देशभर में मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। हाल ही में रोम में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) मुख्यालय में अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष 2023 का शुभारंभ किया गया। किसानों के लिए मोटे अनाज की खेती को सुगम बनाने के लिए एक कृषि उपकरण विकसित किया गया है।
आज के समय में मशीनीकरण और कृषि तकनीकों ने खेती के हर एरिया में बहुत सी समस्याओं को हल किया है। खेती में मशीनीकरण के कारण गुणवत्ता युक्त उत्पादन और प्रोसेसिंग के ज़रिए किसान अच्छी आमदनी कर सकते हैं। बस ज़रुरत है आधुनिक तकनीकों के बारे में सही जानकारी लेकर खेती में इस्तेमाल की जाएं।

आम तौर पर मिलेट्स यानी मोटे अनाज अपने उच्च पोषण मूल्य के लिए जाने जाते हैं। हाल के वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में बाजरा और छोटे दाने वाले अनाजों की विकास संभावनाओं को देखते हुए देश में इसके उत्पादन को बढ़ावा भी मिल रहा है। लोगों में स्वास्थ्य संबधी जोखिमों को कम करने के लिए मोटे अनाज यानि ज्वार, मोती बाजरा, रागी, छोटा बाजरा, फॉक्सटेल बाजरा, प्रोसो बाजरा, बरनार्ड बाजरा, कोदो अनाज को भोजन में शामिल करने की सलाह दी जा रही हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि मोटा अनाज गेहूं और चावल की तुलना में सस्ते होने के साथ-साथ उच्च प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और आयरन जैसे कई मिनरल्स से युक्त होता है
बाजरे में सबसे बड़ी समस्या ये है कि किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। दाने छोटे होने के कारण छिलका निकालने में काफ़ी मेहनत करनी पड़ती है। अगर किसान छिलके सहित बेचते हैं तो उन्हें बहुत कम कीमत मिलती है। इन सभी समस्याओं को देखते हुए बाजरे की भूसी निकालने के लिए मिलेट डिहलर मशीन (Millet Dehuller Machine) विकसित की गई है।
सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग रीज़नल सेंटर कोयंबटूर के हेड डॉ. एस. बालासुब्रमण्यम ने इस मशीन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मिलेट के दानों का छिलका उतारकर ही आहार में बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन दूसरी ओर समस्या ये है कि बाजरे के छिलके गोंद की तरह अनाज से चिपक जाते हैं। परंपरागत तरीके से मूसल या लकड़ी के स्टोनर ग्राइंडर का उपयोग करके छिलके को मैन्युअल रूप से हटाया जाता है। इसमें बाजरे के दानों में भूसा मिलाने से दाना टूट जाता है या आटे की गुणवत्ता खराब हो जाती है। इस प्रक्रिया में काफ़ी मेहनत और समय लगता है। इस वजह से बाजरे की खपत में भारी गिरावट आई है।

डॉ. सुब्रमण्यम ने कहा कि इन सभी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी क्षेत्रीय केंद्र संस्थान ने बाजरा के छिलके निकालने के लिए मिलेट डिहलर मशीन (Millet Dehuller Machine) विकसित की है। इससे छीलने का काम बहुत आसान हो गया है। अनाज टूटने की समस्या भी कम हुई है। उन्होंने कहा कि 100 किलो बाजरा से 60 से 65 किलो भूसी रहित अनाज प्राप्त होता है। बाजरे की मिलेट डिहलर मशीन को 10 बाई 12 फीट के कमरे में लगाया जा सकता है और सिंगल फ़ेज करंट से चलाया जा सकता है। इसे एक व्यक्ति आसानी से ऑपरेट कर सकता है। इस मशीन से 10 से 12 तरह के बाजरे के दाने आसानी से निकाले जा सकते हैं। एक घंटे में 60 से 70 किलो मिलेट के छिलके निकाले जा सकते हैं।

