क्यों न एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया जाए जहां किसानों की हर समस्या को समझने के साथ ही उसका समाधान भी दिया जाएगा। इस प्लेटफॉर्म पर पहले किसानों को समझा जाता है कि उनका खेत कैसा है, निवेश क्षमता कितनी है, किस चीज़ की खेती करते हैं आदि। इसके अलावा उनकी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए जितने ज़्यादा पार्टनर को इस प्लेटफॉर्म पर ला सके, ला रहे हैं। यहां किसानों को बीज से बाज़ार तक की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इसे आप एग्री मॉल समझ सकते हैं, जहां एक ही छत के नीचे सबकुछ मिल जाता है।

मकसद है किसानों की मदद

अमरेंद्र कहते हैं कि उनके स्टार्टअप का मकसद है किसानों की मदद करना ताकि उनकी आमदनी में इज़ाफा हो और उन्हें संसाधनों के लिए इधऱ-उधर भटकर अपना समय न बर्बाद करना पड़े। वो बताते हैं कि हमारे देश के 50 फ़ीसदी किसान खेती की सारी ज़रूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर है और सारे संसाधनों को जोड़ने और मैनेज करने में उनका बहुत समय और ऊर्जा बर्बाद होती है। DeHaat की बदौलत अब किसानों की समय और ऊर्जा की बचत हो रही है, क्योंकि इस प्लेटफॉर्म पर उन्हें सही समय पर सही जानकारी मिलने के साथ ही सारी सुविधाएं भी मिल रही हैं। चाहे मिट्टी की जांच करानी हो, कीटनाशक या बीज लेना हो या फसल का बीमा करना हो, सब कुछ बस एक छत के नीचे। आगे अमरेंद्र कहते हैं कि अपने मकसद को पूरा करने का काम DeHaat अकेले नहीं कर सकता, इसलिए उनकी कोशिश रहती है कि कैसे एलग-अलग एग्रीबिज़नेस और इनोवेशन करने वाले लोगों को एक प्लेटफॉर्म पर लाया जाए, ताकि एक बड़ा इको-सिस्टम बन सके। DeHaat के पूरे देश में 12500 से अधिक सेंटर है।

किसानों की ज़िदगी में क्या बदलाव हुए?

अमरेंद्र कहते हैं कि पहले किसानों को ये पता नहीं होता था कि मिट्टी की जांच के लिए कहां जाना है, उन्हें लैब तलाशना पड़ता था। अच्छे बीज और खाद के लिए 4-5 दुकानों में भटकना पड़ता था। साथ ही उन्हें फसल बीमा के बारे में भी जानकारी नहीं थी। मगर अब DeHaat की मदद से उन्हें मिट्टी की जांच के लिए न तो लैब तलाशने की ज़रूरत है न ही बीज-खाद के लिए दुकान-दुकान भटकने की और तो और यहां उन्हें बीमा के साथ ही खेती से जुड़ी और भी नई चीज़ों के बारे में जानकारी दी जाती है, जिससे किसान जागरुक बनता है। अमरेंद्र का मानना है कि अगर खेती में समय पर सारी ज़रूरतें पूरी हो जाए तो किसानों को 20-25 प्रतिशत का मुनाफ़ा होना तो तय है।

DeHaat हर वैल्यू चेन में है

DeHaat न सिर्फ़ किसानों को सारे संसाधन एक जगह पर उपलब्ध करा रहा है, बल्कि वो खेती के हर वैल्यू चेन में उनकी मदद कर रहा है। वो बुवाई से लेकर कटाई तक के चरण में किसानों की मदद करता है। अमरेंद्र बताते हैं कि वो किसानों को कौन सी फसल लगानी चाहिए इसकी सलाह भी देते है जैसे एक जगह बारिश में अंगूर की काफी फसल बर्बाद हो गई थी, तो उन्होंने वहां के किसानों को अंगूर की नई वैरायटी के बारे में बताया जो बारिश में भी अच्छी फसल देती है। इसी तरह अलग-अलग फसल के बारे में बताते हैं, साथ ही डेयरी बिज़नेस से जुड़ी रोजमर्रा की जानकारी भी किसानों को दी जाती है।

AI का इस्तेमाल

अमरेंद्र का कहना है कि हर किसान यूनिक है, हर खेत, गांव और जिला यूनिक है। तो अगर हर गांव और किसान की समस्या का समाधान करना है तो बिना डेटा कलेक्ट किए वो नहीं हो सकता। इसके लिए और सप्लाई चेन को बड़ा बनाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल ज़रूरी है। DeHaat मौसम के पैटर्न, मिट्टी की सेहत, फसल की वृद्धि और बाज़ार के ट्रेंड आदि की जानकारी के लिए AI से मिले डेटा कि विश्लेषण करता है और फिर किसानों को सही सलाह देता है।

खेती की चुनौतियां

अमरेंद्र आने वाले समय में खेती की चुनौतियों का ज़िक्र करते हुए कहते हैं कि पानी की कमी है, मिट्टी की खराब होती सेहत और जलवायु परिवर्तन की वजह से लोगों की खेती में रुची कम हो रही है और आने वाले समय में स्थिति और विकट हो सकती है। इन सारी चुनौतियां से निपटने के लिए अलग और नई सोच की ज़रूरत है। उनकी कंपनी फिलहाल इस दिशा में काम कर रही है। जैसे वो बायोटेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं ताकि पोषक तत्व से भरपूर वैरायटी मिल सके, मिट्टी की सेहत में कैसे सुधार लाया जा सकता है, इस दिश में भी काम चल रहा है। साथ ही लेबर की समस्या से निपटने के लिए रोबोट और मशीनों पर भी काम चल रहा है, ताकि ये खेती को और आसान बना सके। उनका कहना है कि उनका अगला फोकस है एग्रीकल्चर साइंस में AI को लाना। वो लोग प्री सीज़न एग्रीकल्चर और Remote sensing टेक्नोलॉजी पर भी काम कर रहे हैं।

अमरेंद्र का मानना है कि एग्रीकल्चर सेक्टर में बहुत स्कोप है। अगर कोई सही तरीके से पूरी मेहनत और लगन के साथ कम से कम 10 साल का समय दें, तो 100 करोड़ का बिज़नेस आसानी से खड़ा कर सकता है।

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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