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Kisan Diwas Special: मशहूर किसान प्रेम सिंह से जानिए खेती-किसानी के अचूक 5 गुरु मंत्र

बंज़र धरती पर लहराई खुशहाली की फसल

बुंदेलखंड के बांदा ज़िले के रहने वाले जाने- माने किसान प्रेम सिंह को ‘तपते रेगिस्तान’ में तरक्की की फसल उगाने का श्रेय जाता है।

देशभर में आज राष्ट्रीय किसान दिवस (National Farmers Day) मनाया जा रहा है।  लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर 23 दिसंबर को ही क्यों किसान दिवस (Kisan Diwas) मनाया जाता है? दरअसल, इस दिन देश के 5वें प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती होती है। कृषि क्षेत्र में उनके योगदानों को सराहते हुए उनके जन्म दिवस को ही किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है। Kisan Diwas 2021 के इस ख़ास दिन पर हम आपको एक ऐसे किसान के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपने क्षेत्र की बंजर पड़ी ज़मीन से सोना उगाने का काम किया। उनका नाम है प्रेम सिंह।

बंजर ज़मीन की तस्वीरें आपने अक्सर अखबारों में या टीवी पर देखीं होंगी। ऐसी कई जगहें पूरे देश में हैं, जहाँ  प्यासी धरती पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसती है। हालात ऐसे भी हैं, कि कई बार तो पानी बाहर से पहुंचाना पड़ता। ऐसी ही एक जगह है बुंदेलखंड, जिसे उत्तर प्रदेश का तपता रेगिस्तान भी कहा जाता है।

बुंदेलखंड के बांदा ज़िले के रहने वाले जाने-माने किसान प्रेम सिंह
बुंदेलखंड के बांदा ज़िले के रहने वाले जाने- माने किसान प्रेम सिंह

इस तपते रेगिस्तान को अपने परिश्रम, लगन और धैर्य से सींचने का श्रेय जिस व्यक्ति को जाता है वो हैं प्रेम सिंह।  प्रेम सिंह, जिनके इस ब्रह्म वाक्य  “किसान पाले गोरू और गोरू पाले खेत और खेत से ही सधते किसान के सब हेत” आज हर किसान शायद दोहराना चाहता है। इन्हीं प्रेम सिंह से मुलाक़ात कर किसान ऑफ़ इंडिया ने ये ख़ास रिपोर्ट तैयार की है।

प्रेम सिंह

कौन हैं प्रेम सिंह ?

बुंदेलखंड के बांदा ज़िले के रहने वाले जाने- माने किसान प्रेम सिंह को ‘तपते रेगिस्तान’ में तरक्की की फसल उगाने का श्रेय जाता है। आज उनसे बुंदेलखंड या उत्तर प्रदेश से ही नहीं, बल्कि देश – विदेश के कई प्रगतिशील और जाने माने किसान खेती का गुरु मंत्र लेने आते हैं। 1987 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पास आउट होने के बाद प्रेम सिंह ने खेती का रुख किया और अपनी पुश्तैनी ज़मीन को ही कर्मभूमि चुना। खेती को अपना तो लिया, लेकिन किसान बनना प्रेम सिंह के लिए आसान नहीं था। उनके इस फैसले से घरवाले खुश नहीं थे, लेकिन प्रेम सिंह खेती को ही अपना जीवन समर्पित करने का मन बना चुके थे।

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प्रेम सिंह ऐसे गुरु हैं, जो किसी को भी प्रगतिशील लेकिन अपनी ज़मीन से जुड़ी खेती का ज्ञान देने से पीछे नहीं हटते। वैसे तो प्रेम सिंह के पास  पास जैविक या पारंपरिक खेती के लिए गुरु मंत्रों की भरमार है, लेकिन खेती के उनके दर्शन का निचोड़ हैं ये पांच बड़े गुरु मंत्र।

प्रेम सिंह के पांच बड़े गुरु मंत्र:

  • गुरु मंत्र न. 1 – पशुपालन के बिना संभव नहीं खेती
  • गुरु मंत्र न. 2 – खेत के एक तिहाई हिस्से में लगाएं बाग
  • गुरु मंत्र न. 3 – परिवार के लिए खुद उगाएं फसल
  • गुरु मंत्र न. 4 – उपज को करें प्रोसेस
  • गुरु मंत्र न. 5 – कमाई का एक हिस्सा ज़रूरतमंदों पर लगाएं
प्रेम सिंह
मॉडर्न फ़ार्मिंग से लेकर आवर्तनशील खेती के बारे में प्रेम सिंह ने कई जानकारियां बताई

प्रेम सिंह के खेती को उन्नत बनाने के तरीकों पर आधारित किसान ऑफ इंडिया की Exclusive वीडियो आप ऊपर देख सकते हैं। इस वीडियो में प्रेम सिंह ने अपने सभी गुरु मंत्रों पर विस्तार से बात की। इस वीडियो में आपको मॉडर्न फ़ार्मिंग से लेकर आवर्तनशील खेती के बारे में कई ज़रूरी जानकारियां मिलेंगी।

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