डॉ. सुब्रमण्यम ने आगे जानकारी दे कि इस मशीन की कीमत 80 हज़ार रुपये है, जो क्लीनर, स्टोनर, डेहलर का काम करती हैं। अगर इसमें ग्रेडर और पैनिंग तकनीक को जोड़ दिया जाए तो इस मशीन की कीमत 2 से 2.50 लाख हो जाती है। उन्होंने कहा कि बाजरे की प्रोसेसिंग के बाद इसकी कीमत दोगुनी होकर 10 गुना हो जाती है, जिससे किसानों को फ़ायदा होता है। देश में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और रेडी-टू-ईट उत्पादों की मांग में उछाल आया है। मोटे अनाज से कई तरह के रेडी-टू-ईट उत्पाद बाज़ार में बिक भी रहे हैं और लोग इसे पसंद भी कर रहे हैं।

मोटे अन्नज को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से technology transfer और मूल्य वर्धित उत्पादों के विकास के लिए संपूर्ण चैन विकसित की जा रही है। हाल के वर्षों में घरेलू और ग्लोबल स्तर पर मांग बढ़ने के कारण मोटे अनाज के उत्पादन में बढ़ोतरी तो हुई ही है बल्कि इसके निर्यात में भी इज़ाफ़ा हुआ है।
ये भी पढ़ें: मोटे अनाज की खेती कर रहे हैं किसानों के साथ मिलकर शर्मिला ओसवाल ने खड़ा किया व्यवसाय
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

