प्राकृतिक खेती से बचित्र सिंह चौहान ने बदली अपनी ज़िंदगी, नौकरी छोड़कर बने सफल किसान

बचित्र सिंह चौहान ने प्राकृतिक खेती अपनाकर खेती की लागत घटाई और अपने खेत को दूसरे किसानों के लिए सीखने का केंद्र बनाया।

हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के घुमारवीं विकासखंड के कसोल गांव के किसान बचित्र सिंह चौहान की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो खेती में कुछ नया करना चाहते हैं। कभी निजी कंपनी में नौकरी करने वाले बचित्र सिंह को लगा कि नौकरी से परिवार चलाना और भविष्य को बेहतर बनाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में उन्होंने खेती की ओर रुख किया और धीरे-धीरे प्राकृतिक खेती को अपनी पहचान बना लिया।

आज वह अपनी ज़मीन पर अलग-अलग फ़सलें उगा रहे हैं। उनका खेत अब सिर्फ़ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि दूसरे किसानों के लिए सीखने की जगह भी बन गया है। यहां किसान प्राकृतिक खेती के तरीकों और उनके नतीजों को क़रीब से समझ सकते हैं।

नौकरी छोड़कर खेती को बनाया अपना रास्ता

बचित्र सिंह पहले निजी क्षेत्र में नौकरी करते थे। लेकिन नौकरी से होने वाली कमाई से परिवार की ज़रूरतें पूरी करना उनके लिए आसान नहीं था। वह ऐसा काम करना चाहते थे, जिसमें मेहनत का बेहतर परिणाम मिले और अपने फैसले खुद लेने की आज़ादी भी हो।

इसी सोच के साथ उन्होंने खेती को गंभीरता से अपनाने का फैसला किया। शुरुआत में उनके लिए ये एक नया अनुभव था, लेकिन खेती के प्रति रुचि और कुछ अलग करने की इच्छा ने उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया।

साल 2016 में उन्होंने जैविक खेती शुरू की। क़रीब दो साल तक इस तरीके से काम करने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि जैविक खाद और कीटनाशकों पर होने वाला ख़र्च भी कम नहीं है। वह खेती की लागत को और घटाना चाहते थे। इसी तलाश ने उन्हें प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

प्रशिक्षण से मिली प्राकृतिक खेती की जानकारी

बचित्र सिंह को खंड स्तर के कृषि अधिकारियों से प्राकृतिक खेती के बारे में शुरुआती जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने इस तरीके को अच्छी तरह समझने के लिए प्रशिक्षण लेने का फैसला किया। वह कृषि विभाग के माध्यम से उत्तर प्रदेश के झांसी में आयोजित 6 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हुए। वहां से मिली जानकारी और व्यावहारिक सीख के बाद उन्होंने अपनी ज़मीन पर प्राकृतिक खेती के तरीकों को अपनाना शुरू किया।

शुरुआत में उन्होंने क़रीब 3 बीघा ज़मीन पर इस विधि से खेती की। धीरे-धीरे परिणाम अच्छे मिलने लगे, तो उनका भरोसा बढ़ा। अब उनके पास क़रीब 12.5 बीघा ज़मीन है, जिसमें वह प्राकृतिक खेती के तहत लगभग 7 बीघा क्षेत्र में खेती कर रहे हैं।

प्राकृतिक खेती से बचित्र सिंह चौहान ने बदली अपनी ज़िंदगी, नौकरी छोड़कर बने सफल किसान

कई फ़सलों को उगाकर तैयार किया मिश्रित खेती का मॉडल

बचित्र सिंह अपने खेत में केवल एक फ़सल पर निर्भर नहीं रहते। वह मक्का, सोयाबीन, अरहर, घिया, टमाटर, मटर, गोभी, चना और दूसरी मौसमी फ़सलें उगाते हैं। राजमाश, बैंगन और तोरी जैसी फ़सलें भी उनके खेती मॉडल का हिस्सा हैं।

