Google-Microsoft को टक्कर: भारत का ‘Anna Chakra’ किसानों के लिए बना गेम-चेंजर तो दुनिया के लिए मिसाल

अन्न चक्र एक स्मार्ट रूट प्लानर (Anna Chakra a smart route planner) है, जो ये तय करता है कि अनाज से भरा ट्रक किस रास्ते से चले, कितनी दूरी तय करे और किस गोदाम में सामान उतारे ताकि सबसे कम समय में, सबसे कम खर्च में और सबसे ज्यादा लोगों तक अनाज पहुंच सके।

Google-Microsoft को टक्कर: भारत का 'Anna Chakra' किसानों के लिए बना गेम-चेंजर तो दुनिया के लिए मिसाल

इमेजिन, देश के किसी एक कोने में उगा अनाज दूसरे छोर पर बैठे एक गरीब की थाली तक पहुंचते-पहुंचते रास्ते में ही बर्बाद हो जाता है, या फिर उसकी कीमत इस कदर बढ़ जाती है कि वो आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाता है। ये एक बड़ी चुनौती थी, जिससे निपटने के लिए भारत सरकार ने एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम उठाया है ‘अन्न चक्र’ (Anna Chakra)।

दिसंबर 2024 में लॉन्च किया गया अन्न चक्र कोई साधारण स्कीम नहीं, बल्कि एक मॉडर्न टेक्निकल टूल है, जो भारत के सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System) की रीढ़ की हड्डी को मजबूत करने का काम करेगा । इसे संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (United Nations World Food Programme) और आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों के सहयोग से डेपलप किया गया है। भारत का Anna Chakra अब पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बन रहा है। ये दिग्गज कंपनियों Google-Microsoft को भी टक्कर दे रहा है।  

क्या है Anna Chakra?  

आसान भाषा में समझें तो अन्न चक्र एक स्मार्ट रूट प्लानर (Anna Chakra a smart route planner) है, जो ये तय करता है कि अनाज से भरा ट्रक किस रास्ते से चले, कितनी दूरी तय करे और किस गोदाम में सामान उतारे ताकि सबसे कम समय में, सबसे कम खर्च में और सबसे ज्यादा लोगों तक अनाज पहुंच सके।

ये पूरे देश के पीडीएस नेटवर्क (PDS Network) को डिजिटल नक्शे पर उतारता है। इसमें देश भर के लगभग 4.37 लाख राशन की दुकानें (Fair Price Shops) और 6700 से ज़्यादा गोदाम शामिल हैं। ये टूल पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म और रेलवे की फ्रेट ऑपरेशंस इंफॉर्मेशन सिस्टम (PM Gati Shakti platform and Freight Operations Information System of Railways) से जुड़कर अनाज की आवाजाही का सबसे किफायती और तेज़ रास्ता खोजता है। पहले जहां यातायात की योजनाएं पुराने तरीकों से बनती थीं, वहीं अब एल्गोरिदम (mathematical formula) ये तय करेगा कि कौन सा ट्रक किस रूट पर जाए।

कितना बड़ा है ये प्रोजेक्ट?

इसकी विस्तार का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि इसका फायदा उन 81 करोड़ लोगों तक पहुंचेगा, जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत सस्ता अनाज पाने के हकदार हैं। 30 राज्यों में किए गए आकलन के बाद ये दावा किया जा रहा है कि इससे हर साल लगभग 250 करोड़ रुपये की बचत होगी।

ये बचत सिर्फ सरकारी खजाने तक सीमित नहीं है। जब अनाज की ढुलाई में लगने वाला किलोमीटर का आंकड़ा (QKM – क्विंटल x किलोमीटर) 58 करोड़ कम हो जाएगा, तो इसका सीधा मतलब है कि डीजल की खपत घटेगी, समय की बचत होगी और पर्यावरण में 35 फीसदी तक कार्बन उत्सर्जन कम होगा।

Franz Edelmann Award 2026  का फाइनलिस्ट 

Anna Chakra को अब दुनिया भी सलाम कर रही है। इसे हाल ही में ऑपरेशंस रिसर्च के क्षेत्र के ‘Nobel Prize’ कहे जाने वाले Franz Edelmann Award 2026 के लिए 6 फाइनलिस्ट में चुना गया है। ये उपलब्धि बताती है कि भारत अब केवल खाद्यान्न उत्पादन में ही नहीं, बल्कि उसके Distribution Management में भी दुनिया के लिए मिसाल बन रहा है। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और एनवीडिया जैसी दिग्गज कंपनियों के साथ इस सूची में शामिल होना भारत के लिए गर्व की बात है।

किसानों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा अन्न चक्र

अब सवाल उठता है कि आखिर इसका सीधा फायदा किसान भाइयों को कैसे मिलेगा? 

1.फसल की बर्बादी में कमी: अक्सर फसल कटने के बाद उसे मंडी या गोदाम तक पहुंचाने में देरी या गलत रूटिंग की वजह से नुकसान होता था। अन्न चक्र से सप्लाई चेन इतनी चुस्त हो गई  कि फसल खेत से निकलकर सीधे सही जगह पहुंचेगी और उसकी क्वालिटी बरकरार रहती है।

2.सरकारी ख़रीद में पारदर्शिता: जब लॉजिस्टिक्स पारदर्शी होगा और नुकसान कम होगा, तो सरकार के पास अधिक अनाज बचेगा। इससे किसानों से खरीद की प्रक्रिया भी सुचारू रूप से चल सकेगी। अनाज की ढुलाई में होने वाली ‘लीकेज’ पर रोक लगती है।  

3.मुनाफे का सीधा फायदा: सरकार जब ढुलाई में 250 करोड़ रुपये बचाती है, तो ये पैसा किसानों के कल्याण, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को बेहतर बनाने या कृषि क्षेत्र के बुनियादी ढांचे में लगाया जा सकता है। 

 

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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