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महानगरों की बेरुखी पर भारी पड़ी गांव की मिट्टी, विदेश की नौकरी छोड़ खेती में जुटे रामपाल

मध्य प्रदेश के अगरमालवा जिले के रामपाल विदेश की नौकरी छोड़ अपने गांव लौट आए। रामपाल ने कई अन्य लोगों के साथ मिलकर कुछ एकड़ जमीन पर खेती करनी शुरू कर दी है। उनके साथ दर्जनों किसान जुड़ गए हैं और सभी काफी पढ़े-लिखे युवा हैं। उनके लिए खेती में मेहनत और तकनीक के साथ जो आमदनी है, वह बाहर किसी भी नौकरी की तुलना में कहीं अच्छी है।

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रामपाल भी दूसरे लोगों की तरह ही हैं बस अलग है उनकी कहानी। मध्य प्रदेश के अगरमालवा जिले के रामपाल विदेश की नौकरी छोड़ अपने गांव लौट आए। क्यों लौटे, रामपाल कहते हैं कि किसी भी प्राइवेट सेक्टर में १०-१२ घंटे काम करने के बाद किसी तरह की जॉब सिक्योरिटी नहीं है। गांव में मेरे यहां अच्छी खासी खेती है। पिता किसान हैं।

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अगरमालवा जिले में बगलामुखी धाम नलखेड़ा के पास छोटे से गांव भैंसोदा के रहने वाले रामपाल तेजरा पाटीदार अफ्रीकी देश में अच्छे पद पर काम करते थे। कोरोना महामारी से कुछ माह पहले ही वे गांव आए। २२ मार्च को जनता कर्फ्यू लागू हो गया और अनिश्चय बढ़ता गया। कई कंपनियों में जारी छंटनी ने उन्हें भी परेशान कर रखा था। २४ मार्च को देश भर में लॉकडाउन की घोषणा की गई उधर, रामपाल ने तय कर लिया कि वे अब गांव में ही रहेंगे।

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रामपाल बताते हैं, मेरी नौकरी पर तो कोई खतरा नहीं था लेकिन मेरे कई परिचितों की नौकरी पिछले कुछ महीनों में चली गई। वो लोग बहुत परेशान हैं। तभी से मेरे दिमाग में चल रहा था कि क्यों न गांव में ही रहकर कुछ किया जाए। मेरे पास जमीन भी है और गांव में घर भी। विदेश लौट जाना था लेकिन कोरोना महामारी से समूचे विश्व को लड़खड़ाता देख अपने हुनर को हिंदुस्तान में दिखाने के लिए संकल्प लिया। रामपाल के मुताबिक, यहीं से मैंने अपने बॉस को इस्तीफा भेज दिया और फैसला किया कि अब गांव में ही रहूंगा और खेती करूंगा।

आमदनी नौकरी की तुलना में अच्छी

रामपाल ने कई अन्य लोगों के साथ मिलकर कुछ एकड़ जमीन पर खेती करनी शुरू कर दी है। उनके साथ दर्जनों किसान जुड़ गए हैं और सभी काफी पढ़े-लिखे युवा हैं। उनके लिए खेती में मेहनत और तकनीक के साथ जो आमदनी है, वह बाहर किसी भी नौकरी की तुलना में कहीं अच्छी है।

यू-ट्यूब से भी ले रहे मदद

३० साल के रामपाल का बचपन भले ही गांव में बीता हो लेकिन उन्हें खेती का कोई अनुभव नहीं था। बावजूद इसके, वे खेती कैसे कर रहे हैं? इस सवाल पर रामपाल बताते हैं, नौकरी छोड़कर गांव आने का फैसला इतना आसान नहीं है। व्यक्तिगत रूप से नौकरी में मुझे कोई दिक्कत भी नहीं थी। लेकिन परिवार और अपनी गांव की मिट्टी की खुशबू ने मुझे विदेश के लग्जरी जीवन के बीच चल रही नौकरी को छोड़ने पर विवश किया। पिछले २ महीनों में पलायन की त्रासदी जो हम लोगों ने देखी, उससे ऐसा लगा कि क्यों न अपने घरों में ही रोजगार के साधन ढूंढ़े जाएं।

रामपाल बताते हैं कि वे खेती के लिए आधुनिकता, यू-ट्यूब और अन्य माध्यमों से योजना बना रहे हैं। कहते हैं कि इसी साल से इसकी शुरुआत कर देंगे। फिलहाल उन्होंने संतरा, हरी मिर्ची, सब्जियां, अच्छी क्वालिटी के गेहूं, सोयाबीन की खेती शुरू कर दी है।

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