ऑटोमैटिक सोलर लाइट ट्रैप (Automatic Solar Light Trap): फसलों को कीटों से बहुत हानि होती है। कई बार तो किसानों को कीटों की वजह से फसल बर्बाद होने के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए ज़्यादातर किसान इससे निपटने के लिए केमिकल युक्त कीटनाशकों का उपयोग करते हैं, लेकिन ये कीटनाशक पर्यावरण के साथ ही फसलों की पौष्टिकता को भी नुकसान पहुंचाते हैं।
ऐसे में जैविक खेती को बढ़ावा देने और कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से निपटने के लिए उत्तराखंड की कंपनी सारांश एग्रो सॉल्यूशंस (Saaransh Agro Solutions) ने एक अनोखी मशीन बनाई है। ऑटोमैटिक सोलर लाइट ट्रैप, जो बिना किसी केमिकल के कीटों का खात्मा करके जैविक खेती में मदद करती है। क्या है मशीन की ख़ासियत और कैसे ये काम करती है, इस बारे में कंपनी की डिजिटल मार्केटिंग टीम से जुड़े सौरभ कुमार ने विस्तार से बात की किसान ऑफ़ इंडिया के संवादादता सर्वेश बुंदेली से।
बिना बिजली वाले इलाकों के लिए उपयोगी
सौरभ कुमार कहते हैं कि ऑटोमैटिक सोलर लाइट ट्रैप में ऐसी कोई चीज़ नहीं है, जो फसल को नुकसान पहुंचाए। इसमें सोलर पैनल लगे हुआ है। इसके कारण बिजली न होने की स्थिति में भी ये काम करता रहेगा और किसानों की फसल कीटों से करेगा।

ऑटोमैटिक सोलर लाइट ट्रैप मशीन की ख़ासियत
सौरभ बताते हैं कि इसमें 10 वॉट का सोलर लाइट पैनल लगा होता है, जो इसके अंदर लगी बैटरी को चार्ज करता है। इससे रात के लिए बैकअप तैयार हो जाता है। मशीन में लगी ब्लू कलर की यूवी लाइट कीटों को अट्रैक्ट करती हैं और जब ये नज़दीक आते हैं तो मशीन के आगे लगी प्लेट्स से टकरारकर नीचे बॉक्स में गिर जाते हैं। इस तरीके से बिना किसी कीटनाशक के किसान कीटों से छुटकारा पा सकते हैं।
सिर्फ़ शत्रु कीट पर हमला
कुछ कीट फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिन्हें शत्रु कीट कहा जाता है, जबकि कुछ कीट फसलों के विकास के लिए ज़रूरी होते हैं। सौरभ कहते हैं कि ऑटोमैटिक सोलर लाइट ट्रैप मशीन को सिर्फ़ शत्रु कीटों को खत्म करने के मकसद से ही बनाया गया है। ये कीट शाम 6 से रात 10 बजे के बीच ज़्यादा एक्टिव होते हैं। इसलिए मशीन से अटैच सोलर हीट लाइट अंधेरा होते ही अपने आप जल जाती है और सुबह बंद हो जाती है। इससे शत्रु कीट को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

फसल के हिसाब से एडजस्टमेंट
सौरभ कहते हैं कि हर पौधे की लंबाई अलग होती है जैसे बेल वाले पौधे फैले होते हैं, जबकि फलों के पौधे लंबे होते हैं। ऐसे में फसल बेल वाली या पौधों वाली है या बड़े फलों के बड़े पेड़ है, उस हिसाब से मशीन की ऊंचाई को एडजस्ट किया जा सकता है। मतलब कीट जिस हाइट तक उड़ते हैं, पैनल को एडजस्ट किया जा सकता है।
आगे सौरभ कुमार बताते हैं कि पैनल की फेसिंग दक्षिण दिशा की ओर होगी और इसे कहीं भी रखा जा सकता है। सौरभ कहते हैं कि कुछ लोगों को लगता है कि सिर्फ़ धूप होने पर ही पैनल काम करता है, मगर ऐसा नहीं है। धूप नहीं इसे रौशनी चाहिए और ये रौशनी से ही चार्ज हो जाती है।

गारंटी और कीमत
इस अनोखी मशीन के बारे में सौरभ कहते हैं कि किसानों को इस पैनल के लिए 5 साल की गारंटी मिलेगी। जबकि बैटरी के लिए एक साल की गारंटी मिलेगी, क्योंकि ये धूप, बारिश आदि से ये खराब हो सकती है। सोलर पैनल के पीछे ऑन-ऑफ का बटन भी दिया है ताकि अगर कोई चाहे तो इसे मैन्युअली ऑपरेट कर सकता है। वैसे इसकी ज़रूरत नहीं पड़ेगी। अगर कोई किसान इसे खरीदना चाहता है, तो कंपनी से सीधे संपर्क कर सकता है। फिलहाल इस मशीन की कीमत 10 हज़ार रखी गई है।

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