ये भी पढ़ें:
- लखनऊ का मलिहाबादी दशहरी आम अब ग्लोबल पहचान की ओर, ODOP में होगा शामिलमलिहाबादी दशहरी आम की मांग अब 25 से अधिक देशों में है। ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, कनाडा, सऊदी अरब और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में यह आम पहुंच रहा है।
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पर्यावरण और जलवायु कार्रवाई को लेकर सहयोग पर दिया ज़ोरद्रौपदी मुर्मू ने NGT कॉन्फ्रेंस में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर ज़ोर दिया।
- केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय का बड़ा ऐलान: रेशम उत्पादक किसानों की बढ़ेगी आमदनी,’सर्वश्रेष्ठ रेशम किसान पुरस्कार’ की शुरुआत की घोषणासरकार की रणनीति सीधी और वैज्ञानिक है। शहतूत के पत्तों की पैदावार बढ़ाकर और रेशम के कीड़ों के पालन-पोषण के राउंड को बढ़ाकर किसानों की आमदनी 10 से 12 लाख रुपये तक ले जाने का टारगेट है।
- पराली जलाने पर केंद्र सख़्त: ज़मीन के रिकॉर्ड में 15 महीने तक दर्ज रहेगा नाम, दोबारा जलाने पर और कड़ी कार्रवाई!ये नियम दिल्ली-एनसीआर और आसपास के उन इलाकों में लागू होगा जहां पराली जलाने की घटनाओं का असर दिल्ली की हवा पर पड़ता है।
- Samriddh Vidisha Model: तैयार हुआ ग्रामीण गरीबी को जड़ से ख़त्म करने के लिए नया रोडमैपSamriddh Vidisha Model की सबसे बड़ी ख़ूबी है कि आमदनी के एक नहीं, कई साधन है। किसानों को आधुनिक खेती के साथ दूध, बकरी, मुर्गी और मधुमक्खी पालन से जोड़ा जाएगा, ताकि एक सोर्स रुकने होने पर परिवार न बिखरे।
- दक्षिणी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026 में राज्यों को समय पर लक्ष्य पूरा करने के निर्देशदक्षिणी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026 में राज्यों से Farmer ID, AgriStack और कृषि लक्ष्यों को तय समय में पूरा करने को कहा गया।
- Mahila Shetkari Portal: महाराष्ट्र सरकार का ऐतिहासिक कदम,अब खेत में काम करने वाली हर महिला बनेगी ‘किसान’अधिनियम के अनुसार, महिला को किसान मानने का आधार सिर्फ ज़मीन का मालिकाना हक नहीं, बल्कि खेती में उसकी ‘वास्तविक भागीदारी’ होगी।
- Soil Carbon Payments से किसानों को अतिरिक्त आय की नई पहलSoil Carbon Payments के ज़रिए पंजाब और हरियाणा के 2500 से ज़्यादा किसानों को 2.9 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान मिलेगा।
- Reimagining Indian Agriculture रिपोर्ट में ख़ुलासा : देश के कुल भू-भाग का लगभग 33 फीसदी ज़मीन बंजर!देश के कुल भू-भाग का लगभग 33 फीसदी ज़मीन ख़राब हो रही है। रिपोर्ट में ICAR-Indian Institute of Soil Science के आंकड़ों का हवाला दिया गया है।
- त्योहारी सीजन में राहत की उम्मीद: सरकार घटा सकती है खाद्य तेल पर आयात शुल्कभारत अपनी खाद्य तेल की ज़रूरत का करीब दो-तिहाई हिस्सा आयात से पूरा करता है। ये आयात मुख्य रूप से मलेशिया, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना, रूस और यूक्रेन से होता है।
- बिहार में बाढ़ से फ़सल नुक़सान का जायज़ा लेने पहुंचे शिवराज सिंह चौहानशिवराज सिंह चौहान ने बिहार में बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायज़ा लिया और किसानों को केंद्र से हर संभव मदद का भरोसा दिया।
- सिवनी का जम्बो सीताफल: जीआई टैग के साथ बदलेगी किसानों की तकदीर,इंटरनेशनल मार्केट से जोड़ने की तैयारी शुरूसिवनी का जम्बो सीताफल (Seoni’s Jumbo Custard Apple) औसतन 200 से 650 ग्राम का होता है, लेकिन भूतबंधानी क्षेत्र में कई फल 800 ग्राम से 1 किलोग्राम तक के मिलते हैं।
- World Circular Economy Forum 2026 में भारत की सर्कुलर इकॉनमी पर वैश्विक चर्चाWorld Circular Economy Forum 2026 में 62 देशों के 3600 से अधिक stakeholders ने Circular Economy पर चर्चा की।
- किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना: 32 साल इंतज़ार के बाद ऐतिहासिक समझौता,जानिए किस राज्य को मिलेगा सबसे बड़ा लाभकिशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना (Kishau Multipurpose Project) की नींव 1994 के ऊपरी यमुना जल समझौते में रखी गई थी, लेकिन आर्थिक बोझ और राज्यों के हितों के टकराव ने इसे आठ साल तक ठप कर दिया।
- खेती के साथ मधुमक्खी पालन: पाएं 1.28 लाख का अनुदान,1.92 लाख रुपये की लागत में शुरू करें अपना ख़ुद का बिज़नेसमधुमक्खी पालन की सबसे बड़ी खूबी ये है कि इसके लिए आपको बड़े खेत या अलग ज़मीन की ज़रूरत नहीं है। आप अपने घर के आसपास, बगीचे में, पेड़-पौधों वाली जगह पर आसानी से यह यूनिट लगा सकते हैं।
- Google और Mitti Labs का बड़ा करार: धान के खेतों से मीथेन गैस की कटौती और पानी की बचतमिट्टी लैब्स अपनी ‘Geo-AI’ Technology का इस्तेमाल कर रही है, जिसे नासा के सहयोग से विकसित किया गया है।
- CAZRI Moth Bean की क़िस्मों ने सूखे में दिखाई शानदार सहनशीलता, 35 दिन तक बारिश न होने पर भी बनी रही फ़सलCAZRI Moth Bean की क़िस्मों ने 35 दिन के सूखे में भी बेहतर प्रदर्शन कर जलवायु अनुकूल खेती की उम्मीद बढ़ाई।
- ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज: ग्लोबल साउथ की फ़सल का असली मोल वापस पानाब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज से ग्लोबल साउथ के किसानों को फ़सल की क़ीमत तय करने में कैसे अधिक अधिकार और वैश्विक कृषि बाज़ार में नई भूमिका मिल सकती है, जानें।
- BRICS Summit 2026 : कृषि में AI, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी और डिजिटल सेवाओं से किसानों, कारोबारियों को होगा लाभBRICS देशों के लिए Early Warning Data Integration Guidelines तैयार की गई हैं। इसका मकसद बाढ़, चक्रवात या भूकंप जैसी आपदाओं से पहले देशों के बीच डेटा साझा करना है
- आंध्र प्रदेश सरकार का पोल्ट्री फार्मस के लिए 657 करोड़ का तोहफ़ा, ब्याज से लेकर बिजली तक सब सस्ताशहरी क्षेत्रों में पोल्ट्री शेड बनाने पर लगने वाले डेवलपमेंट और बेटरमेंट चार्ज से छूट दी गई है। ग्राम पंचायतों के बराबर कम शुल्क पर मंज़ूरी मिलेगी।





