प्राकृतिक खेती में वह जीवामृत और घनजीवामृत जैसे आदानों का इस्तेमाल करते हैं। उनके अनुसार, इस तरीके से उन्हें गेहूं, मटर, चना और सोयाबीन जैसी फ़सलों में अच्छे परिणाम मिले हैं। इसके अलावा सब्ज़ियों की खेती से भी उन्हें अपनी ज़मीन का बेहतर इस्तेमाल करने का मौक़ा मिला है।

मिश्रित खेती अपनाने से खेत में अलग-अलग फ़सलें उगाई जा सकती हैं। बचित्र सिंह का मॉडल इसी सोच पर आधारित है कि किसान अपनी ज़रूरत और ज़मीन के अनुसार फ़सलों का चुनाव करें और खेती के ख़र्च को संभालते हुए बेहतर उत्पादन पाने की कोशिश करें।

कम ख़र्च में बेहतर कमाई की कोशिश

बचित्र सिंह के खेती मॉडल में सबसे अहम बात लागत को कम रखना है। उनकी प्राकृतिक खेती वाली ज़मीन पर सालाना ख़र्च क़रीब 2,000 रुपये है। वहीं, रासायनिक खेती के लिए ख़र्च क़रीब 60,000 रुपये था। इन आंकड़ों से पता चलता है कि प्राकृतिक खेती में उनका ख़र्च काफ़ी कम है। हालांकि, खेती की कमाई मौसम, फ़सल, उत्पादन और बाजार के भाव के हिसाब से बदल सकती है। इसलिए हर किसान को अपने खेत की परिस्थितियों के अनुसार लागत और आमदनी का हिसाब रखना चाहिए।

बचित्र सिंह का अनुभव बताता है कि खेती में केवल उत्पादन बढ़ाना ही ज़रूरी नहीं, बल्कि उस उत्पादन पर आने वाले ख़र्च को समझना भी उतना ही ज़रूरी है। प्राकृतिक खेती के ज़रिए वह इसी दिशा में काम कर रहे हैं।

दूसरे किसानों के लिए बना सीखने का केंद्र

बचित्र सिंह ने अपने अनुभव को अपने तक सीमित नहीं रखा। उनका खेत किसानों के लिए मॉडल फार्म की तरह इस्तेमाल किया जाता है, जहां दूसरे किसान प्राकृतिक खेती के तरीकों को देखकर समझ सकते हैं।

वह चाहते हैं कि किसान केवल दूसरों की बात सुनकर ही नहीं, बल्कि खेत में जाकर इन तरीकों को देखें और उनके नतीजों को समझें। उनके खेत पर होने वाले प्रयोग दूसरे किसानों को अपनी ज़मीन पर नए तरीके अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं।

बचित्र सिंह का मानना है कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों के बीच जानकारी साझा करना ज़रूरी है। जब किसान एक-दूसरे के अनुभवों से सीखते हैं, तो उन्हें अपने खेत में बदलाव करने का भरोसा मिलता है।

प्राकृतिक खेती से बचित्र सिंह चौहान ने बदली अपनी ज़िंदगी, नौकरी छोड़कर बने सफल किसान

खेती से जुड़ा नया भविष्य

बचित्र सिंह चौहान की कहानी दिखाती है कि सही जानकारी, मेहनत और नए तरीके अपनाने की इच्छा से खेती में बदलाव लाया जा सकता है। निजी नौकरी छोड़कर खेती को चुनना उनके लिए एक बड़ा फैसला था, लेकिन उन्होंने अपने अनुभव से इस रास्ते को आगे बढ़ाया।

आज वह प्राकृतिक खेती के ज़रिए कम लागत में फ़सलें उगाने के साथ दूसरे किसानों को भी इसके बारे में जानकारी दे रहे हैं। उनका खेत इस बात की मिसाल है कि खेती को केवल परंपरागत तरीके से करने के बजाय उसमें नए प्रयोग करके भी आगे बढ़ा जा सकता है।

उनकी कोशिश है कि ज़्यादा से ज़्यादा किसान प्राकृतिक खेती को समझें, अपने खेतों में इसे आजमाएं और अपने अनुभवों के आधार पर खेती को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ें।

ये भी पढ़ें : प्राकृतिक खेती से प्रवीण कुमार ने बदली खेती की राह, कम ख़र्च में उगा रहे बेहतर सब्ज़ियां

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुंचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top